वीर भूमि राजस्थान के वीर वीरांगनाओं को प्रणाम

Samachar Jagat | Thursday, 01 Nov 2018 05:11:05 PM
Veer Land Promoters to Veer Veerangans of Rajasthan

बलिदान एवं शौर्य का धनी राजस्थान, वीर प्रसूता इस पावन भूमि ने स्वराज्य सूर्य महाराणा प्रताप, अस्सी घाव सहने वाले महाराणा सांगा, वप्यारावल, पृथ्वीराज चौहान, भामाशाह, पन्नाधाय, दुर्गादास राठौड़, मीरा बाई, हाड़ारानी, पद्मिनी, किरणदेवी जैसे महान वीर-वीरांगाओं को जन्म देकर न केवल राजस्थान को गौरवान्वित किया है बल्कि हिन्दुस्तान को भी गौरव दिया है। अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की प्रसिद्ध दरगाह, पुष्कर तीर्थराज, नाथद्वारा, महावीर स्वामी का मंदिर प्रसिद्ध तीर्थ स्थान तो चित्तौड़गढ़, रणथम्भौर, कुंभलगढ़, नाहरगढ़, अजमेर, आमेर, कोटा, बंूदी और जोधपुर जैसे ऐतिहासिक किले-दुर्ग। रणकपुर, अर्बुदाचल (आबू पर्वत) जैसलमेर, उदयपुर, जयपुर, अलवर, हल्दीघाटी, भरतपुर अभयारण्य आदि मनमोहक पर्यटन स्थल व ऐतिहासिक शहर हमारे राजस्थान को सम्मानित कर रहे हैं।

प्राचीन काल से लेकर अब तक कितने ही वीर योद्धा, ऋषि, मुनि, संत और मातृभूमि पर अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले इस भूमि पर जन्म लिया है। यह शरीर तो सबका ही नश्वर होता है लेकिन चरित्र, चिंतन, व्यक्तित्व, तप, तपस्या और त्याग अमर रहते हैं। हम उनकी महान जिंदगियों और उनके सत्कर्मों से अपने जीवन को सार्थक और सफल बना सकते हैं। राजस्थान के वीर-वीरांगनाओं और महापुरूषों ने अपनी पहचान, संस्कृति, अस्मिता, मान-मर्यादा और गौरव को बनाए रखने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है और यही कारण है कि राजस्थान की मिट्टी कण-कण से शौर्य की महक आ रही है। 

इन सभी वीरों और वीरांगनाओं के सम्पूर्ण जीवन को बारीकी से देखा जाए तो एक ही बात उभर कर आती है कि वे स्वयं के लिए नहीं जिए, वरन् मातृभूमि के लिए जिए, उन्होंने स्वयं के लिए मेहनत नहीं की, कष्ट-पीड़ाएं नहीं झेली वरन् अपनी प्रजा के स्वाभिमान के लिए, सम्मान के लिए और अच्छे जीवन के लिए, सब सुख-सुविधाओं के लिए बहुत सारी यातनाएं झेली। उनके जीवन का उद्देश्य इतना बड़ा था कि उसमें ऊंच-नीच, छोटा-बड़ा, गरीब-अमीर, जाति-पांति और अन्य विसंगतियों के लिए कोई जगह नहीं थी। वे केवल मातृभूमि के स्वाभिमान के लिए कुछ भी कष्ट उठाने के लिए हरदम तैयार रहते थे। 

उनके जीवन में परमार्थ था, स्वार्थ नहीं, उनके जीवन में स्वाभिमान था अभिमान नहीं, उनके जीवन में मातृभूमि की रक्षा-सुरक्षा प्रथम थी, स्वयं की रक्षा-सुरक्षा नहीं, उनके जीवन में मातृभूमि का विकास प्रथम था, स्वयं का विकास नहीं और उनके जीवन में जो सबसे बड़ी बात थी वह सर्वकल्याण की भावना थी।

प्रेरणा बिन्दु:- 
राजस्थान के समस्त वीर-वीरांगनाओं को कोटि-कोटि नमन जिन्होंने मातृभूमि के गौरव को बुलंदियां दी और और आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने।



 
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