मध्यप्रदेश के राज्यपाल ने फिर कमलनाथ को पत्र लिख कर बहुमत साबित करने को कहा

Samachar Jagat | Tuesday, 17 Mar 2020 06:51:30 AM
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मध्यप्रदेश में सरकार गिराने और बचाने का सियासी नाटक जारी है. फ्लोर टेस्ट सोमवार को होना था, लेकिन कोरोना वायरस ने सदन की कार्रवाई दस दिनों तक स्थगित करवा दी. जाहिर है कि इसे लेकर भाजपा शोर मचा रही है. वह न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट चली गई बल्कि भाजपा के विधायकों ने राज्यपाल लालजी टंडन का दरवाजा खटखटाया. अपने विधायकों की गिनती करवाई और फिर विधायक किसी अनजान जगह के लिए कूच कर गए. भाजपा विधायकों से मुलाकात के बाद लालजी टंडन ने कमलनाथ को फिर चिट्ठी लिखी. उन्होंने मंगलवार फ्लोर टेस्ट कराने के लिए निर्देश दिए हैं. राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर विधानसभा में मंगलवार को फ्लोर टेस्ट कराने के लिए कहा है. उन्होंने अपने 14 मार्च के पत्र के जवाब में कमलनाथ की ओर से भेजे गए पत्र को लेकर आपत्ति उठाई. उन्होंने कहा है कि आपने अपने पत्र में फ्लोर टेस्ट नहीं कराने के जो कारण दिए हैं वे आधारहीन व अर्थहीन हैं.

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को लिखे गए पत्र में लिखा है कि मेरे 14 मार्च के पत्र के उत्तर में मिले पत्र का भाव / भाषा संसदीय मर्यादाओं के अनुकूल नहीं है. उन्होंने कहा कि मैंने अपने 14 मार्च के पत्र में आपसे विधानसभा में 16 मार्च को विश्वास मत प्राप्त करने के लिए निवेदन किया था. सोमवार को विधानसभा का सत्र प्रारंभ हुआ. मैंने अपना अभिभाषण पढ़ा लेकिन आपने सदन का विश्वास मत प्राप्त करने की कार्यवाही प्रारंभ नहीं की और इस संबंध में कोई सार्थक प्रयास भी नहीं किया. सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित हो गई. आपने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के जिस निर्णय का जिक्र किया है. वह वर्तमान परिस्थितियों और तथ्यों में लागू नहीं होता है. राज्यपाल ने कहा कि जब यह सवाल उठे कि किसी सरकार को सदन का विश्वास प्राप्त है या नहीं तब ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों में निर्विवादित रूप से स्थापित किया गया है कि इस सवाल का उत्तर अंतिम रूप से सदन में फ्लोर टेस्ट के माध्यम से ही हो सकता है. 

राज्यपाल ने लिखी लंबी चिट्ठी में कहा है कि यह खेद की बात है कि आपको दी गई समयावधि में अपना बहुमत सिद्ध करने के बजाय यह पत्र लिखकर विश्वास मत प्राप्त करने व विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने में अपनी असमर्थता व्यक्त की है/ आनाकानी की है, जिसका कोई भी औचित्य और आधार नहीं है. आपने अपने पत्र में फ्लोर टेस्ट नहीं कराने के जो कारण दिए हैं वे आधारहीन और अर्थहीन हैं. राज्यपाल ने कमलनाथ से कहा कि मेरा आपसे पुन: निवेदन है कि आप संवैधानिक व लोकतंत्रीय मान्यताओं का सम्मान करते हुए कल 17 मार्च तक मध्यप्रदेश विधानसभा में फ्लोर टेस्ट करवाएं और अपना बहुमत सिद्ध करें, नहीं तो यह माना जाएगा कि वास्तव में आपको विधानसभा में बहुमत प्राप्त नहीं है.

इससे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा को कोरोना वायरस की वजह से 26 मार्च तक स्थगित कर दिया गया है. फ्लोर टेस्ट की चुनौती झेल रहे मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए यह बड़ी राहत है क्योंकि उनके 20 से ज्यादा विधायक अपना इस्तीफा दे चुके हैं. लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर दाखिल याचिका में कहा गया है, राज्यपाल ने कहा था कि कि 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराया जाए लेकिन विधानसभा अध्यक्ष फ्लोर टेस्ट नहीं करा रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान की ओर से सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि फ्लोर टेस्ट जल्दी कराए जाए. हालांकि कोरोना वायरस का असर सुप्रीम कोर्ट में भी दिख रहा है.

सुप्रीम कोर्ट बहुत ही जरूरी मामलों की सुनवाई कर रहा है कोर्ट परिसर में वकीलों की मेडिकल जांच की जा रही है. मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देशों के बाद सदन में शक्ति परीक्षण कराने की भाजपा की मांग और स्पीकर का ध्यान कोरोना वायरस के खतरे की ओर आकर्षित किए जाने के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सोमवार को सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित कर दी. राज्यपाल ने शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर विश्वास मत हासिल करने के निर्देश दिए जाने का हवाला देते हुए भाजपा ने अभिभाषण के बीच शक्ति परीक्षण कराने की मांग की थी. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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