जीवन को कर्म संचालित करते हैं

Samachar Jagat | Tuesday, 31 Jul 2018 09:09:52 AM
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चीन काल में गौतमी नाम की एक धर्म परायण महिला अपने इकलौते पुत्र के साथ रह रही थी। एक दिन उसके पुत्र को एक सर्प ने डस लिया और उसकी मृत्यु हो गई। यह देख गौतमी जोर-जोर से विलाप करने लगी। इस घटना को एक व्याध देख रहा था। उसे उस महिला पर बड़ा तरस आया। उसने आनन-फानन में उस सर्प को पकड़ लिया और उस महिला के पास ले आया और कहा कि ‘माताजी! मैं इसे अभी मार देता हूं क्योंकि इसने आपके इकलौते बेटे की जान ले ली है।’

 गौतमी ने बड़ी ही उदारता के साथ कहा कि हे अर्जुनक! इस सर्प को मारने से मेरे बेटे के प्राण वापस नहीं आ सकते हैं। इस पर व्याध ने कहा कि हे माताश्री! वृद्ध लोगों का स्वभाव दया से परिपूर्ण होता है, यह सर्प बहुत दुष्ट है, मुझे इसे तुरंत मारने की इजाजत दें, यह मारने के ही योग्य है। लेकिन गौतमी ने व्याध को सर्प को मारने की इजाजत नहीं दी। उसी समय सर्प मानवी भाषा में बोलने लगा कि- हे व्याध! तुम मुझे मारने की जिद क्यों कर रहे हैं, इसमें मेरा कोई अपराध नहीं है। मैंने तो मृत्यु की प्रेरणा से ही इसे डसा है।

सर्प के इस तरह मानवी भाषा बोलने पर और स्वयं को निरपराध कहने पर व्याध बहुत क्रोधित हो गए और सर्प से कहा- हे दुष्ट! मैं तुम्हें अभी मौत के घाट उतार देता हूं, क्योंकि तू अपने अपराध को भी नहीं स्वीकार कर रहा है। लेकिन सर्प गिड़गिड़ाने लगा कि मैं तो निमित मात्र हूं, इसमें सारी भूमिका मृत्युदेव की है। तभी वहां पर मृत्यु देव प्रकट हो गए और कहने लगे कि इसमें न तो इस सर्प का दोष है और न ही मेरा दोष है, इसमें तो काल देवता की इच्छा है मैं तो उनके ही अधीन हूं। 

ऐसा सुनते ही वहां पर काल देवता प्रकट हो गए और कहने लगे हे व्याध भाई! इसमें न तो सर्प का दोष है, न मृत्युदेव का दोष है और न ही मेरा कोई दोष है, जीवन तो अपने कर्मो के वश में होता है। अपने कर्मो के अनुसार ही उसकी मृत्यु होती है। क्योंकि कर्म जीवन के आधार होते हैं और सार होते हैं। व्यक्ति जैसा कर्म करता है उसको वैसा ही फल मिलता है, सुख-दुख प्राप्त होते हैं।

काल देवता ने यह भी कहा कि हम लोग तो उसके कर्म का फल मिले, ऐसा विधान करते हैं। इस महिला का पुत्र भी अपने पूर्व जन्म के कर्म दोष के कारण अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ है, इसमें किसी का कोई दोष नहीं है। आइए, हम अपने नेक पथ पर चलें, सद्कर्म करें जीवन को सार्थक बनाएं यदि पहले कोई भूल भी हो गई है तो उसे अपने सद्कर्मो से दूर करें। याद रखें सद्कर्म आपको जन्म-जन्मान्तर तक खुशियां देते रहेंगे।

प्रेरणा बिन्दु:- 
सद्कर्म ऐसी नींव जिस पर
महल जीवन होता खड़ा
सद्कर्म कर सद्कर्म कर
सद्कर्म से होता बड़ा।



 

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