सुशांत मामला: बिहार सरकार ने न्यायालय से रिया चक्रवर्ती की याचिका खारिज करने का अनुरोध किया

Samachar Jagat | Friday, 07 Aug 2020 05:00:01 PM
Sushant case: Bihar government requests court to dismiss Riya Chakraborty's petition

नयी दिल्ली। बिहार सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि अभिनेता सुशांत सिह राजपूत की मौत के मामले में पटना में दर्ज प्राथमिकी मुंबई स्थानांतरित करने के लिये अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की याचिका ''गलत सोच के साथ और समय पूर्व दाखिल की गई है तथा यह विचार योग्य नहीं है,’’ अत: इसे खारिज किया जाना चाहिए।
मुंबई के उपनगर बांद्रा के अपने अपार्टमेंट में 34 वर्षीय सुशांत सिह राजपूत 14 जून को छत से फांसी से लटके मिले थे। मुंबई पुलिस सुशांत सिह की मौत की घटना के विभिन् बिदुओं पर पड़ताल कर रही है। पटना निवासी राजपूत के 77 वर्षीय पिता कृष्ण किशोर सिह की प्राथमिकी पर बिहार पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी थी।
मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस ने बॉलीवुड के निर्देशकों आदित्य चोपड़ा, महेश भट्ट और संजय लीला भंसाली समेत 56 लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
रिया की याचिका के जवाब में बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि मामले की संवदेनशीलता, दो राज्यों का मामला होने तथा कई आरोपियों की मुंबई में मौजूदगी को देखते हुए सरकार ने इसकी सीबीआई से जांच कराने की पुलिस महानिदेशक की सिफारिश का संज्ञान लिया है।
यह हलफनामा पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उपेंद्र शर्मा ने राज्य सरकार के वकील केशव मोहन के जरिये दाखिल किया है। 28 पन्नों के हलफनामे में कहा गया है कि इस मामले में राज्य की पुलिस का अधिकार क्षेत्र बनता है क्योंकि अपराध के परिणाम पटना के रहने वाले व्यक्ति को भुगतने पड़े हैं और वह हैं मृतक अभिनेता के पिता जो यहां रहते हैं।
हलफनामे में बताया गया कि बिहार पुलिस ने मृतक अभिनेता के पिता कृष्ण किशोर सिह की प्राथमिकी पर जांच के दौरान मुंबई में सुशांत के मित्र महेश शेट्टी और पूर्व महिला मित्र अभिनेत्री अंकिता लोखंडे समेत दस लोगों से पूछताछ की है।
रिया की याचिका पर न्यायालय के निर्देश पर बिहार सरकार की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने अपने हलफनामे में कहा है, ''याचिकाकर्ता की याचिका 'गलत सोच के साथ और समय पूर्व दाखिल की गई है तथा यह विचार योग्य नहीं है,’ अत: इसे खारिज किया जाना चाहिए।’’
हलफनामे में तमाम कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया, ''दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 179 के महज अवलोकन से यह मालूम पड़ता है कि जिस जगह अपराध हुआ या जिस जगह उसका असर हुआ, दोनों ही स्थानों में से कहीं पर भी अपराध के खिलाफ मुकदमा चल सकता है।’’
इसमें कहा गया कि वर्तमान मामले में पीड़ित इस अपराध की सूचना देने वाला है। वह हैं राजपूत के पिता कृष्ण किशोर सिह जिन्होंने अभिनेत्री (रिया) समेत अन्य आरोपियों के अपराध की वजह से अपना ''युवा तथा प्रतिभाशाली’’ बेटा खो दिया। हलफनामे में यह भी कहा गया कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करना पटना पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है।
हलफनामे में मुंबई पुलिस के असहयोग का भी जिक्र है।
इसमें कहा गया, ''पटना पुलिस की शुरुआती जांच में यह पता चला है कि इस मामले से संबंधित तथ्य एवं सबूत मुंबई या भारत के अन्य हिस्सों में मिल सकते हैं। मामले की संवेदनशीलता, दो राज्यों का मामला होने और कई आरोपियों की मुंबई में मौजूदगी को देखते हुए बिहार के पुलिस महानिदेशक ने बिहार सरकार से मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करने का अनुरोध किया।’’
मुंबई पुलिस द्बारा पटना पुलिस के साथ कितना असहयोग किया जा रहा है यह इस बात से स्पष्ट है कि उसने पटना पुलिस को अपनी तहकीकात संबंधी रिपोर्ट, पोस्ट मार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज तक नहीं दी है।
इसमें कहा गया, ''ससम्मान यह सूचित किया जाता है कि मुंबई पुलिस असंतोषजनक तर्क दे रही है कि केवल मुंबई पुलिस को ही इस अपराध की जांच का अधिकार है जो वह पहले से कर रही है, बावजूद इसके कि मामला संज्ञेय नहीं है।’’
रिया की याचिका खारिज करने की मांग करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि अभिनेत्री ने कुछ भी उल्लेखानीय जानकारी नहीं दी है ''सिवाए इस आरोप के कि शिकायतकर्ता ने प्रभाव के चलते प्राथमिकी दर्ज हुई है,’’ और प्राथमिकी महज पूर्वाग्रह या आशंका के आधार पर स्थानांतरित नहीं होती।
हलफनामे में कहा गया कि फौजदारी मामलों में दीवानी मामलों की तरह अधिकार क्षेत्र की अवधारणा लागू नहीं होती है।
उच्चतम न्यायालय ने अभिनेता सुशांत सिह राजपूत को प्रतिभाशाली कलाकार बताते हुए बुधवार को कहा था कि उनकी मौत के कारणों की सच्चाई सामने आनी ही चाहिए। न्यायालय ने सुशांत के पिता कृष्ण किशोर सिह, बिहार तथा महाराष्ट्र सरकार से रिया की याचिका पर तीन दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया था। 



 

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