अमित शाह की चुनौती का जवाब इमारत शरीया ने डंके की चोट पर दिया, नहीं लागू होने देंगे सीएए

Samachar Jagat | Thursday, 23 Jan 2020 03:22:49 PM
2368872415667603

गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में डंके की चोट पर कहा था कि विपक्ष जितना भी विरोध करे सीएए वापस नहीं होगा. तो डंके की चोट पर बिहार में एलान हुआ कि सरकार चाहे जो भी कर ले देश में सीएए और एनआरसी लागू नहीं होने देंगे. इमारत शरिया में धर्मनिरपेक्ष दलों और सामाजिक संगठनों की बैठक में आमराय से यह फैसला लिया गया. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीयत पर भी सवाल उठे और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दोरंगी नीति पर भी. इन सबके बाद एक बात यह तय हुई कि देश को बचाने के लिए साझा लड़ाई लड़ी जाएगी और यह लड़ाई इमारत शरीया की निगरानी में लड़ी जाएगी. सीएए और एनपीए से जुड़े मुद्दे पर कई प्रस्ताव भी पास हुए, जिनमें साफ कहा गया कि हम मिल कर इसके खिलाफ लड़ेंगे. इमारत शरीया में हुई बैठक में इस बात का संकल्प दोहराया गया कि देश को तोड़ने की साजिश एक चुनी हुई सरकार कर रही है और हम ऐसा नहीं करने देंगे. आम राय से यह बात भी सामने आई कि यह कानून सिर्फ मुसलमानों को परेशान करने वाला नहीं है, बल्कि इसके निशाने पर देश की बहुसंख्यक दलित और पिछड़ी आबादी है. बैठक के बाद मौलाना वली रहमानी ने पेश किए गए प्रस्ताव की जानकारी दी. साझे प्रेस कांफ्रेंस में इस बात का एलान भी हुआ कि जल्द ही एक और बैठक बुला कर आगे की रणनीति तय की जाएगी.

इमारत शरीया मुसलमानों का मजहबी इदारा है और शरीयत के कानून से जुड़े मसलों को सुलझाने में लंबे अरसे से यह इदारा काम कर रहा है. देश ही नहीं दुनिया के मुसलमानों में इस इदारे की पैठ है. लेकिन सियासी तौर पर भी इस इदारे का अपना असर और रसूख बिहार और पूरे देश में है. एनसीआर के मुद्दे पर यूं तो चुपचाप संस्था बिहार में काम कर रही थी, लेकिन अब एनपीआर, सीएए और एनआरसी के सवाल पर इमारत शरिया खुल कर सामने आ गई है. उसने अपना रुख साफ कर दिया है कि वह सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेगी. इसी मकसद के तहत उसने फुलवारी शरीफ स्थित अपने मुख्यालय में सर्वदलीय बैठक की. बैठक में महागठबंधन और वाम दलों के अलावा कई और सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लिया. बैठक में अमीर-ए-शरीयत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी की अध्यक्षता में हुई.

बैठक में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, हम के प्रमुख जीतनराम मांझी, कांग्रेस विधायक सदानंद सिंह, विधानसभा के पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी, जन अधिकार पार्टी के पप्पू यादव, भाकपा के सत्यनारयण सिंह, भाकपा माले के धीरेंद्र झा सहित कई और दलों व सामाजिक संगठनों के नुमाइंदे मौजूद थे. बैठक में एकजुट हो कर सीएए, एनआरसी और एनपीआर का विरोध किया और कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारतीय संविधान की आत्मा और उसकी बुनियादी धाराओं के खिलाफ है. संविधान की धारा 14 और 15 में भारत के सभी नागरिकों को बराबर अधिकार दिये गए हैं और उसमें धर्म के आधार पर किसी विभाजन और भेद भाव को सही नहीं करार दिया गया है.

नागरिक्ता संशोधन कानून में बिना किसी दस्तावेज़ के गैरकानूनी तौर पर आने वाले हिन्दू, सिख , बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने की बात की गई है. इससे केवल मुसलमानों को अलग रखा गया है जो सरासर धर्म के आधार पर विभाजन और भेदभाव है. इस लिए केंद्र सरकार से हमारी मांग है कि वह तुरंत इस कानून को वापस ले. दूसरी बात यह है कि सरकार ने इस कानून मे धार्मिक आधार पर प्रताड़ना को आधार बनाया है अगर यह बात सही है और प्रताड़ना ही आधार है तो सिर्फ पाकिस्तान, बंगलादेश और अफगानिस्तान ही नहीं है बल्कि नेपाल, श्रीलंका, तिब्बत, चीन और मयांमार वगैरह भी हैं जहां से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होने वालों ने पलायन किया है कानून में उन का भी उल्लेख होना चाहिए. श्रीलंका में हजारों की संख्या में तमिल प्रताड़ित हुए हैं मायांमार में रोहंगिया मुसलमानों को धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया गया.

बैठक में एनपीआर को चोर दरवाजे से एनआरसी लाने की कोशिश बताया गया और सरकार के तानाशाह रवैये की भी बात हुई. बैठक में साझा रणनीति पर जोर दिया गया और यह बात तय पाई कि प्रमुख दलों के नुमाइंदे दो-चार दिन में फिर बैठें और एक समन्वय समिति बना कर आगे की रणनीति तय करें. बैठक में प्रस्ताव पास कर कहा गया कि केंद्र सरकार की ओर से बार बार यह कहना कि यह कानून नागरिकता देने का कानून है नागरिकता छीनने का कानून नहीं है. यह सरासर धोका है क्यूंकि सीएए को एनआरसी से जोड़ कर देखने की जरूरत है. केंद्र सरकार का कहना है कि जो लोग कागज से अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सकेंगे उन्हें सरकार प्रताड़ित करेगी. इस में सिर्फ मुसलमान नहीं फसेंगे बल्कि सभी कमजोर, दलित, आदिवासी, पिछड़े, अनपढ़, गरीब किसान मजदूर, अनुसूचित जाति और जनजाति, बेघर , रास्तों और सड़कों के किनारे गुज़रा करने वाले अनाथ व बेसहारा लोग, आश्रमों में रहने वाली विधवा माता बहनें इस कानून के चपेट में आएंगे.

वे लोग जो रोजाना कमाते खाते हैं और जिन के लिए बाप दादा के जन्म का सबूत लाना असंभव है ऐसे लोगों से उन की नागरिकता छीन कर उन के बुनियादी हक से महरूम करना, उन के वोट के अधिकार को खत्म करना और उन के जातिगत आरक्षण को समाप्त कर देना इस कानून का मकसद है. इस लिए हम इस कानून को पूरी तरह रद्द करते हैं और एलान करते हैं कि हम किसी भी हाल में सीएए, एनपीआर और एनआरसी को कबूल नहीं करेंगे. प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि सभी राजनीतिक पार्टियां अपने सभी कार्यकर्ताओं, जिला, प्रखंड व पंचायत स्तर के जिम्मेदारों से अपील करती हैं कि वे अपनी पार्टी की ओर से प्रदर्शन में हिस्सा लें और इस कानून के खिलाफ तब तक आंदोलन जारी रखें जब तक कि इस कानून को सरकार वापस न ले ले.

साथ ही बिहार सरकार से मांग की गई कि सरकार राज्य में एनपीआर का पूरी तरह बायकाट करे क्यूंकि एनपीआर, एनआरसी का ही पहला चरण है. प्रस्ताव में कहा गया है कि यह कानून देश के हर मजहब के गरीबों के खिलाफ है, सिर्फ मुसलमानों के नहीं. केंद्र सरकार ऐसा कर मुसलमानों और हिंदुओं के बीच दरार पैदा कर इस कानून को लागू करना चाह रही है लेकिन सच यह है कि देश का कोई भी नागरिक संदेह के दायरे में आगाए तो अपने ही देश में बंगलादेशी , पाकिस्तानी या अफगानिस्तानी का सर्टिफिकेट ले कर रहना होगा जबकि वे भारत का असल नागरिक है. यह कानून देश के नागरिकों को दूसरे दर्जे का शहरी बनाने का नापाक मंसूबा है. इस लिए हिंदुओं को भी इस कानून से होने वाले नुकसान की जानकारी देने की जरूरत है ताकि वे भी एकजुट हो कर इस कानून के विरोध में खड़े हों.

प्रस्ताव में यूपी पुलिस जुल्म की निंदा भी की गई और कहा गया कि पुलिस ने छात्रों व महिलाओं के साथ भी बेरहमी से पेश आई. पुलिस के इस अमानवीय व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए असम में एनआरसी से बाहर रह गए भारतीयों के लिए कोई सम्मानजनक हल सरकार निकाले. देश भर में इस कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के समर्थन की बात करते हुए 25 जनवरी को मानव ऋंखला और 29 जनवरी को प्रस्तावित भारत बंद के समर्थन का भी प्रस्ताव पास हुआ. बैठक में छोटी-बड़ी 34 सियासी व सामाजिक संगठनों ने हिस्सा लेकर केंद्र व बिहार सरकार के खिलाफ इस कानून के वापस लेने तक लंबी लड़ाई का एलान किया. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2020 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.