बिहार में आधी-अधूरी तैयारी के साथ लड़ी जा रही है कोरोना से जंग

Samachar Jagat | Sunday, 05 Apr 2020 12:23:35 PM
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कोरोना संक्रमण रोकने को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन है. बिहार से पलायन कर दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी की तलाश में गए कामगारों के सामने संकट है. जेब में पैसा नहीं और हाथ में रोजगार नहीं. रहने खाने की दिक्कत ने उन्हें बिहार की तरफ पलायन के लिए मजबूर किया. लाखों की तादाद में मजदूर पैदल ही अपने-अपने घरों के लिए पैदल ही निकल पड़े. सड़कों पर अफरातफरी पसरी थी. सोशल डिस्टेंसिंग फेल हो गई थी. बस एक ही जनून था, जल्द से जल्द अपने-अपने घर पहुंचने का. बिहार सरकार के आंकड़ों पर यकीन करें तो एक लाख 80 हजार से ज्यादा लोग बिहार आ चुके हैं. लेकिन हकीकत यही है कि यह संख्या दो लाख के पार है. सरकार ने दावा किया था कि बाहर से आने वाले कामगारों को सीमा पर ही क्वारेंटाइन में रखा जाएगा. लेकिन सरकार के सारे दावे धरे रह गए. न इंतजाम ने क्वारेंटाइन केंद्र. सारा काम कागजों पर ही. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कलई खुद उनके इंतजामों ने ही खोल कर रख दी.

इसलिए आपदा प्रबंधन विभाग भी मानने लगा है कि राहत शिविरों में छब्बीस हजार लोग हीं रह रहे हैं. आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से बताया गया कि सूबे के तीन हजार स्कूलों में सिर्फ 26000 हजार लोगों को रखा गया है. विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के मुताबिक ये सभी दूसरे राज्यों से आए हुए लोग हैं जिन्हें ठहराया गया है. सभी को भोजन और आवासन की सुविधा दी जा रही है. आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव ने बताया कि जो लोग भी देश के दूसरे राज्यों से बिहार आए हैं उन सभी की स्क्रीनिंग और जांच की कार्रवाई फिर की जाएगी. यह बयान ही सरकार की तैयारी पर सवाल खड़े करती है.

सरकार के आदेश के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने पंचायतों में इस तरह की व्यवस्था भी की थी. पंचायत भवन व अन्य स्कूलों में कोरेंटाइन केंद्र बनाए गए. ज्यादा कागजों पर तो कुछ धरातल पर बनाए गए. ताकि परदेस से लाए गए मजदूरों को चौदह दिनों तक कोरेंटाइम में रखा जाए. लेकिन अधिकांश जगहों पर लोग कोरेंटाइन केंद्र में नहीं रह रहे. जो लोग भी बाहर से आए हैं वे बस से उतरे और घर चले गए. सरकार की तरफ से दावा किया जा रहा है कि 26 हजार लोगों को हम भोजन और आवासन की सुविधा दे रहे हैं. इसे लेकर भी कहा जा रहा है कि ऐसा नहीं है. सीमा से सटे गांव में रहने वाले लोग जो एकांतवास मे हैं, उनका भोजन घर से ही बन कर आ रहा है.

इसलिए अब दूसरे राज्यों से बिहार आए बिहारियों की फिर स्क्रीनिंग का काम शुरू किया गया है. बाहर से आने वाले लोगों की तादाद लाखों में है. सरकार ने यह फैसला सरकार कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए लिया है. स्क्रीनिंग का काम छह दिन में पूरा कर लिया जाएगा. यह स्क्रीनिंग उनलोगों की होगी जो 22 मार्च के बाद बिहार आए है. सरकार ऐसी किसी भी गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर देना चाहती है जो कोरोना वायरस को कम्युनिटी इंफेक्शन तक विस्तारित करे. ऐसे किसी खतरे से पहले ही सरकार सतर्क है और ऐहतियातन यह जांच कराया जाएगा.

स्क्रीनिंग सबसे पहले मुंबई से आने वाले लोगों की होगी. क्योंकि यह हाई रिस्क वाला एरिया है. उसके बाद केरल, तमिलनाडु और दिल्ली से आए लोगों की स्क्रीनिंग होगी. मुख्य सचिव ने सभी जिलों के डीएम के साथ दोबारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर ऐसे निर्देश दिए हैं. लॉकडाइन के बाद दूसरे राज्यों में रहने वाले लाखों बिहार के लोग बिहार आए है. बाहर से आने वालों में दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के लोगों की संख्या अधिक है, जो लॉकडाउन में गाड़ी नहीं मिलने पर पैदल ही चल दिए थे. बाहर से आने वाले लोगों की आने के दौरान ही स्क्रीनिंग हुई थी. लेकिन एक बार फिर किया जाएगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विशलेषण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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