इस प्रकार शुरु हुई पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा

Samachar Jagat | Tuesday, 10 Sep 2019 01:17:14 PM
Thus the tradition of shraddha of ancestors started

इंटरनेट डेस्क पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध इस मास के 13 तारीख से प्रारम्भ होने जा रहा है। इस मास में लोग अपने पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए उनके सम्मान में श्राद्ध करते है। श्राद्ध करने से व्यक्ति अपने पितर के ऋण से मुक्त हो जाता है।ऐसा करने से पितर श्राद्ध करने वाले पर खुश होकर स्वर्ग से सुख-सम्पत्ति और आगे बढ़ने का आशीर्वाद देते है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध करने का विशेष महत्व माना जाता है।


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  पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा की शुरुआत महाभारत काल से बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि महातपस्वी अत्रि ने सबसे पहले महर्षि निमि को श्राद्ध करने का उपदेश दिया था। इस उपदेश के बाद महर्षि निमि ने अपने पितरों का श्राद्ध करना शुरु किया था। इसके बाद से यह परंपरा शुरू हुई, जो आज तक चली आ रही है।

 बताया गया है की मुनि अपने पितरों को अन्न देते थे। अन्न से तो उनके पूर्वज तृप्त हो गये लेकिन उन्हें अजीर्ण रोग हो गया। इस बात को लेकर महिर्ष निमि के पूर्वज भगवान ब्रह्म के पास गये तो भगवान ने उन्हें अग्निदेव के पास जाने के लिए कहा। अग्निदेव ने कहा कि कि अब वे भी उनके साथ श्राद्ध का भोजन करेंगे। यही कारण है कि श्राद्ध का भोजन सबसे पहले अग्निदेव को दिया जाता है। गौरतलब है कि श्राद्ध के दौरान पिंडदान करने का भी विधान है।

  



 

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