संतान प्राप्ति सहित होगी हर इच्छा पूरी, केवल एक बार कर लें यह काम

Samachar Jagat | Tuesday, 03 Sep 2019 01:29:20 PM
Every wish will be fulfilled with the attainment of child, only do it once

इंटरनेट डेस्क  गणेश चतुर्थी के ठीक एक दिन बाद अर्थात 3 दिसंबर मंगलवार को ऋषि पंचमी का त्योहार बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। सभी विवाहित महिलाएं और कुंआरी कन्याएं  धान –धान्य, समृद्धि, संतान  प्रप्ति के लिए पूरी श्रद्धा व भक्ती  के साथ व्रत रखती है।   


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प्राचीन मान्यता के अनुसार, ऋषि पंचमी का पर्व देव भूमि भारत के सप्त ऋषियों के सम्मान में मनाया जाता है। सप्तऋषियों का पूजन और व्रत करने से जाने अंजाने में हुए पापों का नाश हो जाता हैं ।

 

 पूजन विधिः

इस दिन सुबह उठने के बाद स्नान आदि से निवृत हो कर घर के पूजा स्थान पर तांबे के कलश की   स्थापना करने के बाद मिट्टी से  सात ऋषियों  कश्यप ऋषि , भारद्वाज ऋषि, विश्वामित्र ऋषि, गौतम ऋषि , जमदग्नि ऋषि, वशिष्ठ ऋषि , अत्रि ऋषि  की छोटी छोटी मूर्ति बनाये और प्रत्येक कलश के साथ एक-एक मिट्टी की  मूर्ती स्थापित कर पुष्प, रोली, हल्दी, चावल, धूप, दीप नैवेद्य आदि से सभी का पूजन करने के बाद ऋषिपंचमी की कथा सुने या पढ़कर गाय के घी से यज्ञ करें । पूजन के बाद सभी सप्तऋषियों का गाय के दूध, दही, घी, शहद एवं शुद्ध जल से अभिषेक करें ।

 अभिषेक के बाद निम्न संकल्प का उच्चारण करते हुए घर के बर्तन  सहित अन्य चीजों को जाने अनजाने में स्पर्श कर लिए जाने के कारण दोष के निवारणार्थ ऋषिमाता अरुंधति सहित सप्त ऋषियों का पूजन करने का संकल्प लेती हूं ।

 इस दिन खेत में हल से जुते हुए अन्न का उपयोग करने की मनाही है एवं दिन में केवल एक समय ही भोजन करना चाहिए ।

 



 

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