Jaipur : डॉक्टर साहब...इतनी बड़ी गलती, अपनी दोनों किडनियां खराब करली, अब वेंटिलेटर पर

Samachar Jagat | Wednesday, 10 Aug 2022 12:27:30 PM
Jaipur : Doctor sir... such a big mistake, spoiled both his kidneys, now on ventilator

जयपुर। कोई सामान्य व्यक्ति होता तो समझ में आता कि अपने उपचार में लापरवाही बरती। मगर यह केस एक चिकित्सक का है, जिसने विदेश में जाकर डॉक्टरी का पांच साल का कोर्स पूरा किया। मगर खाने-पीने में गड़बड़ करली। तभी उन्हें किडनी से संबंधित कोई बीमारी हो गई। यहां ना समझी यह रही कि अपना उपचार नेफ्रोलोजिस्ट से ना करवा कर खुद ही करना शुरू कर दिया। बात यहां आकर समाप्त नहीं हुई।

इन दवाओं का सेवन भी नियमित रूप से नहीं किया। तबियत ज्यादा बिगड़ी तो स्पेशिलिस्ट को दिखाया, जिसने सप्ताह तमाम जांच के बाद सप्ताह में एक बार डायलेसिस करवाने का सुझाव दिया मगर उनकी बात नहीं मानी। एक माह तो यह कोर्स लिया मगर बिना नेफ्रोलोजिस्ट को बताए, अपने आप ही इसे बंद कर दिया। हालत यह हो गई कि उसकी दोनों किडनियों ने जवाब दे दिया। इसके बाद भी वे नहीं चेते और फेफड़ों में पानी भरने के साथ सीवियर इनफेक्सन हो गया। सांस लेने में इस कदर परेशानी होने लगी कि उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में आईसीयू में सिफट करके वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

अब उनकी हालत बेहद चिंताजनक हो चुकी है। चिकित्सक चाहते हैं कि किडनी ट्रांसप्लाट करके पेसेंट की जिंदगी को बचाया जाए। समस्या इस बात की हो गई कि उनके ब्लड का ग्रुप अब दुर्लभ हो गया है। कहने को उनके पिता और माता ने अपनी किडनी देने का निर्णय लिया है, मगर समस्या इस बात की है कि उनका ब्लड ग्रुप डॉक्टर के ब्लड ग्रुप से मैच नहीं कर रहा है। कहने को कुछ लोगों का ब्लड ग्रुप ओ पोजिटिव है। वे भी अपनी किडनी देने के लिए तैयार है, मगर चिकित्सकों का कहना है कि किडनी केवल मां-बाप की या सगे भाई-बहन की मैच कर सकती है। किसी दूसरे की नहीं। यहां जाकर गाड़ी फंस गई है। किडनी बदलने में विलंब होने पर उनकी बेकार हुई किडनियों ने उनके शरीर में विष फैलाना शुरू कर दिया है।

उनकी हालत लगातार गिर रही है। उनके दोनों फेफड़े भी इनफेक्टेड होने पर पिछले चार दिनों से उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा है। एक सप्ताह से वे अचेत है। शरीर के अंग मशीन के सपोर्ट से ही काम कर रहे हैं। मगर उसकी भी सीमा बताई जा रही है। समय अवधि में यदि किडनियां नहीं ट्रांसप्लांट की गई तो वेंटिलेटर का सपोर्ट भी खत्म हो सकता है। डॉक्टर बाबू के पिता ने बताया कि डॉक्टरी का एमबीबीएस का कोर्स करने के लिए उनके पुत्र डॉ. हिरेंद्र को रेगिस्तान भिजवाया गया था।

वहां उन्होंने पूरा कोर्स करके डॉक्टरी की डिग्री प्राप्त हो गई थी। इस पर वह भरतपुर स्थित अपने निवास पर आ गया। मगर यहां उसे खास तरह के टेस्ट को पास करना जरूरी था। जिसकी तैयारी के लिए वह पिछले कई दिनों से दिल्ली में ही रह रहा था। हिरेंन्द्र का पारिवारिक ग्राउण्ड होने पर उनकी डॉक्टरी के लिए परिजनों ने लाखों रुपए लगा दिया। जब भी जरूरत पड़ी, डॉक्टर साहब की डिमांड के मुताबिक पैसा लगातार भिजवाया जाता रहा। सूत्र कहते हैं कि दिल्ली में उनका खाना पीना सेट नहीं हो पाया। नॉनवेज फुड क्वालिटी का ना होने पर उनका स्वास्थ्य बिगड़ता ही गया।
 



 

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