अलविदा 2018: मध्यप्रदेश की राजनीति के ये रहे दो खास चेहरे, जो रहे सबसे चर्चित 

Samachar Jagat | Sunday, 23 Dec 2018 12:42:08 PM
Bye 2018: Two special faces of politics of Madhya Pradesh

भोपाल। साल 2018 मध्यप्रदेश में कई चेहरों के नाम रहा। चुनावी वर्ष होने के चलते प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगभग पूरे वर्ष सुर्खियों में बने रहे। हालांकि इनके अतिरिक्त भी कई चेहरे ऐसे रहे, जो पूरे साल किसी न किसी वजह से चलते खबरों में बने रहे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ इस वर्ष पूरे साल चर्चाओं का केंद्र बिंदु बने रहे।

अप्रैल में पार्टी आलाकमान ने उन्हें नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी की प्रदेश इकाई की कमान सौंप दी। विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी से कांटे की टक्कर के बाद कांग्रेस ने जीत हासिल की, जिसके बाद कमलनाथ की प्रदेश के मुखिया के तौर पर ताजपोशी हुई।

मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के कुछ ही घंटों के भीतर कमलनाथ ने कांग्रेस के चुनाव के पहले लाए वचन पत्र के मुताबिक किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर हस्ताक्षर कर इस पर अमल शुरु कर दिया। तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनने के बीच कमलनाथ के इस पर अमल करने वाले पहले मुख्यमंत्री बनने ने भी देश भर में सुर्खियां बटोरीं।

पिछले 13 वर्ष से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई करते हुए मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने इस वर्ष भले ही कुर्सी गंवा दी हो, लेकिन इसके बाद भी वे लगातार सुर्खियों में बने रहे। चौहान ने विधानसभा चुनाव के अभियान का आगाज जन आशीर्वाद यात्रा से करते हुए सभी 52 जिलों की यात्रा की।

वे समूचे चुनाव में बीजेपी का मुख्य चेहरा रहे। हालांकि भाजपा की सत्ता में वापसी नहीं होने के बाद भी चौहान सभी की नजरों में बने रहे। मुख्यमंत्री पद से हटते ही चौहान ने स्वयं को कॉमनमैन ऑफ मध्यप्रदेश के तौर पर प्रदर्शित करते हुए लगातार इस बारे में ट्वीट किए।

उन्होंने भोपाल से बीना तक की यात्रा ट्रेन से करने और मुख्यमंत्री निवास छोड़ कर अपेक्षाकृत छोटे आवास में जाने की भी जानकारियां सार्वजनिक करते हुए कहा कि उन्हें जनता का भरपूर प्यार मिल रहा है और उनके घर के दरवाजे जनता के लिए हमेशा खुले हुए हैं।

कांग्रेस के ही सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने भी इस वर्ष खूब सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत तक फूलों की माला नहीं पहनने का प्रण लिया, जिसके बाद वे पूरे प्रचार के दौरान बतौर पार्टी चुनाव अभियान समिति प्रमुख कभी नींबू-मिर्च की माला पहने दिखे तो कभी सूत के धागे की।

पार्टी की जीत के बाद सिंधिया का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर भी सामने आया। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर इस साल समय-समय पर अपने तेवरों के चलते खबरों में बने रहे। गौर ने खुद को या अपनी बहू कृष्णा गौर को किसी भी सीट से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय मैदान में उतरने की घोषणा कर भी अपने तेवर दिखा दिए।

पूरे साल वे विधानसभा के भीतर और बाहर भी अपने ही दल की सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरते रहे। पूर्व मंत्री सरताज सिंह भी विभिन्न कारणों से चर्चाओं में रहे। ऐन चुनाव के पहले उन्होंने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर बीजेपी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया।

कांग्रेस ने उन्हें हाईप्रोफाइल सीट होशंगाबाद पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीतासरन शर्मा के सामने मैदान में उतारा, लेकिन सिंह होशंगाबाद सीट कांग्रेस के खाते में नहीं डाल सके। चुनाव के दौरान भी समय-समय पर दोनों चुनावी प्रतिद्बंद्बियों की कई तस्वीरें सामने आईं, जिनमें डॉ शर्मा अपने से वरिष्ठ सिंह के पैर छूते हुए दिखाई दिए।

कांग्रेस के जो चेहरे इस बार सर्वाधिक चर्चा में रहे, उनमें प्रमुख नाम पूर्व मुख्यंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का भी है। सिंह ने इस साल नर्मदा परिक्रमा की, जिसे उन्होंने विशुद्ध धार्मिक यात्रा बताया। हालांकि विधानसभा चुनाव के पहले अपने एक वायरल वीडियो के चलते वे विवादों में भी घिरे।

इस वीडियो में सिंह यह कहते हुए सुनाई दे रहे थे कि उनके भाषण देने से पार्टी के वोट कटते हैं। इस वीडियो के बाद सिंह पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ कई मंचों पर दिखाई दिए। चुनावी साल में मध्यप्रदेश के साधु-संत भी लगातार चर्चाओं में रहे।

इन्हीं में शामिल उज्जैन निवासी कंप्यूटर बाबा को शिवराज सिंह चौहान सरकार में नर्मदा संरक्षण की दिशा में काम करने के लिए राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया। हालांकि बाद में कंप्यूटर बाबा ये दर्जा छोड़कर खुल कर भाजपा सरकार के विरोध में आ गए। चुनाव के ऐन पहले कंप्यूटर बाबा ने संत समागम के माध्यम से सैकड़ों संतों के कांग्रेस के पक्ष में जाने की घोषणा कर डाली।

राजनीति के चर्चित चेहरों से इतर प्रदेश की दो बेटियों ने इस साल देश-दुनिया में राज्य का परचम फहराया। सीहोर की मेघा परमार ने जहां दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सीहोर की मिट्टी स्थापित की, वहीं शहडोल की पूजा वस्त्रकार दक्षिण अफ्रीका में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सुर्खियों में बनी रहीं।

सीहोर के छोटे से गांव भोजनगर की मेघा परमार (24) ने 23 मई को माउंट एवरेस्ट फतह किया। इस विजय के बाद सीहेार लौटीं मेघा का किसी योद्धा की तरह स्वागत किया गया। वहीं पूजा वस्त्रकार इस साल ऑलराउंडर के तौर पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम में चुनी गईं। बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली पूजा वस्त्रकार का टीम में प्रदर्शन काफी सराहा गया।



 

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