Fraud Case : राजधानी जयपुर में एसोसिएट प्रोफेसर के साथ ठगी व फर्जीवाड़े का मामला, शैक्षणिक दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर प्रोफेसर की कर दी फर्जी नियुक्ति, फैकल्टी की कमी को पूरा करने के लिए अपना अनैतिक तरीका, प्रोफेसर से बोली आरोपी– जो हुआ उसे तुम भूल जाओ !

Samachar Jagat | Tuesday, 27 Jul 2021 06:13:57 PM
Fraud Case  : A big case of cheating and forgery with Associate Professor in the capital Jaipur, the accused woman cleverly used educational documents in a wrong way and made fake appointment of professor in her institute itself, adopted unethical method to meet the shortage of faculty When the professor came to know, the accused said – you forget what happened!

संजय कुमार शर्मा। जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक पीएचडी होल्डर असोसिएट प्रोफेसर के साथ ठगी व फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। मामले में आरोपी ने बड़ी चालाकी और धूर्तपना दिखाते हुए प्रोफेसर के दस्तावेजों का फर्जी तरीक से उपयोग कर उससे पूछे बगैर सांठ-गांठ से अपने संस्थान में ही प्रोफेसर की फर्जी नियुक्ति कर डाली। खबसे बड़ी बात ये भी है कि पीड़ित प्रोफेसर को भी पता नहीं चला कि आखिर कब और कैसे आरोपी ने उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की कॉपी कर ली क्योंकि दोनों आपस में कभी न ही तो मिले न ही एक दूसरे को जानते हैं।

पीड़ित प्रोफेसर मामले को लेकर गांधी नजर पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे तो थानाध्यक्ष ने ये कहकर मामला टाल दिया कि मामला कोर्ट द्वारा कार्यवाही का है इसमें हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते। पीड़ित जब कोर्ट पहुंचा तो वहां से भी उसे निराशा ही हाथ लगी। कुल मिलाकर आरोपी ने बड़े ही छल पूर्वक ठगी का तरीका अपनाया। पीड़ित प्रोफेसर अभी भी इस मामले में न्याय की उम्मीद को लेकर दर-दर भटक रहे हैं। इस संबंध में प्रोफेसर ने राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी से भी मुलाकात कर उन्हें इस मामले से अवगत कराया है।

पीड़ित प्रोफेसर डॉ. युवराज राठौड़ जयपुर के भवानी निकेतन शिक्षा समिति में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। जयपुर के शाहपुरा स्थित बीडी मेमोरियल कला संस्थान (लक्ष्मी कॉलेज आफ एजूकेशन) की डायरेक्टर मंजुला शर्मा ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों के साथ मिली भगत करके प्रार्थी के एजूकेशनल डॉक्यूमेंट्स का दुरुपयोग किया। इतनी ही नहीं, फर्जी तरीके से फोटो में कांट-छांट करके प्रार्थी के फर्जी हस्ताक्षर भी ले लिये। वहीं फोटो की जगह पर किसी अन्य का फोटो लगा दिया। प्रार्थी को जब अपने दस्तावेजों का गलत उपयोग होने की भनक लगी तो उन्होंने इस संबंध में आरोपी निदेशिका को फोन किया तो आरोपी ने इस मामले में प्रार्थी प्रोफेसर से तो माफी मांग ली लेकिन साथ ही कहा कि जो हुआ उसे तुम भूल जाओ। इतना सुनते ही प्रार्थी हतप्रभ रह गया। उसे अपने साथ इतनी बड़ी ठगी का अहसास नहीं था।

फर्जीवाड़े के इस खेल में आरोपी ने अपने ही संस्थान में फर्जी तरीके से पीड़ित प्रोफेसर की नियुक्ति भी कर दी। लेकिन दस्तावेजों में प्रार्थी प्रोफेसर की जगह किसी और का फोटो लगाया। प्रोफेसर को पता ही नहीं कि उनकी नियुक्ति किसी और संस्थान में भी कर दी गई है। इतनी ही नहीं बल्कि प्रोफेसर के कार्यभार ग्रहण करने में भी फर्जी तरीके से असमर्थता जताते हुए उनकी जगह जुगांदर सिंह नाम के व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई। इस संबंध में संस्थान ने राजस्थान यूनिवर्सिटी को भी नियुक्ति पत्र भिजवा दिया। दरअसल किसी कॉलेज की मान्यता बरकरार रखने के लिए उसे समय-समय पर अपने फैकल्टी मेंबर्स की जानकारी संघटित विवि को भिजवानी पड़ती है। इसकी के चलते कर्मचारियों की कमी को देखकर आरोपी ने प्रार्थी प्रोफसर की फर्जी तरीके से अपने संस्थान में नियुक्ति दस्तावेज में दिखाई।

पीड़ित प्रोफेसर ने इस संबंधी नेशनल काउंसिल फोर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) की वेस्टर्न रिजनल कमेटी के क्षेत्रीय निदेशक को भी उक्त संस्थान में फर्जी तरीके से की गई उनकी नियुक्ति को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। हालांकि वहां से उन्हें अभी कोई जवाब नहीं मिला है। संस्थान में उनकी फर्जी नियुक्ति की एफआईआर गांधी नगर पुलिस थाने ने दर्ज कर ली है लेकिन अभी तक इसपर कोई कार्रवाई नहीं की है।

 

वहीं इस संबंध में एक शिकायत पत्र उन्होंने शासन सचिवालय, राजस्थान सरकार , उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को भी भेजा है। वहीं न्यायालय अपर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट जयपुर महानगर प्रथम में भी ये मामला अभी लंबित है। उक्त प्रकरण में प्रार्थी प्रोफेसर को न्याय की दरकार है। क्योंकि बड़ी सांठ-गांठ व राजनीतिक जान पहचान के चलते आरोपी ने ये फर्जीवाड़ा किया है। आरोपी भी शिक्षा के क्षेत्र से ही जुड़ी हुई हैं और उपरोक्त संस्थान की निदेशिका हैं। इस तरह का फर्जीवाड़ा व ठगी का काम कर आरोपी महिला निदेशिका ने शिक्षा के क्षेत्र में कीचड़ उछालने जैसा कार्य किया है। 

 



 

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