लोगों को जानना जरूरी है क्या होता है लॉकडाउन, लोगों को परेशान होने की नहीं है जरूरत

Samachar Jagat | Tuesday, 24 Mar 2020 06:47:36 AM
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कोरोना वायरस के खतरा बढ़ रहा है. बिहार में भी कोरोना वायरस से एक शख्स की मौत के बाद सरकार सकते में है. हालांकि अब उसने एहतियात के तौर पर कदम तो उठाए हैं. लेकिन जितनी गंभीरता सरकार को दिखानी चाहिए वह नहीं दिखी. हालांकि इसके लिए लोग भी जिम्मेदार हैं. सियासी दलों ने भी खतरें को देखते हुए अपने तमाम कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं. रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाह ने सबसे पहले सभी कार्यक्रम के स्थगित करने का एलान किया. उन्होंने लोगों से सरकार के बताए दिशा-निर्देशों के पालन की अपील भी लोगों से की है. खतरे को देखते हुए देश के तमाम बड़े शहरों को लॉकडाउन कर दिया गया है. बिहार सरकार ने भी लॉकडाउन की घोषणा की है. हालांकि लॉकडाउन से लोग घबरा गए है. अफवाहों ने इस परेशानी को और बढ़ाई है. लेकिन लोगों को परेशान होने की जरुरत नहीं है. सरकार लॉकडाउन के दौरान लोगों का पूरा ख्याल रखती है.



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भारत के अलावा डेनमार्क, इंग्लैंड, अमेरिका, अल सलवाडोर, फ्रांस, आयरलैंड, इटली, न्यूजीलैंड, पोलैंड और स्पेन में वहां की सरकार ने लॉकडाउन कर दिया है. कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने का अब तक कोई इलाज नहीं मिला है. इससे बचने का फ़िलहाल एक ही रास्ता है, वह है संक्रमि‍त व्यक्ति‍ से बचाव. जिस तेजी से लगातार संक्रमित व्यक्ति‍यों की तादाद बढ़ रही है, उसे देखते हुए बिहार सरकार ने लॉकडाउन का एलान किया ताकि लोग एक दूसरे से कम मिलें. सरकार के आदेश के बावजूद कुछ लोग इस का पालन नहीं कर रहे हैं. रविवार को बिहार में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और फ़िलहाल दो कोरोना पीड़ित मरीज पटना के हॉस्पिटल में दाखिल हैं. ऐसे में लॉकडाउन की व्यस्था लागू करने का ही विकल्प सरकार के पास बचा था. 

लॉकडाउन एक आपातकाल व्यवस्था है जो महामारी या किसी आपदा के वक्त शहर में सरकार लागू करती है. लॉकडाउन में लोगों को घरों से निकलने की अनुमति नहीं होती. उन्हें सिर्फ दवा या अनाज जैसी जरूरी चीजों के लिए बाहर आने की इजाजत मिलती है, या फिर बैंक से पैसा निकालने के लिए भी जा सकते हैं. शहर में रहने वाले स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य या दूसरे खतरों से बचाव के लिए इसे लागू किया जाता है. कोरोना संक्रमण के बढ़ते केसेस को देखते हुए इस व्यस्था को अपनाया जा रहा है. सरकार की बजाय इसे लोग खुद अपने पर लागू करते है. उदाहरण के लिए इटली के कई इलाकों में खुद ही लोगों ने अपने आपको घरों में कैद कर लिया था, ताकि कोरोना का संक्रमण उन तक न पहुंचे. वहीं जिन इलाकों में संक्रमित व्यक्ति‍ ज्यादा मिल जाते हैं, वहां भी लॉकडाउन लागू कर दिया जाता है.

कोरोना वायरस के कहर की वजह से कई देशों में पहले ही लॉकडाउन का आदेश जारी कर दिया गया है. चीन में ही सबसे पहले कोरोना वायरस संक्रमण का मामला सामने आया था, इसलिए सबसे पहले वहां लॉकडाउन किया गया. चीन की सरकार ने लोगों को एक तरह से लोगों को नजरबंद रहने के लिए कहा था. इटली में भी बिगड़ती हुई स्थिति को देखते हुए वहां की सरकार ने भी लॉकडाउन का आदेश जारी किया है. इटली की हालत दिन प्रति दिन ख़राब होती जा रही है. वहां कोरोना की वजह से मरने वालों की तादाद काफी बढ़ गई है. इटली के प्रधानमंत्री ने पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया है. बाद में स्पेन और फ्रांस ने भी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लॉक डाउन का आदेश जारी कर दिया. अमेरिका में जब वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादी हमला हुआ था, तब भी लॉकडाउन किया गया था. तत्कालीन अमेरिकी सरकार ने उस वक्त तीन दिन का लॉकडाउन किया था. दिसंबर 2005 में न्यू साउथ वेल्स की पुलिस फोर्स ने दंगा रोकने के लिए लॉकडाउन किया था. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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