किस्सागोई की रोचकता और मानवीय संवेदनाओं को समेटती कहानियां

Samachar Jagat | Sunday, 19 Aug 2018 01:31:50 PM
Stories narrating the fascination of fascination and human sensibilities

नई दिल्ली। किस्सा, कहानियों का वह अनगढ़ रूप है जिसे कहना मनुष्य ने शायद लिखने से पहले ही सीख लिया था। कहानी के इस आधुनिक दौर में एक नया संग्रह आया है जिसमें ऐसी 18 कहानियों को संकलित किया गया है जो किस्सागोई की रोचकता एवं तमाम रंगों वाली मानवीय संवेदनाओं को समेटे हुए हैं। हिंदी अकादमी, द्वारा प्रकाशित अठारह किस्से में संकलित 18 कहानियां अकादमी की मासिक पत्रिका इंद्रप्रस्थ भारती में प्रकाशित हो चुकी हैं और खासी चर्चित भी हुई हैं। इन 18 कहानियों में करीब आधी कहानियां महिला रचनाकारों की हैं जो समाज के विभिन्न तबकों की व्यथा, उनकी उलझनों के साथ ही उनके रोजमर्रा के जीवन को भी रेखांकित करती हैं। 

लेखिकाओं की ये कहानियां राजनीति सहित ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं जिनमें आम तौर पर पुरूष लेखकों का ही वर्चस्व रहा है। पुस्तक की प्रधान संपादक और अकादमी की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा के अनुसार ये कहानियां अपने साथ व्यक्ति की उलझाव भरी जिंदगी में उस लोकरंग को भी दिखाती हैं जहां उसे अपने उखड़ने के नहीं, ठहरने के ठौर की आश्वस्ति होती हैं। वह कहानियों के संकलन की जरूरत पर चर्चा करते हुए कहती हैं, मौजूदा संशयपूर्व समय में विश्वास की कमी है तो संवेदना का अकाल लाजिम है। न जाने कितनी स्वर-भटकी, थकी-हारी और भविष्यहीन कहानियों का जन्म हो सकता है। 

इन कहानियों का जिक्र करते हुए मैत्रेयी पुष्पा कहती हैं, बलमाजी का स्टूडियो हो या करतब वायस, ये दो लेखिकाओं की सघन जीवन दृष्टि की परिचायक हैं। वहीं नरेशा की अम्मा दलित जीवन के आइने की तरह प्रस्तुत की गयी है। एक निकाह ऐसा भी को यथार्थ को दृष्टि की चेतना के प्रकाश में देखना होगा तो शुभ सात कदम में व्यक्ति और परिवेशगत सार्थक संदर्भों की पड़ताल करनी होगी। हिंदी अकादमी के सचिव जीतराम भट्ट के अनुसार पत्रिका के विभिन्न अंकों से 18 आधुनिक कथाकारों की रचनाओं का संकलन कर इसे संग्रहणीय बनाने का प्रयास किया गया है। -एजेंसी



 

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