सीबीएसई फीस वृद्धि की भाकपा ने की आलोचना

Samachar Jagat | Tuesday, 13 Aug 2019 06:01:52 PM
CPI criticizes CBSE fee hike

नयी दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की दलित छात्रों के लिए तीन गुना फीस वृद्धि की तीखी आलोचना की है और इसे उनके साथ  भेदभाव बताया है।

पार्टी के राज्यसभा सांसद विनय विस्वम ने मंगलवार को यहाँ एक बयान में कहा कि सीबीएसई के सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए फीस दो गुना तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के वर्ग के छात्रों के लिए तीन गुना बढ़ा दिया। इससे सरकार के भेदभाव पूर्ण रवैये का पता चलता है।

श्री विस्वम ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्बारा संचालित सरकार इस वर्ग के छात्रों को आज भी एकलव्य की तरह देखती है और उसे उच्च शिक्षा से वंचित रखना चाहती है ताकि गरीब और वंचित छात्र उच्च शिक्षा का अध्ययन न कर सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा तो लगाती है लेकिन उन्हें वंचित रखती है। माकपा नेता ने कहा कि नई शिक्षा नीति के प्रारूप के मद्देनज़र सरकार का यह कदम शिक्षा को लेकर उसके रवैये का सूचक हैं।

इस बीच सीबीएसई ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि यह वृद्धि पांच साल में पहली बार की गयी है और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए की गयी है लेकिन यह अभी भी अन्य राज्यों के बोर्डों की फीस से कम है। उसने यह भी कहा कि कई राज्य इसके लिए सब्सिडी भी दे रहे हैं।

नयी दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की दलित छात्रों के लिए तीन गुना फीस वृद्धि की तीखी आलोचना की है और इसे उनके साथ  भेदभाव बताया है।

पार्टी के राज्यसभा सांसद विनय विस्वम ने मंगलवार को यहाँ एक बयान में कहा कि सीबीएसई के सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए फीस दो गुना तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के वर्ग के छात्रों के लिए तीन गुना बढ़ा दिया। इससे सरकार के भेदभाव पूर्ण रवैये का पता चलता है।

श्री विस्वम ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्बारा संचालित सरकार इस वर्ग के छात्रों को आज भी एकलव्य की तरह देखती है और उसे उच्च शिक्षा से वंचित रखना चाहती है ताकि गरीब और वंचित छात्र उच्च शिक्षा का अध्ययन न कर सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा तो लगाती है लेकिन उन्हें वंचित रखती है। माकपा नेता ने कहा कि नई शिक्षा नीति के प्रारूप के मद्देनज़र सरकार का यह कदम शिक्षा को लेकर उसके रवैये का सूचक हैं।

इस बीच सीबीएसई ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि यह वृद्धि पांच साल में पहली बार की गयी है और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए की गयी है लेकिन यह अभी भी अन्य राज्यों के बोर्डों की फीस से कम है। उसने यह भी कहा कि कई राज्य इसके लिए सब्सिडी भी दे रहे हैं।-(एजेंसी)



 

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