तुम सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा में अव्वल रहे हो

Samachar Jagat | Monday, 07 Jan 2019 02:45:59 PM
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बात कोलकाता की है। किसी विद्यालय में दो विऋार्थियों में आपस में गहरी मित्रता थी। वे एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करते थे और आपस में एक दूसरे की सहायता भी बहुत करते थे। क्योंकि वे एक ही कक्षा में पढ़ते थे, और यह भी उनके साथ एक अजीब बात थी कि एक हमेशा कक्षा मेंप्रथम स्थान पर आता था और दूसरा हमेशा दूसरे स्थान पर रहता था। लेकिन जो विद्यार्थी हमेशा पहले स्थान पर रहता था, उसकी मां बीमार पड़ गई और इस कारण वह दो महीने तक स्कूिल में नहीं आ पायाऔर उसके साथ बहुत बुरी बात हुई कि आखिर में उसकी मां का स्वर्गवास भी हो गया। जब वह विद्यार्थी स्ज्ञकूल में आया तो सिलेबस काफी पढ़ाया जा चुका था। इस कारण वह उसे समझ और पढ़ नहीं सका था, और इसी कारण सभी विद्यार्थी और शिक्षक सोच रहे थे कि अबकी बार यह कक्षा में प्रथम स्थान नहीं ला पायेगा और दूसरे स्थान पर रहा।


लेकिन जब परीक्षाफल निकला तो सभी आश्चर्य में पड़ गये, पढ़ाई में लम्बे व्यवधान और मां के गम के बावजूद वह अबकी बार भी प्रथम स्थान पर रहा था। शिक्षकों को इस पर विश्वास नहीं हुआ और दोनों विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को पुन: देखा तो निष्कर्ष निकल कर आया कि दूसरे स्थान पर रहने वाले विद्यार्थी ने प्रत्येक प्रश्र केउत्तर को थोड़ा अधूरा छोड़ रखा था। ऐसा उस विद्यार्थी ने क्यों किया इसका कारण जानने के लिए मुख्याध्यापक ने उसे अपने कक्ष में बुलाया और प्रश्रों के जवाब अधूरे छोड़ने का कारण पूछा तो उसे उत्तर दिया श्रीमानजी, मेरा मित्र मुझसे बहुत होशियार होनेके कारण प्रथम स्थान पाने का अधिकारी है। चूंकि अबकी बार उसकी मां की बीमारी और मृत्यु के कारण नकेवल उसकी पढ़ाई बाधित हुई, बल्कि मां के चले जाना का भी बड़ा गम हैं। 

इसलिए मैं उसे द्वितीय स्थान पर रहने की और पीड़ा कैसे दे सकता था। मेरे सिर पर अीाी मां का साया है अभी विद्यमान हैं। और मेरा आपसे यह निवेदन है कि आप इस बात को किसी को भी न बताएं अपने तक ही सीमित रखे। मुख्याध्यापक बालक का उत्तर सुनकर उसकी उदारता और सच्ची मित्रता से बहुत प्रभावित हुआ और उससे कहा तुम सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा में अव्वल रहे हो और यह भी तय है कि तुमत ऐसे विचारों के साथ अपनी जिंदगी में भी अव्वल रहोगे। आइए, हम भी अपने अन्तर्मन में झांके और उसकी माने। क्योंकि यह जीवन अनमोल है, एक बार है अनिश्चित है और क्षण भंगुर हैं।
प्रेरणा बिन्दु:- 
जीना तो वहीं सार्थक कहलाता है जब एक दूसरे के लिए जीया जाये एक दूसरे के लिए सहयोग किया जाये।

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