कोरोना के मद्देनजर प्रयागराज का हनुमत लला का मंदिर बंद

Samachar Jagat | Friday, 20 Mar 2020 02:17:11 PM
Hanumat Lala temple of Prayagraj closed in view of Corona

प्रयागराज, कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिये एहतियात के तौर पर देश और दुनिया का अकेला बंधवा स्थित लेटे संकट मोचन हनुमत लला मंदिर में पूजा-पाठ और हवन के बाद आम श्रद्धालुओं के



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दर्शन-पूजन करने के बाद 22 मार्च तक के लिए मंदिर का कपाट बंद कर दिया गया।
मंदिर के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरी ने शुक्रवार को बताया कि कोरोना वायरस से पूरी दुनिया लड़ रही है और भारत भी इससे अछूता नहीं रह गया। भारत हमारे संस्कृति और सनातन परंपरा की
विचाराधारा का देश है। हम विश्वास करते हैं कि भारत में अन्य देशों की तुलना में इसका प्रकोप कम होगा। पूजा-पाठ और हवन के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का कपाट 22 मार्च तक बन्द किये जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के लिए अब सोमवार को मंदिर का कपाट खोला जाएगा।

महंत ने कहा कि आगे की जैसी स्थिति होगी उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा। देश सर्वोंपरि है, लोग सर्वोपरि हैं। उन्होने कहा कि मंदिर की पूजा-पाठ की जो व्यवस्था है वह चलती रहेगी, श्रद्धालुओं, दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। यह मंदिर अपने आप में दुनिया में संभवतया अकेला है जिसमें लेटे हनुमत लला विराजमान है। इसका
विवरण पुराणों में मिलता है।

उन्होने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संदेश को सभी देशवासियों को पालन करना चाहिए। बचाव ही इसका सबसे बड़ा उपचार है। यह महामारी छुआ-छूत से फैलती है। सार्वजनिक स्थल मठ-मंदिर में दर्शन पूजन करने के लिए अधिक श्रद्धालु इकठ्ठा होते हैं। आरोग्य एवं अन्य कामनाओं के पूरा होने पर हर मंगलवार और शनिवार को यहां मन्नत पूरी होने का झंडा निशान चढèने के लिए लोग जुलूस की शक्ल मे गाजे-बाजे के साथ आते हैं।

मन्दिर में कदम रखते ही श्रद्धालुओं को अजीब सी सुखद अनुभूति होती है। भक्तों का मानना है कि ऐसे प्रतिमा पूरे विश्व मे कहीं मौजूद नहीं है।

पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अन्त: सलिला स्वरूप में प्रवाहित सरस्वती के त्रिवेणी तट पर स्थापित हनुमान की अनूठी प्रतिमा को प्रयाग का कोतवाल होने का दर्जा भी हासिल है। आम तौर पर जहां दूसरे मंदिरों मे प्रतिमाएँ सीधी खड़ी होती हैं। वहीं संगम आने वाला हर एक श्रद्धालु यहां सिदूर चढ़ाने और लेटे हनुमान के दर्शन को जरुर पहुंचता है।

महंत ने बताया कि महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, जैसी अनेक विभूतियों ने अपने सर को यहां झुकाया, पूजन किया। अपने देश की समृद्धि और विकास के लिए मनोकामना मांगी। यह कहा जाता है कि यहां मांगी गई मनोकामना अक्सर पूरी होती है।

 

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