600 से ज्यादा विकेट लेने वाला भारत का सबसे सफल गेंदबाज, एक पारी में लेता था दस विकेट

Samachar Jagat | Monday, 02 Sep 2019 01:34:34 PM
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इंटरनेट डेस्क। भारतीय क्रिकेट टीम में वैसे तो गेंदबाजों ने अपनी काबिलियत के दम पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जगत में काफी नाम कमाया है। भारत के कई दिग्गज क्रिकेटरों ने स्पिन हो या तेज गेंदबाजी, हर तरह से अपनी प्रदर्शन से टीम को मजबूती दी है।

लेकिन, आज हम आपको एक ऐसे भारतीय स्पिन गेंदबाज के बारे में बताने जा रहे हैं। जिन्होंने भारत में गेंदबाजी को लेकर एक नई परिभाषा लिख डाली। इस गेंदबाज को युवा पीढ़ी के क्रिकेटर खुद के लिए आइडल मानते हैं। हम बात कर रहे हैं दुनिया के सफलत स्पिन गेंदबाजों में से एक अनिल कुंबले की, कुंबले को जम्बो के नाम से भी जाना जाता है।

कुंबले के नाम 400 विकेट लेने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। कुंबले के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड भी दर्ज, जो शायद अब तोड़ पाना बहुत कठिन है।  बात 4 फरवरी 1999 की है जब पाकिस्तानी की टीम इंडिया के दौरे पर आई थी। इसी सीरीज में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चल रहे टेस्ट में कुंबले ने अपनी गेंदबाजी का जबरदस्त जलवा दिखाते हुए टेस्ट की चौथी पारी में अपने 26.3 ओवरों में 9 मेडन रखते हुए 74 रन देकर सभी 10 विकेट झटक लिये थे। उनसे पहले इंग्लैंड के जिम लेकर ने ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध 26 जुलाई 1956 को आरम्भ हुए मैनचेस्टर टेस्ट की कुल तीसरी पारी में और ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में 51.2 ओवरों में 23 मेडन रखते हुए 53 रन देकर एक टेस्ट पारी में सभी दसों विकेट लेनेवाले पहले गेंदबाज बने थे।

कर्नाटक के बेंगलुरु में जन्मे कुंबले कर्नाटक टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए 19 साल की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में पदार्पण करने से पहले 1990 में उन्हें ऑस्ट्रेलिया-एशिया कप के लिए चुना गया था। तब से उन्होंने 132 से अधिक टेस्ट मैचों में भारतीय टेस्ट टीम का प्रतिनिधित्व किया है और भारतीय टीम को कई मैचों में जीत के मुहाने पर पहुंचाया। 1990 के दशक की शुरुआत में कुंबले वनडे टीम का नियमित हिस्सा रहे और इस दौरान कई बेहतरीन प्रदर्शन किए।  जिसमें वेस्टइंडीज के खिलाफ 12 रन पर छह विकेट (12 रन पर छह विकेट) शामिल थे। वर्ष 1996 उनके लिए बहुत सफल साबित हुआ क्योंकि उन्हें विश्व कप के लिए चुना गया और वह टूर्नामेंट के सबसे सफल गेंदबाज के रूप में उभरे। उन्होंने सात मैच खेले और 18.73 की औसत से 15 विकेट हासिल किए।

कुंबले को 2005 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। 18 साल तक खेलने के बाद, उन्होंने नवंबर 2008 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। अक्टूबर 2012 में कुंबले को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

2012 और 2015 के बीच, कुंबले ने इंडियन प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और मुंबई इंडियंस की टीमों के लिए मुख्य संरक्षक के रूप में पद संभाला। वह भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य कोच भी थे। फरवरी 2015 में, वह आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले चौथे भारतीय क्रिकेटर बन गए। अनिल कुंबले ने टेस्ट में 619 और वनडे में 337 विकेट लिये हैं।



 

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