देश की आज़ादी के बारे में क्या सोचते थे स्वामी विवेकानंद!

Samachar Jagat | Wednesday, 12 Jan 2022 02:16:43 PM
What did Swami Vivekananda think about the independence of the country?

भारत के युगपुरुषों में से एक स्वामी विवेकानंद को युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श माना जाता है। हर विषय पर उनके विचार जानने के बाद भी कई बुद्धिजीवी आज भी उनकी चर्चा करते हैं। स्वामीजी ने ऐसे विषय पर क्या कहा और किस कारण से कहा, इस पर हमेशा चर्चा होती है। इसमें देश की आजादी भी एक ऐसा विषय है, जिस पर स्वामी विवेकानंद के कुछ अलग विचार थे। स्वतंत्रता संग्राम में स्वामी जी का योगदान उनके विचारों और कार्यों से स्पष्ट होता है। एक बात यह भी है कि स्वामीजी गांधी जी से कई स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरणा स्रोत थे और जीवन भर देशवासियों को तैयार करने में लगे रहे।

स्वामी जी भी सच्चे देशभक्त थे। सन्यासी होने के कारण वे कभी भी राजनीति में सक्रिय नहीं रहे। लेकिन उनके विचारों ने भारतीय राजनेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों को बहुत प्रभावित किया और उन्हें देश के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। स्वामी जी के विचारों को जानने के बाद पता चलता है कि वे देशवासियों की हर समस्या को अपनी समस्या मानते थे। इसलिए उन्होंने गुलामी को भी देश और देशवासियों की मुख्य समस्या माना। उनके विचारों पर ध्यान देने से स्पष्ट होता है कि वे भारतीयों की दासता की समस्या की जड़ पर सदैव प्रहार करते रहते थे, भारतीयों की दासता से कुंद हो रही मानसिकता।


 
स्वामीजी कहा करते थे कि सबसे जरूरी है कि अगर हर देशवासी जाग्रत हो जाए तो देश की अन्य समस्याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा। यहां तक ​​कि उन्होंने 1 नवंबर 1896 को अपने अनुयायियों को लिखे एक पत्र में कहा था कि देश 50 साल बाद स्वतंत्र होगा। ऐसा हुआ लेकिन उनकी चिंता इस बात की थी कि देश के हर नागरिक को जगाने की सख्त जरूरत है, उनकी चिंता आज भी बनी हुई है। क्योंकि देश का एक बड़ा तबका दिमाग से सोचने से ज्यादा चीजों को भ्रमित करने से ज्यादा प्रभावित होता है।



 

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