कोरोना ने भाजपा का खेल बिगाड़ा, चौहान गए सुप्रीम कोर्ट

Samachar Jagat | Tuesday, 17 Mar 2020 07:21:33 AM
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कांग्रेस के कोरोना दांव ने फिलहाल भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. मध्यप्रदेश में सत्ता के खेल में कोरोना वायरस का प्रवेश हुआ और उसने कमलनाथ सरकार का संकट टाल दिया. जिस कोरोना से पूरी दुनिया परेशान है और देश भर में इसे लेकर एक अलग तरह की दहशत है, उसी कोराना ने कमलनाथ और कांग्रेस को बड़ी राहत दे दी है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे देने और बीस से ज्यादा विधायकों के बागी हो जाने की वजह से कांग्रेस की पंद्रह महीने पुरानी कमलनाथ की सरकार पर संकट है. उसे सोमवार को बहुमत साबित करनी थी लेकिन कोरोना ने उसके संकट को फिलहाल तो टाल दिया है. लेकिन सरकार पर खतरा बरकार है. हालांकि पहले ही इस बात की उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कमलनाथ सोमवार को सदन में बहुमत साबित करने से पहले सियासी खेल खेलेंगे. खेला भी, देश में फैले कोरोना वायरस ने उनकी मदद की और कोरोना के खतरों के बीच सदन 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया.



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फ्लोर टेस्ट की चुनौती झेल रहे सीएम कमलनाथ के लिए यह बड़ी राहत रही क्योंकि उनके बीस से ज्यादा विधायक अपना इस्तीफा दे चुके हैं. लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर दाखिल याचिका में कहा गया है, राज्यपाल ने कहा था कि कि सोमवार को फ्लोर टेस्ट कराया जाए लेकिन विधानसभा अध्यक्ष फ्लोर टेस्ट नहीं करा रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान की ओर से सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि फ्लोर टेस्ट जल्दी कराए जाए. हालांकि कोरोना वायरस का असर सुप्रीम कोर्ट में भी दिख रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही जरूरी मामलों की सुनवाई कर रहा है कोर्ट परिसर में वकीलों की मेडिकल जांच की जा रही है. इस बीच भाजपा विधायकों ने राज्यपाल से मुलाकात कर कमलनाथ सरकार को भंग करने की मांग की और अपने विधायकों की सूची उन्हें सौंपी.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देशों के बाद सदन में शक्ति परीक्षण कराने भाजपा की मांग और प्रदेश सरकार के स्पीकर का ध्यान कोरोना वायरस के खतरे की ओर आकर्षित किए जाने के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सोमवार को सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित कर दी. राज्यपाल ने शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर विश्वास मत हासिल करने के निर्देश दिए थे. पत्र का जिक्र करते हुए भाजपा ने अभिभाषण के बीच शक्ति परीक्षण कराने की मांग की थी.

राज्यपाल को सदन में अभिभाषण पढ़ते हुए एक मिनट ही हुआ था कि भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि राज्यपाल ऐसी सरकार का अभिभाषण पढ़ रहे हैं जो अल्पमत में है. हालांकि राज्यपाल ने विधायकों से अपील की कि वे नियमों का पालन करें और शांति से काम लें. उन्होंने विधायकों से लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखने के लिए संवैधानिक परंपराओं का पालन करने का आग्रह किया.

इस अपील के बाद राज्यपाल सदन से बाहर निकल गए. इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप के बीच हंगामा शुरू हो गया. प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने देश में कोरोना वायरस के खतरे और इस मामले में केंद्र सरकार के जारी दिशा निर्देशों का हवाला दिया. हंगामे के बीच ही विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने व्यापक जनहित में 26 मार्च तक सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा कर दी. दिलचस्प यह है कि 26 मार्च को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होना है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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