आपने अभी तक क्या सीखा है?

Samachar Jagat | Thursday, 18 Apr 2019 05:05:29 PM
What have you learned so far?

यह दिखने में एक छोटा सा प्रश्न लग रहा है, लेकिन यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर बिरलों के ही पास है, बहुत कम लोग इसका उत्तर दे पाते हैं अर्थात् व्यक्ति के जीवन पर प्रश्न चिन्ह है। व्यक्ति तो यह मानकर चलता है कि उसने तो बहुत कुछ सीख लिया है और मेरे ज्ञान की तुलना में दूसरे तो एकदम नगण्य हैं। व्यक्ति धरती से तीन कदम ऊपर चलता हुआ, ज्ञान से भरा हुआ दूसरों को अज्ञानी साबित करता रहता है।

वह कुछ भी लेने के लिए तैयार नहीं और उसका एक ही जवाब होता है कि मैं तो सब कुछ जानता हूं। यह सब कुछ जानने की बात ही नहीं जानने वाली बात है। वह अपने सिवाय किसी को कुछ समझता ही नहीं, बस यही सबसे बड़ी त्रासदी है। जब किसी से पूछा जाता है कि क्या तुझे बात करना आता है अर्थात् क्या बातें करना सीख लिया है तो वह ठीक से जवाब नहीं दे पाएगा और वैसे एक मिनट भी चुप नहीं रह पाएगा। अर्थात् व्यक्ति बोलना तक नहीं जानता है, बातें करना तो बड़े दूर की बात है और सार्थक बातें करना, किसी टॉपिक पर बातें करना तो बेहद मुश्किल काम है। किसी मंच पर, लोगों के सामने और अन्य किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलना, भाषण देना, उत्तरों के जवाब देना तो और भी मुश्किल हो जाता है।

जब किसी से पढ़ाई के बारे में पूछा जाता है तो भी लोग बगलें झांकने लगते हैं, किताबी ज्ञान की बातें करने लग जाते हैं, भाषाओं की बातें करने लग जाते हैं, गाता और एक्सपर्ट होने की बातें करने लगते हैं लेकिन उस ज्ञान को, उन बातों को अपने व्यावहारिक जीवन में लागू करने की बात बहुत कम दिखाई देती है। जब परिवार में रहने-खाने-कुछ करने की बातें आती हैं तो भी लोग कुछ भी स्पष्ट नहीं बता पाते हैं, रह रहे हैं एक साथ लेकिन करते नहीं है कुछ मिनट भी बात।

कैसे रहें, इस पर कोई जवाब नहीं आता है, कैसे आगे बढ़ें, क्या सेवन करें, क्या अपनाएं, क्या निर्णय करें, कैसी कमाई करें, कैसा व्यवहार करें, कैसे जीवन को आगे बढ़ाए? ये सब ऐसे प्रश्न हैं जिनका एक ही जवाब आता है कि मैंने तो अभी तक कुछ सीखा ही नहीं है। जीवन के हजारों आयाम हैं, हजारों काम हैं लेकिन मैं उनको सम्पन्न करना कैसे किया जाता है अभी तक नहीं सीखा है।

बस  केवल देखादेखी हो रही है, नकल की जा रही है, अंधी होड़ की जा रही है, सच में सीखा नहीं जा रहा है और यही कारण है कि व्यक्ति कहता है कि मुझे बोलना आता है, लेकिन बातें करनी नहीं आती हैं, काम करना तो आता है लेकिन दूसरों के लिए नहीं, खा तो रहा हूं लेकिन क्या खाऊं कुछ अभी तक सीखा नहीं है। सीखने का सीधा सा तात्पर्य है करने का और करने का सीधा सा तात्पर्य है सार्थक करने का और सार्थक करने का अर्थ है सार्थक जीवन बनाने का और सार्थक जीवन अच्छा सीखने और अच्छा करने से बनता है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
सीखने का अर्थ ग्रहण करने से है और ग्रहण करने का अर्थ है सबके लिए उपयोगी और जो सबके लिए उपयोगी करता है, उसे कर्मयोगी कहते हैं।



 

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