उदयपुर में भी बिगड़े हालात,आदिवासियों ने कस्बे को घेरा

Samachar Jagat | Monday, 28 Sep 2020 09:31:58 AM
The situation deteriorated even in Udaipur, the tribals surrounded the town

उदयपुर/ डूंगरपुर। प्रदेश के डूंगरपुर जिले की कांकरी डूंगरी से शुरू हुए आदिवासियों के प्रदर्शन की आगचौथे दिन भी थमने का नाम ही नहीं ले रही है। जानकारी के मुताबिक उदयपुर के ऋषभदेव कस्बे में माहौल तनावपूर्ण हो गया है। आदिवासियों ने चारों ओर से कस्बे को घेर लिया है। उपद्रवियों की ओर से पुलिसबल पर पथराव जारी है, पुलिस ने उपद्रवियों को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। कस्बे के चारों पहाडिय़ों पर सैकड़ों आदिवासी जमा हुए। कस्बे के सैकड़ों लोगों ने लाठीभाटों से उपद्रवियों को  प्रत्यु ार दिया।

रैपिड ए शन फोर्स मांगी, इंटरनेट सेवा बंद
डूंगरपुर के खेरवाड़ा कस्बे में फिलहाल तनावपूर्ण शांति है। पुलिस के आलाधिकारियों के जयपुर से आने के बाद रणनीति बनाई जा रही है। जयपुर से पहुंचे डीजी एमएल लाठर,आनंद श्रीवास्तव और दिनेश एममन ने हिंसा को काबू करने के लिए रणनीति के साथ लगातार प्रयास कर रहे हैं। महापड़ाव स्थल कांकरी डूंगरी तक पुलिस का भारी जाप्ता तैनात किया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से एसडीआरएफ और अन्य जा ता तैनात किया गया है। प्रदेश के मु यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र से रैपिड ए शन फोर्स मांगी है। स्थिति संभालने के लिए सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस एमएल लाठर, दिनेश एमएन और आनंद श्रीवास्तव को जयपुर से डूंगरपुर भेज दिया है। डूंगरपुर-बांसवाड़ा के बाद उदयपुर जिले में भी इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई।

उपद्रवियों ने होटल  और मकान फूंके
इससे पहले खेरवाड़ा कस्बे में उपद्रव के दौरान शनिवार रात झड़प में 2 लोग मारे गए। झड़प में मारे गए 2 लोगों के शव उदयपुर मोर्चरी में शि ट कराए गए। 2 अन्य घायलों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। पूरे खेरवाड़ा को उपद्रवियों ने घेर रखा है. उपद्रवियों ने होटल और मकान फूंक दिए है। उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे 60 घंटे से ज्यादा समय से बंद पड़ा है। हाईवे पर उपद्रवियों ने 20 किलोमीटर क्षेत्र में पत्थर बिछाए हुए है।

बातचीत जारी, रास्ता खुलने की उम्मीद
इस बीच, दक्षिणी राजस्थान के जनजाति क्षेत्र के सभी जनजाति प्रतिनिधियों के साथ राजस्थान सरकार के मंत्री बामणिया, उदयपुर सांसद अर्जुन मीणा, पूर्व सांसद व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य रघुवीर मीणा, पूर्व मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीया, द्याराम परमार, चुन्नीलाल गरासिया, आंदोलन पर बैठे अ यर्थियों के प्रतिनिधि के रूप में बीटीपी विधायक राजकुमार रोत, रामप्रसाद डिंडोर आदि मौजूद रहे। इस बैठक के बाद मंत्री बामणिया ने मीडिया को बताया कि बैठक में उपद्रव को हर हाल में शांत करने पर सहमति बनी है। सभी ने शांति बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया है। आंदोलनकारियों की मांग के मद्देनजर एक कमेटी का निर्धारण होगा जो हाईकोर्ट की डबल बैंच के फैसले पर मंथन करके एसएलपी दायर करने पर निर्णय करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया का समाधान न्यायिक प्रक्रिया से ही संभव है। बामणिया ने शनिवार को हुई वार्ता और उसके बाद खेरवाड़ा में हुए उपद्रव के सवाल पर कहा कि शनिवार को वार्ता में देरी हो गई थी और सभी जनप्रतिनिधि भी नहीं आ सके थे। संदेश सभी तक नहीं पहुंच सका था,सभी उपस्थित हुए हैं और सभी शांति के लिए ही उपस्थित हुए हैं।

 



 

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