City Report : बहन की शादी थी,भाई बैकुंठी बैठा

Samachar Jagat | Friday, 02 Dec 2022 04:39:39 PM
City Report : Sister was married, brother was sitting

रविवार का दिन था सम्मो का लगन आया था। हंसी खुशी का माहोल था।परिवार की महिलाएं गीत गा रही थी ढोलक मजीरे का संगीत हर किसी का मन झूम रहा था। सूकी कही भी दिखाई नहीं दे रहा था। बूढ़ी दादी को गुस्सा आने लगा था। चेहरे की झुर्रियां फेल सी गई थी।  अक्सर होता यही था। जब भी कोई डिस्प्यूट होता था,पहले उनको याद किया जाता था।

इनको इग्नोर करने का तो सवाल ही नहीं उठता था। इस बार भी यही हुवा। सूकी,अबे कहां गया। उसका कमरा बंद था। भीतर से सांकल लगी थी। दर  सा लगा। अनहोनी ना हो जाए। दादी चिल्लाई। इतनी तेज की पड़ोसी भी सहम गए। शादी के माहोल में यह कैसा  सा आप सगुण। सभी की नजरें सूकी के कमरे की ओर थी। दादी मंजी हुई खिलाड़ी थी। दरवाजे की दरार से सूकी के कमरे के भीतर का सीन देखने की कोसीस करने लगी। कोई खास नही। धोती का पॉल सम्हाल कर फर्श पर उतरी। कहीं गिर ना जाय। बहु ने किसी तरह उनको सम्हाला । बात थमी नहीं। पड़ोसी तिवारी जी टोलिया पकड़े वहां आए।

कमरे की खिड़की से झांका। राम राम करके दादी की नजरों की ओर झांकने लगा। वह बोला दादी भीतर ठीक ठाक नहीं लगता। पुलिस को बुलाना होगा। क्या कहा। वहां खड़े सभी का मुंह खुला का खुला रह गया। सूकी का बदन अकड़ गया था। मुंह से झाग निकल रहे थे। हाथ की नब्ज शांत थी। सवाल उठा। मर गया। सभी आंखे  फटी की फटी रह गई। तभी पुलिस भी वहां पहुंच गई। कई देर तक कमरे के कोने कोने को घूरते रहे । कोई खास सुराग हाट नहीं लगा। कई दिन गुजर गए थे। दादी हैरान थी। बार बार यहीं सोचती रही। रामजी आप का ही सहारा। तूही लाज बता। मेरा पोता क्यो गया।

कोई कमी नहीं थी। पर एक बात। बहु से बनती नहीं थी। हो सकता है झगड़ा हो सकता है। पर वह चुप थी। बार बार एक ही बात। मुझे नहीं पता। पोता आप का था। आप ही जाने। सब आप लोगों का किए कराया था। मामला सुसाइड का है। मगर इसमें भी शक था। आखिर मारा क्यू। बहु से नहीं बनती तो छोड़ देता। पर आपसी क्लेस से पुलिस भी परेशान थी। घटना का क्लू नहीं मिल पा रहा था। फिर अधिकारी भी कमाल करते है। मेरी सुनते ही नहीं। कोई ज़रूरी नहीं। हर केस में सुसाइड नोट मिले। सूकी की पोस्मार्टम की रिपोर्ट सामने थी। कोई खास नही। लास पर कोई चोट नहीं। खरोच तक नहीं थी।

मर गया तो मर गया। मामला सुसाइड का है। डिप्रेशन में होगा। आए दिन केस होते है। लोग समझते नही। बीमारी है तो इलाज करवा लेते। सूकी का बड़ा बेटा समझ दार था। उम्र हालांकि ज्यादा नहीं थी। हर बात को गहराई में लेता था। मम्मी पापा में आए दिन झगड़ा होता था। सूकी की नौकरी छोटी है। घर में काम नहीं चलता था। यह तो दादी का रुतबा था। क्या मजाल की कोई सवाल उठाए। मगर लंगड़ी गाड़ी कब तक चलती ।

सबने सिर पकड़ लिया। सूकी की बहन को जब खबर लगी डोडी आई। यह मामला सीरियस था। इस का असर उसके ससुराल पर पड़ना ही था। औरतों को मौका मिल गया। कहने लगी मनहूस है। अभी से यह हाल आगे क्या गुल खेलेगा। वह चुप थी। कभी सूकी की तस्वीर की ओर देखती तो कभी अपनी भाभी और भतीजी की ओर। भाई की मौत का जहर वह भी माहोल गमगीन । कोई क्या कर सकता था। सदमे घिरा परिवार अपने दुख में कब तक घुटेगा।



 

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