अमेरिका-ईरान टकराव से मुश्किल में दुनिया

Samachar Jagat | Saturday, 18 May 2019 02:40:55 PM
World in trouble with US-Iran conflict

अमेरिका और ईरान में बढ़े तनाव के बीच सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला हुआ है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की जल सीमा में चार तेल टैंकरों पर हुए हमले के बाद खाड़ी देशों में तनाव बढ़ गया है और तेल मूल्य बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। सऊदी अरब ने बीते सोमवार को कहा कि उसके दो टैंकरों को निशाना बनाया गया है। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद-अल-फालिह ने कहा कि दो टैंकरों को काफी नुकसान हुआ है लेकिन किसी व्यक्ति को चोट नहीं पहुंची है और नहीं समुद्र में तेल फैला है।

यूएई में कहा था कि कई देशों के चार वाणिज्यिक जहाजों को फुजैरा शहर के पास निशाना बनाया गया। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने अपनी मास्को की प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है औ ईरान के बारे में यूरोपीय अधिकारियों से चर्चा के लिए बु्रसेल्स रवाना हो गए। ब्रिटेन ने अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने की चेतावनी देते हुए कहा कि इससे खाड़ी क्षेत्र में हालात बिगड़ सकते हैं। समुद्री तेल टैंकरों पर हमले को लेकर अमेरिका ने इसके लिए ईरान और उसके सहयोगी देशों-संगठनों को जिम्मेदार बताते हुए कहा है कि वे प्रॉक्सी वॉर के तहत ऐसा कर रहे हैं। जबकि ईरान ने समुद्र में पोतों पर हमले को चिंताजनक बताते हुए जांच की मांग की है। यहां यह बता दें कि फुजैरा पोर्ट यूएई का अकेला ऐसा टर्मिनल है जो अरब सागर के तट पर स्थित है और इस रास्ते से ज्यादातर तेल निर्यात होता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि फुजैरा बंदरगाह होर्मुज जलमार्ग से तकरीबन 140 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। जहां से विश्व के एक तिहाई तेल और गैस का निर्यात होता है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ हुआ बहुपक्षीय व्यापार समझौता एकतरफा तौर पर खारिज कर दिए जाने और ईरान के तेल पर प्रतिबंध लगा देने के बाद से ही ईरान यह कहता रहा है कि अमेरिका ने उस पर ज्यादा दबाव बढ़ाया था। वह होर्मुज जल मार्ग बंद कर देगा। इस आशंका के तहत ही अमेरिका ने पिछले दिनों इस क्षेत्र में अब्रहम लिंकन युद्धपोत और बी-2 बर्मवर्षक विमान तैनात कर दिए हैं। ईरान के प्रमुख सैनिक संगठन इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स कोर को अमेरिका आतंकी संगठन करार दे चुका है। जवाब में ईरान ने अमेरिका सेना को मध्य पूर्व में स्थित आतंकी बताकर उसके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। अभी ईरान तेल उत्पादन में शीर्ष पर है।

उसके तेल निर्यात पर पूरी रोक के लिए अमेरिका बाकी देशों से मिलकर दबाव बनाना चाहता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के दोबारा लागू होने के बाद ईरानी अर्थव्यवस्था संकटग्रस्ट हो चली है। बीते सप्ताह ईरान ने धमकी दी कि अगर वैश्विक समुदाय अगले 60 दिनों में नए समझौते की बातचीत में विफल रहता है तो वह दोबारा अपनी एटमी गतिविधियां पूरे दम से शुरू कर देगा। सऊदी टैंकरों पर हमले को अमेरिका इसी संदर्भ में देख रहा है, हालांकि इसमें ईरान की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं मिला है। एक तबका इसमें अमेरिकी षडयंत्र भी देख रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव अगले साल 2020 में है।

1980 के दशक के इराक-ईरान युद्ध 2003 के अमेरिका-इराक युद्ध को देखें तो अमेरिका और ईरान का टकराव कहीं अधिक विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। इसका असर बाकी दुनिया पर भी पड़ेगा। भारत के लिए यह खास चिंता का विषय एक तो तेल के संकट को लेकर है। लेकिन इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि यूएई और अन्य खाड़ी मुल्कों में दसियों लाख भारतीय रहते हैं। वहां बनने वाली युद्ध जैसी स्थितियां उनके जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकती है। इसके लिए विश्व बिरादरी को प्रयास करना होगा कि अमेरिका-ईरान तनाव का पारा अब और न चढ़ने पाए।



 

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