जम्मू-कश्मीर की डोमेसाइल नीति पर उमर अब्दुल्ला ने उठाए सवाल

Samachar Jagat | Friday, 03 Apr 2020 08:54:18 AM
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कोरोना वायरस की दहशत के बीच एक खबर लोगों तक ठीक से नहीं पहुंच पाई. मीडिया में यह खबर तबलीगी जमात और मरकज के शोर में गुम हो गई या गुम कर दी गई. केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर की डोमेसाइल नीति में बदलाव कर डाला है और अब पंद्रह साल तक राज्य में रहने वाला भी जम्मू-कश्मीर का निवासी होगा और उसे मूल निवासी की तरह ही सुविधा मिलेगी. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर की नई डोमिसाइल नीति को पर केंद्र की आलोचना की. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह पहले से पीड़ित लोगों का अपमान है, क्योंकि वादे के मुताबिक कोई संरक्षण नहीं दिया जा रहा है. उमर ने सिलसिलेवार ट्वीट में किया और कहा कि जब हमारे सभी प्रयास और पूरा ध्यान 'कोविड-19' के संक्रमण को फैलने से रोकने पर होना चाहिए, तब सरकार जम्मू कश्मीर में नया डोमिसाइल कानून लेकर आई है. जब हम देखते हैं कि ऐसा कोई भी संरक्षण कानून से नहीं मिल रहा है, जिसका वादा किया गया था, तब यह पहले से लगी चोट को और गंभीर कर देता है.

उमर ने कहा कि नया कानून इतना खोखला है कि दिल्ली से संरक्षित नेता भी इसकी आलोचना करने के लिए मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि नए कानून के खोखलेपन की कल्पना इसी तथ्य से की जा सकती है कि दिल्ली के इशारे पर बनी नई पार्टी के वे नेता भी इसकी आलोचना करने पर मजबूर हैं, जो इस कानून के लिए दिल्ली में लॉबिंग कर रहे थे. उमर का इशारा जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के संस्थापक अल्ताफ बुखारी के अधिवास कानून की आलोचना करने की तरफ था. सरकार ने बुधवार को एक गजट अधिसूचना जारी कर जम्मू कश्मीर के 138 अधिनियमों में कुछ संशोधन करने की घोषणा की. इनमें ग्रुप-चार तक की नौकरियां सिर्फ केंद्र शासित प्रदेश के मूल निवासियों के लिए संरक्षित रखना भी शामिल है.

जेकेएपी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने आरोप लगाया कि केंद्र शासित प्रदेश में अधिवास कानून पर बुधवार को जारी केंद्र का आदेश पूर्ववर्ती राज्य के लोगों की आंखों में धूल झोंकने की कवायद के अलावा और कुछ नहीं है. बुखारी ने कहा कि यह संसद का बनाया कानून नहीं है, बल्कि सरकार का जारी आदेश है इसलिए जम्मू कश्मीर के लिए डोमेसाइल कानून के संबंध में नई राजपत्रित अधिसूचना को न्यायिक समीक्षा से छूट नहीं है. उन्होंने कहा कि एक ओर जहां जेकेएपी जम्मू कश्मीर के लोगों को जमीन और नौकरी के अधिकार के लिए मांग करती रही है, तो केंद्र सरकार का जारी आदेश इस बात का परिचायक है कि यह राज्य के लोगों की महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखे बिना, नौकरशाही के स्तर पर किया गया आकस्मिक फैसला है.

इस बीच उमर अब्दुल्ला ने अपनी लंबी दाढ़ी ट्रिम करवा ली है. अब वे नए लुक में नजर आ रहे हैं. बुधवार को ली गई तस्वीरों में उमर अब्दुल्ला की दाढ़ी छोटी दिख रही है. कुर्ता-पायजमा पहने और चश्मा लगाए वे अपने समर्थकों के साथ बाहर निकलते दिख रहे हैं. उमर अब्दुल्ला को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद नजरबंद कर दिया था. उन्हें पिछले 24 मार्च को लगभग आठ महीने के बाद रिहा किया गया था. नजरबंद रहने के दौरान उमर अब्दुल्ला ने अपने दाढ़ी बढ़ा ली थी. नजरबंदी से बाहर आने के बाद उनके समर्थकों ने उनसे अपील की थी कि वे अपनी दाढ़ी कटवा लें. इसके बाद उमर अब्दुल्ला नए गेटअप में नजर आए हैं.

उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की जम्मू-कश्मीर के लिए जारी नई डोमिसाइल नीति की आलोचना की है. इस नीति के तहत इस केंद्र शासित प्रदेश की चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों को वहां के स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित किया गया है. उमर अब्दुल्ला ने इस फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठाया. उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करते हुए लिखा कि फैसले की टाइमिंग पर संदेह है, एक ऐसा वक्त जब हमारी सारी ताकत कोविड-19 के संक्रमण को रोकने में लगी हुई है, सरकार जम्मू-कश्मीर के लिए नया डोमिसाइल नीति लेकर आती है. यह जख्म पर नमक छिड़कने जैसा है, जब हम देखते हैं कि कानून के तहत पहले से वादा किया गया किसी तरह की सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है. अपने अगले ट्वीट में उन्होंने कहा है कि आप कल्पना कर सकते हैं कि ये कानून कितना खोखला है कि क्योंकि जिस दिल्ली के आशीर्वाद से जम्मू-कश्मीर में नई पार्टी का गठन हुआ था, उसके कर्ता-धर्ता भी इस नीति की आलोचना कर रहे हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विशलेषण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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