मौसम का बनता-बिगड़ता मिजाज

Samachar Jagat | Friday, 17 May 2019 02:08:51 PM
Weather-deteriorating mood

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

मौसम का अनुमान लगाने वाली निजी कंपनी स्काईमेट का दावा है कि इस बार मानूसन सामान्य से 7 फीसदी कम यानी 93 फीसदी रह सकता है। स्काईमेट के पूर्वानुमान के अनुसार इस बार मानसून तीन दिन की देरी से चार जून को केरल पहुंचेगा। आमतौर पर मानूसन एक जून को केरल तट से टकराता है। स्काईमेट के एमडी जतिन सिंह ने मंगलवार को बताया है कि इस बार मानूसन 4 जून को केरल में दस्तक दे सकता है। उनका यह भी कहना है कि इसमें दो दिन आगे-पीछे होने की गुंजाइश है। 

उनके अनुसार इस साल की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और मानसून कमजोर भी रह सकता है। स्काईमेट में मौसम पूर्वानुमान और जलवायु परिवर्तन विभाग के अध्यक्ष सेवानिवृत एयर वाइस मार्शल जीपी शर्मा ने कहा कि इस बार मानसून का भंवर अरब सागर से रहेगा, जो अच्छा संकेत नहीं है। इस कारण मानसून उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर ज्यादा बढ़ेगा और समय के साथ देश के मुख्य मैदानी हिस्से से दूर होता चला जाएगा। शर्मा का कहना है केरल में मई के अंतिम सप्ताह में मानसून पूर्व बारिश शुरू हो जाएगा। इस बार मानसून से पहले ही बारिश काफी अच्छी रहेगी। स्काईमेट के एमडी (प्रबंध निदेशक) जतिन सिंह ने कहा कि मानसून के आने में देरी या जल्दी और मानसून की प्रगति में कोई सीधा संबंध अब तक स्थापित नहीं किया जा सका है। लेकिन इस बार मानूसन के आगे बढ़ने में भी देरी हो सकती है।

 जब मानूसन का आगमन होगा, उस समय अलनीनो प्रभाव रहेगा और इसलिए पहले दो सप्ताह में बारिश कम रहने का अनुमान है। यहां यह बता दें कि स्काईमेट ने मध्य भारत में सबसे कम 91 प्रतिशत बारिश का अनुमान लगाया है। पूर्वाेत्तर में 92 प्रतिशत, दक्षिण में 95 फीसदी और पश्चिमोत्तर 96 प्रतिशत हो सकती है। स्काईमेट के अनुसार अच्छी बात यह है कि सितंबर में बारिश बढ़ेगी और सूखे के आसार नहीं है। इस बार अलनीनो के कारण उत्तर-मध्य भारत में कम बारिश और दक्षिण में सामान्य बारिश की बात कही है। यहां यह बता दें कि अलनीनो के कारण समुद्री हवाओं का रुख बदल जाता है और बारिश वाले क्षेत्रो में बारिश नहीं होती, इसके उलट जिन इलाकों में बारिश नहीं होती है, वहां मूसलाधार बारिश होती है। मानसून की बारिश का पूर्वानुमान जारी किया जा रहा है, प्रदेश में सक्रिय चक्रवात के कारण पिछले दो-तीन दिन से मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है।

  प्रदेश के कई हिस्सों में काली-पीली आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि के कारण मौसम एकदम पटल गया है। गरमी के तेवर नरम पड़ गए है। तापमान में गिरावट आई है और मौसम सुहाना हो गया। बादलों की लुका-छिपी चली रही है, वहीं बीच-बीच में गर्मी के तीखे तेवर भी नजर आ रहे हैं। प्रदेश में अंधड के कारण कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिरे हैं। कोटा रेल मंडल के लाखेरी व इन्द्रगढ़, सुमेरगंज मंडी रेलवे स्टेशनों के बीच मंगलवार बिजली के तार टूट गए। इस कारण दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग तीन घंटे ठप रहा। वहीं जोधपुर के बाप इलाके में एक घंटे तक तेज अंधड़ से नमक उत्पादन क्षेत्र रिण में 120 से ज्यादा खंभे गिर गए। कई गांवो में लाइन फाल्ट होने से बिजली गुल रही। बुधवार को भी जयपुर में शाम को भी गरजन के साथ छीटें पड़े। अभी दो-तीन दिन मौसम का मिजाज इसी प्रकार रहेगा। 

एक ओर जहां देश के कई भागों में आंधी, तूफान, वर्षा और ओलों के कारण मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है वहीं देश के बड़े हिस्से में भारी गर्मी पड़ रही है। कई शहरों का तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा जा रहा है। बढ़ते तापमान जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है। वैसे स्कूलों में गर्मियों की छुट्टी हो गई है। ऐसे में बच्चे दिन भर घरों दुबके पड़े रहते हैं, शाम को आसपास के पब्लिक पार्कों में जमा होकर धमा-चौकड़ी करते हैं। अब हर साल इस मौसम में यही अहसास होता है कि इस बार गर्मी पिछले साल से ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि गर्मी साल दर साल बढ़ रही है और मानसून कमजोर होता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 1901 के बाद साल 2018 में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी थी, लेकिन अभी से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल औसत तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। पिछले महीने मौसम की जानकारी देने वाले वेबसाइट एल डोरैडो ने दुनिया के सबसे गर्म 15 इलाकों की सूची जारी की।

 ये सारी जगहें मध्य भारत और उसके आसपास की है। सूची में जो 15 नाम शामिल है, उसमें 9 महाराष्ट्र, 3 मध्यप्रदेश, 2 उत्तर प्रदेश और एक तेलंगाना का है। यह सामान्य राय है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ऐसा हो रहा है। लेकिन कई विशेषज्ञ मानते है कि शहरों में बढ़ते निर्माण कार्यों और उसके बदलते स्वरूप के चलते हवा की गति में कमी आई है। एक राय यह भी है कि तारकोल की सडक़ और कंक्रीट की इमारत उष्मा को अपने अंदर सोखती है और उसे दोपहर और रात में छोड़ती है। बढ़ती गर्मी से सीधा जुड़ा हुआ है जल संकट। महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में अभी से सूखे जैसे हालात हो गए हैं, जबकि पिछले वर्ष इन राज्यों में अच्छी खासी बरसात हुई थी। वर्ष 2018 में मानसून की स्थिति बेहतर रहने के बावजूद बड़े बांधों में पिछले वर्ष से 10-15 फीसदी कम पानी है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा बीते सप्ताह शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार देश के 91 जलाशयों  में उनकी क्षमता का 25 फीसदी औसत पानी ही उपलब्ध है।

 दरअसल मार्च से मई तक होने वाली प्री मानसून वर्षा में औसत 21 फीसदी की कमी आई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में प्री मानसून वर्षा में 37 फीसदी की कमी रही जबकि प्रायद्वीपीय भारत में 39 प्रतिशत की कमी। हालांकि फोनी तूफान की वजह से हुई वर्षा ने मध्य भारत, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में इस कमी की भरपाई कर दी। लेकिन अलनीनो की वापसी के अंदेशे से इस बार मानसून के कमजोर होने की आशंका मंडरा रही है। मौसम का अनुमान करने वाली निजी संस्था स्काईमेट वेदर ने कहा कि अप्रैल में वह कमजोर होता नजर आया था, पर इसमें फिर मजबूती के लक्षण दिख रहे हैं। जो भी हो प्रशासन को सतर्क हो जाना चाहिए। जून में खरीफ की बुवाई शुरू हो जाएगी। देखना होगा कि किसानों को कोई दिक्कत नहीं हो। इसी तरह गर्मी से जान माल की क्षति रोकने के लिए तमाम जरूरी उपाय करने होंगे।

loading...


 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
loading...


Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.