मुजफ्फरपुर कांडः न मूंछ वाले अंकल को खोज पाई सीबीआई, न तोंद वाले अंकल का पता चला

Samachar Jagat | Thursday, 23 Jan 2020 03:22:41 PM
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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में दिल्ली के साकेत कोर्ट ने मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर सहित उन्नीस आरोपियों को दोषी करार दिया है. सजा का एलान 28 जनवरी को होगा. बिहार में हुए इस जघन्य बलात्कार कांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था, सिर्फ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को छोड़ कर. शेल्टर होम में 34 बच्चियों के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई थी. लेकिन इतने बच्चियों के साथ बलात्कार के बाद भी नीतीश कुमार की अंतरात्मा नहीं जागी थी. बल्कि उनकी पुलिस ने तो दोषियों को बचाने की पूरी कोशिश की क्योंकि ब्रजेश ठाकुर के ऊंचे रसूख थे और नीतीश कुमार से भी उनका याराना था. ब्रजेश ठाकुर पेशे से पत्रकार थे और वे कई समितियों में भी शामिल थे और सरकार उन्हें हर साल करोड़ों का फंड मुहैया कराती थी. देश भर में इसे लेकर प्रदर्शन हुआ. इसकी गूंज विदेशों तक में सुनाई दी थी. दिल्ली में बच्चियों को इंसाफ दिलाने के लिए लगातार प्रदर्शन हुए. बिहार में भी महिलाएं सड़क पर उतरीं थीं. लेकिन नीतीश कुमार ने इस सामुहिक बलात्कार कांड पर एक भी शब्द आज तक नहीं कहा है.

नीतीश कुमार की मंत्री मंजू वर्मा का नाम भी इस मामले में आया था लेकिन नीतीश कुमार की अंतरात्मा अदालत के दखल के बाद जागी और मंजू वर्मा का इस्तीफा लेना पड़ा नहीं तो महीनों तक वे उनका बचाव करते रहे थे. नीतीश कुमार की पुलिस ने तो दोषियों के खिलाफ पाक्सो की धारा तक नहीं लगाई थी, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट में मामला नहीं जाता तो सारे दोषी तो बच ही जाते लेकिन पटना की पत्रकार और ऐक्टिविस्ट निवेदिता झा इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गईं, तब सारा मामला सामने आया और सीबीआई की जांच हुई. हालांकि सीबीआई जांच पर सवाल भी उठे. दो बच्चियां गायब हो गईं और उनकी हत्या की बात सामने आई थी लेकिन सीबीआई ने इस पर अनुसंधान नहीं किया. फिर बच्चियों ने मूंछ और तोंद वाले अंकल की बात की थी, सीबीआई उन्हें भी नहीं तलाश पाई. कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के रसूखदार मंत्रियों व नेताओं को सीबीआई ने साफ बचा लिया.

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम का मामला उजागर होने के बाद बिहार सहित पूरे देश में सुर्खियों में रहा था. लड़कियों के साथ हुई हैवानियत को सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं थीं. ब्रजेश ठाकुर के अल्पावास गृह में बच्चियों को मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी जाती थीं. लड़कियों ने जो आपबीती बताई, उसे सुन कर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए. सात साल की बच्ची तक को दरिंदों ने नहीं छोड़ा था. अपने साथ हुई हैवानियत की घटना पर वह बच्ची बोल तक नहीं पा रही थी. मामला सामने आने के बाद पटना के पीएमसीएच में लड़कियों की जांच कराई गई थी. तब यह बात सामने आई थी कि बच्चियों के साथ दुष्कर्म के साथ-साथ मारपीट भी की गई थी. डाक्टरों ने जांच में यह भी पाया था कि नशे का इंजेक्शन देकर आरोपी बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया करते थे. कई लड़कियों के शरीर पर जलने से हुए जख्मों के निशान भी थे.

इसी शेल्टर होम की ही एक लड़की ने आरोप लगाया था कि उनकी एक साथी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और उसे परिसर में दफन कर दिया गया था. जिसके बाद परिसर की खुदाई भी की गई थी लेकिन कोई सबूत नहीं मिला. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की टीम ने इस शेल्टर होम की लड़कियों से बातचीत की थी. टिस की रिपोर्ट से ही यह घिनौना सच सामने आया था. कहा तो यह भी गया कि काफी दिनों तक इस रिपोर्ट को दबा दिया गया था, महीनों बाद रिपोर्ट सामने आई तो उसने बिहार ही नहीं देश के लोगों का दिल दहला दिया था. लड़कियों ने जो कुछ बताया था, उसके बाद पुलिस हरकत में आई जरूर लेकिन तफ्तीश धीमा ही चलता रहा. लेकिन फिर पुलिस पर दबाव पड़ा तो वह हरकत में आई और शेल्टर होम की जांच के बाद सबूत मिले तो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.

मुजफ्फरपुर की घटना ने प्रशासनिक अमले के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी भूंचाल ला दिया था. कई सफेदपोश नेताओं के नाम सामने आए. कइयों के नाम छुपा लिए गए. सरकार बेशर्मी की तरह इस पर अपना बचाव करती रही. शेलटर होम की लड़कियों ने जो बताया उससे साफ है कि यहां सरकार की संरक्षण में जिस्म का सौदा होता था और बच्चियों का शोषण होता था. लड़कियों के मुताबिक शेल्टर होम में बाहरी लोग भी आते थे और उनके साथ जोर-जबर्दस्ती करते थे. उन्हें शेल्टर होम के बाहर भी ले जाया जाता था. कुछ लड़कियों ने यह भी बताया था कि मूंछ वाले अंकल और तोंद वाले अंकल आते थे और हमारे साथ गंदा काम करते थे. लेकिन पी चिदंबरम को दीवार फांद कर गिरफ्तार करने वाली सीबीआई न तो तोंद वाले अंकल को तलाश पाए और न ही मूंछ वाले अंकल उसे मिले. कहा जा रहा है कि इनका ताल्लुक सत्ताधारी दलों से है इसलिए सरकार के दबाव में सीबीआई ने अपना खेल खेला. मुजफ्फरपुर के भाजपा विधायक और बिहार सरकार के मंत्री सुरेश शर्मा पर भी आरोप लगा था.

मुजफ्फरपुर की तत्कालीन एसएसपी हरप्रीत कौर का कहना था कि इस नारी निकेतन में चालीस से ज्यादा लड़कियां थीं और मेडिकल रिपोर्ट बताती हैं कि उनमें से आधे से ज्यादा के साथ कभी न कभी यौन संबंध बनाए गए. मुजफ्फरपुर स्थित शेल्टर होम का नाम 'बालिका गृह' था जो कि ब्रजेश ठाकुर के एक एनजीओ सेवा संकल्प व विकास समिति की ओर से चलाया जा रहा था और इसे बिहार सरकार से मदद मिलती थी. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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