भारत में एक शहर ऐसा भी जहां न नोट चलते हैं न ATM

Samachar Jagat | Tuesday, 29 Nov 2016 08:27:28 AM
भारत में एक शहर ऐसा भी जहां न नोट चलते हैं न ATM

मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद करने के बाद  देश के सभी लोग परेशान हैं वहीं भारत के राज्य तमिलनाडु में एक ऐसा भी शहर है जहां के लोगों पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। चेन्नई से 150 किलोमीटर दूर बसे शहर ऑरोविल में मुद्रा जैसी कोई चीज ही नहीं चलती। इस शहर की आबादी 2500 के करीब है। एस शहर में ऐसी सुख सुविधाएं मौजूद हैं कि अच्छे से अच्छा बड़ा शहर भी इसके सामने कहीं नहीं टिकता। ये अपने आप में छोटा सा स्मार्ट शहर है।

मीरा अल्फांसा ने की स्थापना
ऑरोविल की स्थापना 1968 में यूनेस्को के सहयोग से श्री ऑरोबिन्दो सोसाइटी की ‘मां’ मीरा अल्फांसा ने की थी। रोजर ऐंगर नाम के ब्रिटिश आर्किटेक्चर ने इसका डिजाइन तैयार किया था। इसका डिजाइन एक गैलेक्सी की तरह है और इसके बीच में एक मातृ मंदिर हैं जहां शहर के लोग मेडिटेशन करते हैं। 28 फरवरी 1968 को इस ऑरोविल के उद्घाटन समारोह में 124 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। ये शहर किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है और यहां के कायदे और कानून भी अलग हैं। यहां 42 देशों के लोग बड़ी ही सादगी से जीवन बिताते हैं। इनमें 30 फीसदी भारतीय भी हैं। यहां स्कूल, अस्पताल से लेकर यूनिवर्सिटी तक लोगों की जरूरत की हर चीज मौजूद है।

रहन सहन मुफ्त
यहां मुद्रा नहीं चलती बल्कि सेवाओं के बदले सेवायें प्रदान की जाती हैं। इस शहर में रहने वालों का रहन सहन मुफ्त है। ये लोग यहां की सेवाओं में अपनी मदद करते हैं। इन्हें फाउंडेशन की तरफ से बहुत मामूली वेतन बाहरी खर्च के लिए मिलता है।  यहां के लोग तेल, साबुन और अगरबत्ती बनाने जैसे कुटीर और गृह उद्योग चलाते हैं इनसे जो आमदनी होती है उसे ऑरोविल फाउंडेशन इस जगह के विकास में खर्च करता है। भारत सरकार की ओर से इस नगर को मान्यता प्राप्त है और सरकार भी इसे आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

बैंक की तरह करता है काम
1985-86 में एक फाइनेंशियल सर्विस सेंटर स्टार्ट किया गया। तब से ये आरबीआई की आज्ञा से बैंक की तरह ही काम करता है। इसमें यहां रहने वाले लोग अपना पैसा ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा कराते हैं। इसके बदले ऑरोविले फाइनेंशियल सर्विस (एएफएस) एक अकाउंट नंबर देता है। ऑरोविले के करीब 200 कॉमर्शियल सेंटर और छोटी-बड़ी दुकानों पर इसी अकाउंट नंबर को बता के खरीददारी की जाती है।

घूमने आते है पर्यटक
यहां घूमने के लिए दूर दूर से पर्यटक आते हैं जिन्हें उचित मूल्य पर रहने खाने की व्यवस्था की जाती है। आने वाले गेस्ट और वॉलेंटियर्स के लिए डेबिट कार्ड की तरह ही एक ऑरो कार्ड जारी किया जाता है। इसी कार्ड से ऑरोविल की दुकानों पर पेमेंट किया जाता है। हालांकि शहर के बाहर से जरूरी सामान के लिए कभी-कभी कैश पेमेंट करना होता है।
 

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