भाजपा के लिए आसान नहीं है डगर मध्यप्रदेश में

Samachar Jagat | Wednesday, 11 Mar 2020 09:52:28 PM
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आखिराकर ढोल-ताशे और बाज-गाजे के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए. लंबे समय से वे कांग्रेस से नाराज थे. एक दशक तक केंद्र में मंत्री और करीब पंद्रह साल तक कांग्रेस के सांसद रहे ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस पर अपनी उपेक्षा का आरोप लगा कर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलवाई. सिंधिया के साथ ही उनके समर्थक पार्टी के 21 विधायकों के इस्तीफे से राज्य की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. ऐसी अटकले हैं कि सिंधिया को राज्यसभा का टिकट दिया जा सकता है और उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है. कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण पार्टी के महासचिव व पूर्ववर्ती ग्वालियर राजघराने के वंशज ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. 

भाजपा में शामिल होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मेरे जीवन में दो तारीखें बहुत महत्त्वपूर्ण रही हैं. व्यक्ति के जीवन में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जो व्यक्ति के जीवन को बदल कर रख देते हैं. मेरे जीवन में पहला दिन 30 सितंबर 2001, जिस दिन मैंने अपने पूज्य पिताजी को खोया. उसी के साथ दूसरी तारीख दस मार्च 2020 जो उनकी 75वीं वर्षगांठ थी, जहां जीवन में एक नई परिकल्पना और नया एक मोड़ का सामना करके एक नया निर्णय लिया है.

मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी के पाले में गेंद अब भी पूरी तरह से आती हुई नहीं दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक बंगलुरू में ठहरे ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के दस विधायक और दो मंत्री भाजपा में जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं. उनका कहना है कि हम लोग ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए आए थे, भाजपा में जाने के लिए नहीं. बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश भाजपा में भी अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई है. मंगलवार को भाजपा कार्यालय में नरोत्तम मिश्रा के समर्थन में नारे लगे थे, जिसे लेकर अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई. इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि बंगलुरु में रुके हुए कांग्रेस विधायक भी अपने भूमिका को लेकर पसोपेश में हैं.

सिंधिया केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. उनकी दादी दिवंगत विजय राजे सिंधिया इसी पार्टी में थीं. भाजपा में शामिल होते ही सिंधिया को राज्यसभा का टिकट थमा दिया गया और उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है. कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधि के कारण पार्टी के महासचिव व पूर्ववर्ती ग्वालियर राजघराने के वंशज ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से निष्कासित कर दिया. मंगलवार सुबह जब पूरा देश होली का जश्न मना रहा था, तभी सिंधिया ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर मुलाकात की. बैठक में क्या बातचीत हुई, इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ भी नहीं कहा गया है. अब दोनों पार्टियां कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने विधायकों को बचाने में लगी हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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