हाथ की मुट्ठी में कोबरा चार घंटे कैद रहा तो दूसरी ओर डॉक्टर बोला सब्र करो नम्बर आने पर ही आपके पेसेंट को भी देखा जाएगा

Samachar Jagat | Friday, 07 Oct 2022 09:51:52 AM
If the cobra was imprisoned for four hours in the fist of the hand, on the other hand the doctor said, be patient, only when the number comes, your patient will also be seen.

जयपुर। टोंक जलिे के डग्गिी कस्बे में गत मंगलवार को देर रात पैतीस वर्ष के एक युवक को  कोबरा डंस गया थाद्ध यह वाकयिा उस वक् त हुआ जब एक पैतीस वर्ष का युवक अपने घर में चार पाई पर गहरी नींद में सोया हुआ था। तभी मौका पाकर क ोई कोबरा सांप उसकी चारपाई पर चढ गया। युवक ने जैसे ही करवट ली तो सांप से स्पर्श हो जाने पर उसने उसके कान पर डंस लयिा। दर्द होने पर एक बारगी तो युवक हड़बड़ा कर उठा, मगर तभी उसके दमिाग में खयाल आया कि कोई मच्छर डंक मार गया होगा। इस पर कान को कुछ देर सहलाने के बाद फरि से सोगया। तभी कुछ देर बाद फरि से वहीं सांप दूसरी बार सुभराती की चारपाई पर चढा और उसके उसी कान को फरि से डंसलयिा। 

सुभा के चल्लिाने की आवाज सुनकर परजिन जो कि नकिट ही अपनी- अपनी चारपाई पर सोए हुए थ्ो, सुभराती के कमरे में पहुंचे और कमरे की लाइट जला जो सीन देखा तो वे भी सहम गए। तब तक कोबरा फैलाया हुआ था। शोर मचाने पर सांप ने चार पाई से नीचे उतर कर कसिी सुरक्षति स्थल की ओर जाने लगा, मगर तभी सुभराती के परजिनों से उस पर लाठयिां बरसा कर सांप को अधमरा कर दयिा। बाद में तरकीब से उसे एक बर्तन में डाल कर कैद कर लयिा। फरि यह जरूरी था, सांप के डंसने के केस में कोशशि की जाती है कि हमलावर सांप को मरीज के साथ ही अस्पताल ल्ो जाया जाए। 

वाकएि के बाद सुभरासी के परजिनों ने तत्परता दखिाई। और सांप व रोगी को लेकर डीग के नकिट ही फागी के एक अस्पताल में दखिाया । इस पर प्राथमकि उपचार के तौर पर वहां की ड्यूटी डॉक्टर ने पांच पांच इंजेक्शन का मश्रिण तैयार करके सुभरात को लगा दयिा। ताकि सांप का जहर आगे नहीं फैले। इंजेक्सन के बाद चकित्सिको ने मरीज के परजिनों को बुलाकर सचेत कयिा कि रोगी की हालत बहुत ही सीरयिस हो चुकी है। बनिा काोई देरी के तुरंत ही उसे जयपुर ले जाएं। प्राथमकि उपचार के बाद सुभरात को सरकारी एंबूलैंस से जयपुर के सवाई मानसंिह की आपात चकित्सिा इकाई में पहुंचा दयिा। कसिी कारण के चलते यह केस एक घंटे तक स्ट्रेचर पर ही लेटा रहा। इकाई में मौजूद चकित्सिकों ने उसे नहीं देखा। संभवत: इसी के चलते पेसेंट का शरीर नीला पड़ने लगा। यहां परजिनोें ने एक बार फरि से फुर्ती दखिाई और परचिति चकित्सिकों के फोन इमरज्ौंसी के स्टाफ को करवाएं। ईलाज में वलिंब होने पर केस बगिड़ने लगा। परजिन कहते हैं कि उन्होने चकित्सिकों को बताया था कि यह केस ·ेक बाइट का है। इसे तुरंत ही देखएि,कोई खतरनाक वषिधर इस युवक को डंस गया है। ऐसा ना हो कि पेसेंट की हालत काबू से बाहर हो जाए, जरा भी वलिंब होने पर रोगी के लएि कुछ भी हो सकता है। 

यहां चकित्सिकोें की ओर से एक चूक यह भी हुई कि इस मरीज को आईसीयू की बजाए जनरल वार्ड में सफिट कर दयिा। वहां भी उसे संभालने में वलिंब हो गया । 
मरीज क े परजिन कहते हैं कि सुभरासी को डंसने वाले अधमरे सांप को भी चैक नहीं कयिा। इसका बॉक्स दो घंटे से भी समय तक नहीं खुल पाया। 

रोगी के परजिनों ने बताया कि यह तो उन्होने हम्मित दखिाई और सांप को मुंह से कस कर पकड़ लयिा। एक बारगी तो सांप ने संघर्ष कयिा और परजिनों को काटने का प्रयास कयिा, मगर वह सफल नहींे हो सका और परजिन के हाथों में लपिट कर उसने कसना शुरू कर दयिा। फरि दर्द तो होना ही था। मगर साहसी युवक कौन सा पीछे हटने वाला था। एक बारगी उसने सांप को इकाई के फेHर में छोड़ने का प्रयास कयिा। मगर स्टीाफ शोर मचाने लगा। युवक को डांट पलिाई और कहा गया कि आपके सांप को काबू में करो। अन्यथा इसका वपिरीत असर रोगी के उपचार पर पड़गा। ख्ौर जो भी हो युवक की हम्मित की तारीफ सभी ने की। साथ ही कहा गया कि गांव ले जा कर इसे फरि से जंगल में छोड़ आना। वरना कोबरा का गुस्सा बहुत ही खतरनाक होता है। महनिों के बाद भी वह अटेक कर सकता है। 

सुभरासी का उपचार हाल में आईसीयू में चल रहा है। परेशानी इस बात को लेकर है कि पेसेंट के शरीर में खतरनाक जहर बहुत अधकि फैल चुका है। संभवतया यही कारण रहा कि पेसेंट बार- बार अचेत हो रहा था। चकित्सिकों का कहना था कि ऐसे मामले में यदि रोगी को घटना के बाद तुरंत अस्पताल ले आया जाता है तो उसके बचने की उम्मीद बढ सकती है। अन्यथा दूसरी स्टेज में वषि के चलते रोगी का हार्ट प्रभावति हो सकता है। साथ ही कडिनी और लीवर भी इफेक्टवि होने पर पेसेंट को बचाना बड़ा मुश्कलि हो जाता है। सुभराती का जहां तक सवाल है उसकी हालत अब तक भी खतरे से बाहर नहीं हो सकी है। रोगी की जान बचाने के लएि चकित्सिकों के प्रयास जारी है।



 

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