सुप्रीम कोर्ट का सीएए पर रोक लगाने से इनकार, पांच जजों की बेंच लेगी फैसला

Samachar Jagat | Thursday, 23 Jan 2020 03:22:52 PM
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से फिलहाल केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है. देश भर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे आंदोलन से परेशान केंद्र सरकार को महीने भर का समय तो मिल ही गया है. फिलहाल तो अदालत ने इस कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है लेकिन चार हफ्ते बाद कोर्ट का आदेश क्या आता है, यह देखना बाकी है. हालांकि अदालत की आज की टिप्पणी कई सामाजिक संगठनों को पसंद नहीं आई है. सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 140 से ज्यादा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई हुई. लेकिन सीएए पर फिलहाल रोक से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पांच जजों की संविधान पीठ ही अंतरिम राहत दे सकती है.

केंद्र सरकार को नई याचिकाओं पर चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा गया है. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर हाईकोर्ट की सुनवाई पर भी रोक लगा दी है. असम और त्रिपुरा के मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने अलग किया. सुनवाई शुरू होने से पहले कोर्ट नंबर एक खचाखच भरा था, जिसकी वजह से कोर्ट के तीनों दरवाज़े खोलने पड़े है. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ को मामले की सुनवाई में भीड़ की वजह से परेशानी भी हुई. अटार्नी जनरल ने कहा कि वकील अंदर नहीं आ पा रहे हैं. शांतिपूर्वक माहौल होना चाहिए. कुछ किया जाना चाहिए. तब कपिल सिब्बल ने कहा कि ये देश की सबसे बडी अदालत है. इस पर सीजेआई ने सुरक्षाकर्मियों को बुलाया. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े ने कहा, हमे बार एसोसिएशन के साथ बात करनी चाहिए.

अटॉर्नी जनरल ने बताया कि आज 144 याचिकाएं लगी हैं. तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी को कोर्ट में आने की क्या जरूरत, लेकिन सभी पक्षों के साथ बैठक करेंगे. लोग अपना सुझाव दे सकते हैं. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कुल मिलाकर 140 से ज्यादा याचिकाएं हैं. हमें हलफनामा भी दाखिल करना है. अटॉर्नी जनरल ने कहा, अभी प्रारंभिक हलफनामा दे रहे हैं. केंद्र को 60 याचिकाएं मिली हैं. कपिल सिब्बल ने कहा कि पहले ये तय हो कि इसे संविधान पीठ भेजा जाना है या नहीं. हम रोक नहीं मांग रहे लेकिन इस प्रक्रिया को तीन हफ्ते के लिए टाला जा सकता है.

मनु सिंघवी ने कहा कि नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. यूपी में तीस हजार लोग चुने गए हैं. फिर कपिल सिब्बल बोले कि इसी मुद्दे पर जल्द फरवरी में कोई तारीख सुनवाई के लिए तय हो. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने के लिए कह सकते हैं. हम एकपक्षीय तौर पर रोक नहीं लगा सकते. अटार्नी जनरल ने कहा कि अगर ये इस तरह रोक चाहते हैं तो अलग से याचिका दाखिल करें. याचिकाकर्ता ने कहा कि बंगाल और असम विशिष्ट राज्य हैं. सुनवाई आज ही शुरू हो. असम में बांग्लादेशियों का मुद्दा है. इनमें आधे बांग्लादेश से आने वाले हिंदू हैं और आधे मुसलिम. असम में चालीस लाख बांग्लादेशी हैं. इस कानून के तहत आधे ही लोगों को नागरिकता मिलेगी. ये पूरी डेमोग्राफी को बदल देगा. इसलिए सरकार को फिलहाल कदम उठाने से रोका जाना चाहिए.

तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमें सबरीमाला मामले की सुनवाई भी पूरी करनी है. ये अहम है कि क्या हमें 99 फीसद याचिकाकर्ताओं को सुनना चाहिए और इसके बाद आदेश जारी करना चाहिए. अगर केंद्र व कुछ की बात सुनकर हम आदेश जारी करते हैं तो बाकी याचिकाकर्ता कहेंगे कि हमारी बात नहीं सुनी गई. मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले को संविधान पीठ को भेजा जाना चाहिए. कपिल सिब्बल ने कहा कि तब तक दो महीने के लिए प्रक्रिया को स्थगित कर दिया जाए. इस पर अटार्नी जनरल ने विरोध किया और कहा कि ये स्टे होगा. मुख्य न्यायाधीश ने कहा ये केस संविधान पीठ को जा सकता है. हम रोक के मुद्दे पर बाद में सुनवाई करेंगे.

सरकार का पक्ष रखते हुए तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि आगे और याचिका दाखिल करने पर रोक लगाई जानी चाहिए. एक दूसरे वकील ने कहा कि अगर एक बार एनपीआर में किसी को संदेहजनक बताया गया तो उसका नाम वोटर लिस्ट से कट जाएगा. अल्पसंख्यकों की यह बड़ी चिंता है. कपिल सिब्बल ने कहा कि यह बड़ी चिंता वाली बात भी है. सुप्रीम कोर्ट ने असम से संबंधित याचिकाओं पर जवाब देने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया. राजीव धवन ने कहा कि कानून ने असम को अलग कर दिया है. इस पर सीजेआई ने कहा कि यह अच्छा प्वाइंट है. मनु सिंघवी का कहना था कि यूपी में 19 जिलों में 40 लाख लोगों को संदेहजनक बताकर वैरिफाई करने की प्रक्रिया चल रही है. क्या ये लोगों में डर पैदा करने के लिए काफी नहीं है, जो प्रक्रिया 70 सालों में नहीं हुई तो क्या उसे मार्च तक टाला नहीं जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों में केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा. केंद्र ने चार हफ्ते मांगे, जिस पर याचिकाकर्ताओं ने विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असम और त्रिपुरा के केस अलग हैं. याचिकाकर्ता इनकी एक सूची दें. सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों में केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा. कोर्ट ने केंद्र को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अतंरिम राहत के लिए तीन जजों की बेंच आदेश नहीं दे सकती. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सिर्फ पांच जजों की संविधान पीठ ही अंतरिम राहत दे सकती है. मुख्य न्यायाधीश का कहना था कि इस मामले में छोटे-छोटे मुद्दों पर वकीलों से चेंबर में भी सुनवाई हो सकती है. इस पर केंद्र सरकार को राहत मिली. कपिल सिब्बल ने कहा कि इसलिए हम कह रहे हैं कि फिलहाल प्रक्रिया को टाला जाए. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई से रोक लगाई है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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