मुफलिसी में जीवन बसर कर रही बेटियां : अनाथ बेटियों का बंटवारा-कौन बनेगा पालनहार

Samachar Jagat | Saturday, 10 Jul 2021 08:35:18 PM
Distribution of orphaned daughters - who will become the nurturer

मुफलिसी में जीवन बसर कर रही बेटियां बालश्रम को मजबूर

10 जूलाई, जयपुर। एक मजदूर दिन-रात मेहनत कर जब पसीना बहाता है अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी बमुष्किल जुगाड कर पाता है। समय का पहिया घूमता है मजदूर की मौत के बाद परिवार पर इस कदर वज्रपात होता है कि जीने के लिए पढने लिखने की उम्र में उसके बच्चों को बाल मजदूरी करनी पडती है। मजदूर के बच्चें दर-दर की ठोकरे खाने पर मजबूर है। ऐसा ही मामला रेलवे स्टेषन के पास सूतमील कच्ची बस्ती में जब बालश्रमिक बच्चों की पहचान करने एवं सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए श्रम विभाग, यूनिसेफ एवं पीसीसीआरसीएस के संयुक्त तत्वावधान में चलाये जा रहे नन्हे हाथ कलम के साथ अभियान दल के पहुंचने पर देखने को मिला। दो दषक पहले शहर की बडी औद्योगिक इकाई सूतमील के बंद हो जाने पर कर्मचारियों का परिवार नारकीय जिंदगी व्यतीत कर रहा है। ये कर्मचारी मजदूरी, रिक्षा चलाना, आॅटो रिक्षा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे है। शैतान सिंह जादौन जिसकी 5 बेटियां और 1 बेटे का परिवार को मेहनत मजदूरी कर पालन-पोषण कर रहा था। पत्नी की मौत के 2 साल बाद वर्ष 2014 में उसने भी दम तोड दिया। बडी दो बेटियों की शादी हो चुकी है। बाकि चार बच्चें जिनकी उम्र 10 वर्ष से भी कम की थी। शैतान सिंह के दो भाईयों के यहां बंटवारे में किष्तों की जिंदगी जी रहे है। आलम यह है कि हाथों में कलम थामने की उम्र में जीवन यापन के लिये साडियों में मोती लगाने का काम कर रहे है। अभियान दल के बाल मित्रों को 15 साल की आचू जादौन बताती है कि उसकी दो भाई बहन बडे ताउजी के यहां है और हम दो बहने आचू और सीमा छोटे ताउजी के यहा है जो खुद मजदूरी करते है और वो दोनो ताईजी के साथ साडियों में मोती लगाने के काम में हाथ बटाती है। वह पढना चाहती है, स्कूल भी गई थी लेकिन आधार नही होने के कारण स्कूल नेें दाखिला देने से मना कर दिया। बाल मित्रों से षिक्षा की गुहार करती है। इस तरह के निराश्रित बच्चों के लिए पालनहार योजना का प्रावधान है लेकिन बच्चों के दोनो पालनहार आपसी लडाई के चलते योजना का लाभ के लिए आवष्यक दस्तावेज नही दे रहे है। ताई देवकी ने बताया कि अषिक्षित होने के कारण योजना की की जानकारी नही है। बाल मित्रो ंने आधार कार्ड बनवाने की कवायद प्रारम्भ की ताकि उन्हें पालनहार योजना से जोडा जा सके। घर की आर्थिक स्थिती दयनीय है। इन परिस्थिति में अगर योजना का लाभ प्राप्त हो जाता है तो बेटियों के पढाई के सपने पुरे हो सकते है। 


       अभियान दल को भ्रमण के दौरान 42 षिक्षा से वंचित एवं 18 बालश्रमिक बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः स्कूलों से जोडने की प्रक्रिया के साथ ही पालनहार योजना के 19, विधवा पेंषन 11, वृद्वा पेंषन 1, चिंरजीवी योजना 5 एवं 7 निर्माण श्रमिक योजना के आवेदन तैयार कराने में मदद की गई।



 

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