Jaipur : हजारों रुपए खर्च करने के बाद भी शहरवासी आवारा डॉग्स से परेशान

Samachar Jagat | Friday, 02 Dec 2022 04:44:34 PM
Jaipur : Even after spending thousands of rupees, the residents are troubled by stray dogs

जयपुर और यहां गली और मोहल्लों में मंडराते लावारिस डॉग्स ने लोगों का जीना हराम किया है। जानकारी के अनुसार पिछले साल यहां की एक एजेंसी इस बात का दावा करती हैं की गत वर्ष में उनके द्वारा यहां पांच हजार डॉग्स की नस बंदी की थी। इस पर उन्हें सरकार के द्वारा पचास लाख रुपया का भुगतान किया था।

नसबंदी वाले डॉग्स की पहचान के लिए उनकी कान पर कट लगाना शुरू किया । मगर ये कान कट्टे जो कही भी। नजर नहीं आ रहे है। इन हालातों में भी संस्थान को इसका भुगतान भी इसी के अनुसार किया जाता रहा। मगर यहां विवाद के चलते इन डॉग्स की पहचान के लिए कान तो कटे गए मेगर उनके बच्चे पैदा हो गए। कहते है की इस त्रुटीपुर सिस्टम के चलते जयपुर नगर निगम ने कई हजार रूपीज का भुगतान कर दिया।

स्टीट डॉग्स को निशुल्क भोजन करने वाली दो समाज सेविकाओं ने यह मामला संसद तक पहुंच गया। इस पर उनकी असिस्टेंट गत मंडे को जयपुर भी आई थी। और यहां के एनिमल लवर्स के साथ मीटिंग ली फिर तथ्यों का अवलोकन किया। मीटिंग में यह भी तय किया की इस मामले में जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज के सीईओ के साथ मीटिंग की जाए। साथ ही महापौर को भी अवगत करवाया जाय। 

मेनका गांधी की सचिव मिसेज रेखा कहती है की जिन डॉग्स की नसबंदी जब वास्तविकता में हुई ही नहीं फिर भी उनका भुगता कई से हो गया। यहां आपत्ति जनक बात यह भी रही की डोगी की नसबंदी करने वाली संस्था के बिल का वेरिफिकेशन किसने किया। ले दे कर यह मामला आपत्तिजनक होने पर इसकी जांच पुलिस में दर्ज करवानी आवश्यक है। नगर निगम यदि इस मामले में कोई भी करवाई नही करता है तो या मामला केंद्र सरकार तक पहुंचा कर डोसी को दंडित करवाए जाय। डॉग्स के मामले मैं निगम के सूत्र  बताते है की जयपुर की जीव कल्याण संस्थान जयपुर में डॉग्स की नसबंदी का काम किया था।

इस साल इसी संस्थान ने फिर से टेंडर में भाग लिया। इस पर यह टेंडर इसी इसी का खुला मगर इस बार यह संस्थान अपना एनिमल वेलफेयर बोर्ड का प्रमाण पत्र जमा नही करवा पाई तो टेंडर निरस्थ हो गया । इस पर यही टेंडर फिर से खोला गया। जिसमे भी इस संस्थान ने तमाम औपचारिकताएं पूरी करके भाग लिया है। फिल हाल यहां डॉग्स की नसबंदी का अभियान ठंडा पड़ा है। निगम की सुस्ती के चलते एस्ट्रीट डॉग्स की समस्या दिनों दिन जटिल होती जा रही है।

सबसे चिंता की बात यह है की सर्दियों के सीजन की शुरुआत के साथ ही डॉग्स की ब्रीडिंग शुरू हो चुकी है। यही सिस्टम चलता रहा तो जयपुर में डॉग्स की संख्या दुगनी हो जाएगी। अफसोस इस बात का है की इस बार इन डॉग्स के एंटीरेबीज टीके तक नहीं लगे है। यह मामला तो बेहद चिंता का हो गया है।



 

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