कोरोना वायरस के खतरे के बीच ही पुष्पम प्रिया की सियासी चाल

Samachar Jagat | Thursday, 02 Apr 2020 01:12:30 PM
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कोरोना वायरस की दहशत ने सारी सियासी सरगर्मियों पर भी विराम लगा दिया है. हालांकि कोरोना से बिहार सरकार निपटने की जिस तरह कोशिश कर रही है उससे नीतीश कुमार सवालों में हैं. विपक्ष इसलिए केंद्र पर भी सवाल उठा रहा है और नीतीश कुमार पर भी. लेकिन कोरोना वायरस की दहशत के बीच ही पुष्पम प्रिया चौधरी अपनी सियासी गतिविधियों को बनाए हुए हैं. सियासी फ्रंट पर यह काम वह सोशल मीडिया पर कर रही हैं. उन्होंने फेसबुक पर अलग-अलग जिलों के पेज बनाया है और उन जिलों की समस्याओं को लेकर बातचीत कर रही हैं. बातचीत के दौरान ही वे बिहार सरकार पर हमले भी कर रहीं हैं. हालांकि दिक्कत यह है कि वह यह काम अंग्रेजी में कर रहीं हैं. ठीक है वे लंदन में थीं, उनकी अंग्रेजी अच्छी है लेकिन बिहार में काम करने के लिए उन्हें हिंदी या स्थानीय बोलियों का इस्तेमाल ज्यादा करना होगा.

बिहार को बदलने के लिए वे मुख्यमंत्री पद की स्वघोषित उम्मीदवार हैं. कोरोना के पैर पसारने से पहलि ही पुष्पम प्रिया चौधरी बिहार पहुंचीं थीं और उन्होंने अपने सियासी अभियान की शुरूआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से की . नालंदा के किसान सुमंत कुमार को बिहार का रोल माडल बतलाने वाली पुष्पम ने अपने फेस बुक पर लिखा कि सुमंत कुमार जैसे कृषक बिहार की कृषि व्यवस्था के इतिहास और भूगोल को बदलेगें.

पहले अखबारों में बड़े -बड़े विज्ञापन और फिर नालंदा में धूम्रकेतु की तरह खुद के पेश करने पहुंचीं पुष्पम प्रिया ने 13 मार्च की रात पूर्व आईआरएस अधिकारी अनुपम सुमन को पत्र क्यों लिखा और उसे सोशल मीडिया पर जारी करने की जरूरत क्यों समझी, यह सवाल भी उठ रहे हैं. क्या यह सब कुछ सोची समझी रणनीति की तरह हो रही है या फिर नीतीश के खिलाफ शतरंज की बिसात बहुत पहले ही बिछा दी गई थी और प्रियंका केवल मोहरा मात्र है यह ऐसे सवाल हैं जो बिहार के सियासी गलियारे में गूंज रहा है. भले ही इस मामले पर रहस्य पड़ा है लेकिन इतना तो तय है कि यह सब एक सोची समझी रणनीति के तहत हो रहा है.

बिहार के सहरसा जिला स्कूल से मैट्रिक करने वाले अनुपम सुमन की लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स में पोलिटिकल सांइंस में ग्रेजुएट होने के सफर को देखेंगे तो इसके साफ संकेत मिलते हैं. अनुपम और प्रियंका दोनों का मनचाहा विषय राजनीति शास्त्र है और इसी वजह से अपने डिग्री का उपयोग करने के लिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा है. इसके बाद अनुपम सुमन के फेसबुक पर सब कुछ इसी तरीके से रखा गया, 2004 से 2019 के सिविल सर्विस की सेवा के दौरान और उसके बाद अनुपम ने जिस तरीके से पटना नगर निगम के प्रशासक के पद से इस्तीफा दिया यह सब सामान्य घटना नहीं थी. अपने इस्तीफे में सिस्टम को कटघरे में खडा़ करना उसकी बानगी है.

सात फरवरी को शतरंज की बिसात पर अपने फेसबुक पर डालकर युद्ध और ज्ञान का खेल चालू करने की बात कही है तो 12 फरवरी को लिखा कि ‘होईहे सोहि जो राम रचि राखा’. यानि रणनीति का संकेत उन्होनें पहले ही दे दिया है. यानी सब कुछ अपनी सोची हुई चाल के तहत पुष्पम प्रिया और अनुपम ने अभियान की शुरूआत नालंदा से की है. लेकिन उनके राडार पर बिहार के वैसे 50 विधानसभा क्षेत्र है जिनमें शहरी मतदाताओं की संख्या अधिक है. नीतीश, सुशील मोदी और खासकर भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं, जहां पढे लिखे लोगों की जमात ज्यादा है और प्रियंका और अनुपम की आईटी टीम उसे बेहतर तरीके से समझाने में कामयाब हो सकती है. इस पर सबसे पहले फोकस है. दूसरा बिहार की आर्थिक रीढ़ कृषि पर निर्भर है और नालंदा उसका माडल है. इसलिए कृषि के साथ ही नालंदा माडल को भी उन्होनें चुना है. इस माडल को चुनने के पहले प्रियंका ने अपना ओडियो टेप भी जारी किया है और कहा है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, यानी कोशिशे कामयाब होती हैं. अब देखना है यह शतरंज की बिसात कितनी कामयाब होती है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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