GST लागू करते समय राज्यों से किए गए वायदे पूरे करे केंद्र सरकार: Gehlot

Samachar Jagat | Tuesday, 08 Sep 2020 02:00:02 PM
Central government should fulfills promises made to state while implementing GST: Gehlot

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार से जीएसटी लागू करते समय राज्य सरकारों से किए गए वायदों को पूरा करने एवं केंद्र द्बारा लागू किए जा रहे कुछ करों का अधिकार राज्य सरकारों के लिए छोड़ने का आग्रह किया है।

श्री गहलोत ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। श्री मोदी को लिखे गए पत्र में श्री गहलोत ने राज्यों को जीएसटी कम्पनसेशन के भुगतान में आ रही कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की 41वीं बैठक में 27 अगस्त को केंद्र सरकार द्बारा यह सुझाव दिया गया था कि राज्य द्बारा जीएसटी कम्पनसेशन में कमी की पूर्ति ऋण के माध्यम से की जाए।

श्री गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि इसकी पूर्ति कम्पनसेशन फंड से की जाए और इस कमी को वित्त पोषित करने की केंद्र सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है। यह उस संविधान संशोधन की मूल भावना के विपरीत है, जिसके तहत राज्यों द्बारा कुछ करों को लागू करने के अपने संवैधानिक अधिकारों को केंद्र सरकार के पक्ष में दे दिया गया था।

उन्होंने पत्र में लिखा है कि संविधान संशोधन के तहत कई राज्य करों को जीएसटी में सम्मिलित कर दिया गया था और कहा गया था कि राज्यों को इससे होने वाले राजस्व हानि को देखते हुए कम्पनसेशन उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी (कम्पनसेशन टू स्टेट) एक्ट 2०17 में राज्यों को जीएसटी को लागू करने के फलस्वरूप होने वाली राजस्व हानि की पूर्ति करने के लिए पांच वर्ष तक कम्पनसेशन देने की गारंटी दी गई है। इसलिए अब यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि राज्यों को कम्पनसेशन की पूरी राशि बिना किसी देनदारी के मिले।

उन्होंने कहा कि अपरिहार्य स्थितियों के कारण कर संग्रहण में कमी होने के बावजूद जीएसटी (कम्पनसेशन टू स्टेट) एक्ट 2०17 के तहत कम्पनसेशन को न ही कम किया जा सकता है और न ही बढ़ाया जा सकता है। जीएसटी एक्ट के तहत केंद्र सरकार कम्पनसेशन बढ़ाने या घटाने का निर्णय नहीं ले सकता है।

श्री गहलोत ने जीएसटी काउंसिल की पूर्व में आयोजित बैठकों का हवाला देते हुए बताया कि इन बैठकों में कई निर्णय लिए गए थे, जिनमें राजस्व हानि का शत-प्रतिशत कम्पनसेशन देने, इसे पांच वर्ष की अवधि (2०17-2०22) तक देने, केंद्र सरकार द्बारा सम्पूर्ण राशि का भुगतान करने की जिम्मेदारी और कमी की स्थिति में केंद्र सरकार द्बारा ऋण लिए जाने के निर्णय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच हुए सामूहिक निर्णयों पर आधारित है, जो कि संविधान संशोधन और कम्पनसेशन एक्ट से बंधा हुआ है।(एजेंसी)



 

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