आदिवासी परिवारों पर साहूकारी कर्ज मुक्ति का आयेगा अध्यादेश: कमलनाथ

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Aug 2019 02:09:11 PM
Ordinance will come to free the money lending on tribal families: Kamal Nath

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी परिवारों को गैर लाइसेंसी साहूकारों के कर्ज से मुक्ति देने के लिये अध्यादेश लायेगी।

आधिकारिक जानकारी में कमलनाथ ने इस संबंध में यहां जनाधिकार कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अध्यादेश के मुख्य प्रावधानों की जानकारी कलेक्टरों को दी। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान सिर्फ बड़े जिलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे सभी जिलों में सघनता से चलायें। जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधारों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। 

नई कार्य-संस्कृति विकसित करनी होगी। लापरवाही और ढिलाई प्रदेश के हित में नहीं है। इसलिये सोच बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि‘आपकी सरकार-आपके द्वार’कार्यक्रम में जनता से जिलों के प्रशासन का फीडबैक मिलता रहता है। उन्होंने कहा कि जिलों में यह सुनिश्चित करें कि अधिकारी आम जनता के लिये उपलब्ध रहें।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और सभी जिला अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दी और कहा कि जिला स्तर पर निराकृत होने वाली शिकायतें हर हाल में जिला स्तर पर ही हल हो जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों का निराकरण संतोषजनक होना चाहिए। नकारात्मक निराकरण से समस्याएँ फिर से सामने आ जाती हैं। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार के प्रकरणों में एफ.आई.आर. दर्ज करने पर ध्यान दें। बाढ़ पीडि़तों को राशि का भुगतान जल्दी करें।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय परिवारों पर साहूकारी ऋण विमुक्ति अध्यादेश लाया जायेगा। इसके अनुसार 15 अगस्त 2019 तक जनजातीय बंधुओं पर साहूकारों के जितने कर्ज हैं सबसे उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। उनकी गिरवी रखी सम्पत्ति भी उन्हें वापस मिल जाएगी। ऐसे परिवारों पर जो बकाया कर्ज है उसकी जबरन वसूली करने पर सजा और जुर्माना होगा। तीन साल की सजा होगी और एक लाख रूपये तक का जुर्माना देना पड़ेगा।

उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिये गये हैं कि वे अपने जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों में ऐसे जनजातीय परिवारों और साहूकारों पर नजर रखें। कोई भी साहूकार जबर्दस्ती कर्ज वसूली न कर पाये। ऐसे गैर लाइसेंसी साहूकारों की जानकारी भी मंगाई जा रही है। इसके अलावा मध्यप्रदेश अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी विनियम 1972 में संशोधन का अध्यादेश भी राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिये भेजा जा रहा है। अनुसूचित क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने का अभियान चलाया जायेगा। जन-धन खातों में ओवरड्राफ्ट की सुविधा का लाभ उठाने के लिये प्रेरित किया जायेगा। आदिवासी परिवारों को रुपे कार्ड जारी किये जायेंगे। यदि पहले से उनके पास हैं और क्रियाशील नहीं हैं तो उन्हें क्रियाशील बनाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कटनी के राजेश भास्कर, जबलपुर के जितेन्द्र सिसोदिया, भोपाल की पूजा सिलावट, रतलाम के शादाब खान, नरसिंहपुर के ब्रजेश पटेल, छिन्दवाड़ा के सौरभ कन्हारिया, उज्जैन के राम कुमार, भिंड के वैष्णव बघेल, होशंगाबाद के अमर सिंह सराठे, दतिया के राम कुमार और टीकमगढ़ के यज्ञ दत्त शर्मा के प्रकरणों का समाधान किया।

कटनी के राजेश भास्कर ने शिकायत की थी कि क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के मामले में 46 मजदूरों को मजदूरी के भुगतान में देरी हुई। इस मामले में रेंज आफिसर को निलंबित कर दिया गया और एसडीओ वन पर विभागीय जाँच के निर्देश दिए गए हैं। इसी प्रकार नरसिंहपुर के ब्रजेश पटेल सहित 297 किसानों को भारत सरकार की फसल प्रोत्साहन योजना में गेहूँ उत्पादन के लिये प्रोत्साहन राशि में विलम्ब हुआ था।

इस मामले में कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है। दतिया के रामकुमार के नामांतरण के प्रकरण में छह साल की देरी होने पर दो पटवारियों और नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है। व्ही.सी. में मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। -(एजेंसी)
 



 

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