ये कैसी नारी सुरक्षा?

Samachar Jagat | Friday, 10 Aug 2018 12:24:05 PM
What kind of women security?

भारत में मजबूत लोकतंत्र है। कार्यपालिका, न्यायपालिका, व्यवस्थापिका  व  मीडिया लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ हैं। मगर पिछले कुछ वर्षों में नारी उत्पीडऩ, शोषण व अन्याय का शिकार हो रही हैं। दुष्कर्म व बलात्कार की घटनाओं में इजाफा हो रहा है, छोटी बच्चियों से दुष्कर्म करने की अपराधी हिम्मत जुटा रहे हैं। कानून व्यवस्था संभालने वालों, पुलिस व कानून का डर, भय, दहशत अपराध करने वालों  में नहीं रहा है। ये क्या अराजकता की स्थिति का सबूत नहीं बना है। सांसद हों या विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री या  प्रधानमंत्री या फिर कोई भी राजनैतिक दल महिला सुरक्षा के प्रति गंभीरता  दिखाता नजर  नहीं आता और सब अपने स्वार्थों को वरीयता देते नजर आते हैं।

लोकतंत्र का गला  घोंटने के उदाहरण पेश होना देश को लोगों को  घातक बना है। अपराधियों में किसी भय नहीं रहा। जनप्रतिनिधियों  को   अपने स्वार्थ के आगे सब गौण नजर आता है।

देवरिया और मुजफ्फरपुर जैसी यौन शोषण की घटनाएं देश की साख को बट्टा ही नहीं लगा रही, बल्कि सरकारों (केंद्र व राज्य सरकारों) की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह भी लगा रही हैं। 

पुलिस  के आला अहलकार हों या  कलेक्टर, एस पी या डीजी पुलिस या  फिर चीफ सेक्रेटरी कोई अपने ट्रांसफर, पोस्टिंग, पदोन्नति  की वजह से मंत्रियों, मुख्यमंत्री या जन प्रतिनिधियों के दबाव में काम करने से अछूता न बच पा रहा। फिर कैसे  सुशासन की कल्पना संभव है और कैसे अपराधियों पर शिकंजा कसा 

जाना संभव है?
देवरिया में दभरदगी की घटना पर मेनका गांधी का यह कहना कि दो साल  में किसी सांसद ने निरीक्षण नहीं किया। क्या दर्शाता है?
क्या आपका मंत्री रहते ऐसी निराशा जायज है?
क्या आप नारी सुरक्षा के मसले पर देश के सभी मुख्यमंत्रियों से स्वयं वार्ता कर ऐसे दभरदगी के हादसों को उजागर कर दोषियों को जेल के सींखचों  में   पहुंचाने 

में सक्षम नहीं थीं?
उत्तरप्रदेश व बिहार  के मुख्यमंत्री क्यों नींद में रहे?
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मुजफ्फरपुर व उत्तरप्रदेश के देवरिया में बालिका गृह कांड पर सात अगस्त 2018 को तल्ख  टिप्पणी करते हुए सही कहा है कि लेफ्ट, राइट, सेंटर हर तरफ बलात्कार। कोर्ट ने बिहार सरकार को जमकर फटकार लगाई, जो सही ही थी। वहीं इस दौरान ये भी कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी 

जांच में देरी क्यों?
राजस्थान में छोटी बच्चियों के साथ बढ़ती दुष्कर्म की घटनाएं भचतित  करती हैं। रविवार रात खेत में शौच गई छात्रा के साथ गांव के ही  लोगों ने मुँह दबाकर बलात्कार की कोशिश की। नाबालिग छात्रा इज्$जत बचाने कुएँ में कूद गई। खेतड़ी नगर के जसरापुर  की यह घटना क्या दर्शाती है?
सरकार, प्रशासन, पुलिस, जनप्रतिनिधियों का कुंभकर्णी नींद में सोना क्या सबूत पेश करता है?
राहुल गांधी का यह कहना सही नहीं कि प्रधानमंत्री हर बात पर बोलते हैं, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अत्याचार पर नहीं बोलते। आज तक  यूपी-बिहार में हुए 

बलात्कार पर एक शब्द नहीं बोला ?
राहुल गांधी का यह कहना बिल्कुल सही है।
प्रधानमंत्री क्यों मौन  हैं?
क्या बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का उनका नारा सार्थकता लिए है?
देश  के सभी हिस्सों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए सरकार कठोर कदम उठाए, निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करे, जिला कलेक्टर, जिला एस पी सहित सभी को जिम्मेदारी दे कि अपने इलाकों में ऐसी घटनाओं को न होने दें। सांसदों  की कमेटी बनाई जावे। जो देश के सभी हिस्सों में जाकर  आश्रय गृहों का निरीक्षण करें।

ये कैसी नारी सुरक्षा?
जहाँ मुजफ्फरपुर व देवरिया जैसी घटनाएं देश की छबि पर कालिख  पोतने का दायित्व निभा रही हैं, वहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही ठेंगा दिखा रही हैं और सरकारों के मुखिया कुम्भकर्णी नींद में लग रहे हैं?

आज महिला आरक्षण की नहीं महिला संरक्षण की जरूरत है। पहली प्राथमिकता महिलाओं के संरक्षण को मिले।
(ये लेखक के निजी विचार है)



 

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