तो ज्योतिरादित्य की घर वापसी होगी, भगवा रंग में रंगेंगे सिंधिया

Samachar Jagat | Wednesday, 11 Mar 2020 11:18:25 AM
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मध्यप्रदेश में सियासी उथल-पुथल मची है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आखिरकार कांग्रेस से इस्तीफा दे ही दिया. कई महीनों से उनके भाजपा में जाने की खबरें आ रहीं थीं. बीच में उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से कांग्रेस से जुड़े होने के सारे प्रोफाइल को डिलिट कर दिया था और सिर्फ अपने नाम के साथ समाजसेवी और क्रिकेटर लिख कर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे. वे समय का इंतजार कर रहे थे. माना जा रहा है कि भाजपा में वे शामिल होंगे. भाजपा ने इसे घर वापसी बताया है. लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ते ही उनके पूर्वजों का इतिहास खंगाला जाने लगा और अंग्रेजों के साथ पूर्वजों के संबंधों की पड़ताल की जाने लगी. बहरहाल यह कहानी फिर सही.

ज्योतिरादित्य सिधिया ने कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया. उनके मंगलवार को भाजपा में शामिल होने के क़यास लगाए जा रहे थे. लेकिन बाद में ख़बर आई कि सिंधिया बुधवार को भाजपा का दामन थाम सकते हैं. इन सबके बीच कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल हैं क्योंकि सरकार के साथ रहे 21 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है. माना जा रहा है कि इनमें ज़्यादातर ज्योतिरादित्य सिंधिया के क़रीबी हैं. दिल्ली से भोपाल तक बैठकों का भी दौर जारी है. दिल्ली में भाजपा चुनाव समिति की बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा शामिल हुए. चुनाव समिति की बैठक ख़त्म हो चुकी है. होली के दिन बगावत की शुरुआत सुबह साढ़े दस बजे के आसपास हुई जब वे अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री मोदी से मिलने गए. दोनों अमित शाह की गाड़ी में साथ दिखे.

सिंधिया ने फिर अपने इस्तीफ़े को जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वे कांग्रेस में रहकर अपने प्रदेश और देश की सेवा नहीं कर सकते हैं. कुछ देर बाद ही कांग्रेस की प्रमुख सोनिया गांधी ने सिंधिया को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निकाल दिया. सारा विवाद मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर बढ़ा. कांग्रेस की एक सीट पर तो जीत एकदम पक्की है लेकिन दूसरी के लिए उसे बाहर के दो विधायकों की ज़रूरत थी. कहा जा रहा है कि सिंधिया वह सीट चाहते थे जो एकदम पक्की है और जिसे दिग्विजय सिंह के लिए रखा गया है.

मध्यप्रदेश में सियासी घमासान के बीच कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह का बड़ा बयान आया. मुख्यमंत्री हाउस पहुंचे लक्ष्मण सिंह ने कहा कि अब विपक्ष में बैठने की तैयारी करनी चाहिए. मजबूती के साथ लड़ेंगे और जनता की आवाज उठाएंगे. जनता से कहेंगे पांच साल का अवसर मिलना था लेकिन नहीं मिला. लेकिन एक बार फिर मौका दें. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथियों से कहना है कि एकजुट होकर मजबूती से उभरें. क्यों हुआ, कैसे हुआ अब इस पर चर्चा करना उचित नहीं है. सिंधिया भाजपा में जा रहे हैं. उन पर कुछ नहीं कहना.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद मध्य प्रदेश के छह मंत्रियों सहित बीस विधायकों ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल को खत लिखकर छह मंत्रियों को हटाने के लिए कहा है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को आखिरकार कांग्रेस छोड़ दी जिसके साथ ही मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार पर संकट गहरा गया है. हालांकि, कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से सिंधिया को निष्कासित किया गया है. इसके साथ ही छह मंत्रियों सहित 19 कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. ऐसी स्थिति में कमलनाथ सरकार के अल्पमत में आ गई है. राज्य में कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं और उसे चार निर्दलीय, बसपा के दो और समाजवादी पार्टी के एक विधायक का समर्थन हासिल है. भाजपा के 107 विधायक हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सिंधिया ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिये अपने इस्तीफे की घोषणा की. उन्होंने जो त्यागपत्र साझा किया है उस पर नौ मार्च की तारीख है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे त्यागपत्र में सिंधिया ने कहा कि अपने राज्य और देश के लोगों की सेवा करना मेरा हमेशा से मकसद रहा है. मैं इस पार्टी में रहकर अब यह करने में अक्षम में हूं. उधर, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण सिंधिया को तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने को स्वीकृति प्रदान की. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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