मलेरिया पर काबू पाने के लिए दुनिया का पहला टीका तैयार

Samachar Jagat | Tuesday, 30 Apr 2019 03:56:50 PM
World's first vaccine ready to overcome malaria

मलेरिया वैश्विक रूप से जानलेवा बीमारी साबित हो रही है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इसके प्रकोप से बचने के प्रभावी तरीके खोजने में जुटे हैं। इस कड़ी में मलेरिया का एक टीका तैयार किया गया है। यह दुनिया का पहला मलेरिया टीका है। अफ्रीकी देशों में बच्चों को यह टीका लगाया जाएगा। मलावी से इसकी शुरूआत हो चुकी है। इसके बाद केन्या और घाना में भी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होगा। इन तीनों देशों के करीब 3 लाख 60 हजार बच्चों को यह टीका लगाया जाएगा, जो कि अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है। दरअसल यह वैक्सीन बच्चों में मलेरिया को रोकने के लिए बनाई गई है। शुरूआती परीक्षण के लिए ये तीन अफ्रीकी देश चुने गए है क्योंकि मजबूत बचाव और टीकाकरण कार्यक्रम के बावजूद मलेरिया के यहां सबसे ज्यादा प्रकोप अफ्रीकी देशों में है।

Rawat Public School

इस टीके के जरिए इस बीमारी से बचाव संभव होगा। मलेरिया से निपटने के लिए तैयार किए गए इस टीके का नाम आरटीएस, एस/एएस 01 है। इसका ट्रेड नाम मॉसक्यूरिक्स है। इस टीके को इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है। टीकाकरण का यह कार्यक्रम 2 साल से कम के बच्चों के लिए होगा। इससे बच्चों को मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से आंशिक फायदा होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वर्ष 2009-2014 तक इस टीके का परीक्षण किया गया था। परीक्षण के परिणामों के अनुसार 10 में से चार मामलों में यह टीका बचाव करने में असरदार है। इतने वर्षों में चेचक, टीबी, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, यलोफीवर, खसरा जैसी बीमारियों के वैक्सीन या टीके ईजाद हो गए थे, लेकिन मलेरिया का टीका अब तक नहीं खोजा जा सका था। पहली मलेरिया वैक्सीन लांच हो जाना चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि है। इससे विश्व में लाखों लोगों की जान बचाई जा सकेगी। विश्व के विभिन्न भागों में बहुत बड़ी तादाद में मलेरिया से लोगों की मौत होती रहती है। दुनिया के दलदली या पानी भरे इलाकों में एनोफिलीज मच्छर के काटने से मलेरिया होता है। 

भारत में बंगाल व छत्तीसगढ़ में पानी से भरे पोखर या डबरों की वजह से मच्छर बड़ी तादाद में पनपते है। इस कारण वहां मलेरिया की समस्या कुछ ज्यादा ही है। मच्छरदानी के बगैर लोग सो ही नहीं सकते। टंकी, कूलर या गमलों में जमा पानी तथा गंदगी ढेर में भी मादा मच्छर अंडे देती है। मलेरिया गरीब अमीर किसी को भी हो सकता है। आदित्य बिड़ला जैसे बहुत बड़े उद्योगपति का सिर्फ 52 वर्ष उम्र में मलेरिया से निधन हुआ था। अमेरिका के विशेषज्ञ डाक्टर भी इनकी बीमारी का पता नहीं लगा पाए थे और बचा पाने में असमर्थ रहे थे। सेरेव्रल मलेरिया का रोगी बच ही नहीं पाता। यूं तो कुनैन से मलेरिया का इलाज होता है। परंतु मलेरिया का वैक्सिन नहीं था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस वैक्सिन को बनाने में 30 वर्ष लगे। यह टीका वरदान साबित होगा। 
 



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.