आपके पूर्वज यदि आपसे प्रसन्न हैं तो हर कार्य में मिल सकती है तरक्की

Samachar Jagat | Wednesday, 04 Sep 2019 01:21:33 PM
If your ancestors are happy with you, you can get progress in every work

इंटरनेट डेस्क  पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष से मनाया जाता है।इस तिथि से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस दौरान पुर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रतट किया जाता है,जिसे हम श्राद्ध कहते है।हिंदू धर्म में पितृपक्ष को बहुत ही महत्व दिया गया है।


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पितृपक्ष में पितरों की मुक्ति और उन्हें  नये अवतार पाने के लिए विधि विधान से श्राद्ध कर्म किया जाता है। क्योंकि शास्त्रों में वर्णन है कि भगवान कि पूजा करने से  पहले पूर्वजों का पूजा किया जाता है।

 हमारे पूर्वज यदि हमसे प्रसन्न हैं तो हमें हर कार्य में तरक्की मिल सकती है। बड़े बुजुर्गों की भावनाओं और दुनिया से चले जाने के बाद उनका तौर तरीका व विधान से श्राद्ध किया जाता है।

 अन्य मान्यताओं के अनुसार यदि पितरों का तर्पण न किया जाए तो पितरों को मुक्ति नहीं मिलती और उनकी आत्मा यहीं मृत्युलोक में भटकती रहती है।

 अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पूर्णिमा तिथि से  श्राद्ध पक्ष की शुरुआत होती है और अमावस्या को इसकी समाप्ति होती है। इस बार पितृ पक्ष 13 सितंबर 2019, पूर्णिमा के दिन से शुरू होकर 28 सितंबर, अमावस्या के दिन तक चलेगी।

पितृपक्ष में इन नियमों का पालन जरूर करें

 शास्त्रों के अनुसार इन दिनों मे कोई भी शुभ कार्य, वाहन या नए सामान नही खरीदना चाहिय वही  चना, मसूर, जीरा, काला नमक, लौकी, खीरा, सरसों का साग आदि चीजों को नहीं खाना चाहिए।

 अतः श्राद्ध कर्म के निमित्त काले तिल का ही प्रयोग करना चाहिए. पितृ पक्ष में ब्राम्हणों को भोजन कराने का विधान है।



 

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