बिहार के लोगों को एनआरसी पर गुमराह करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

Samachar Jagat | Wednesday, 05 Feb 2020 08:16:41 AM
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संसद में नागरिकता कानून के पक्ष में वोट डालने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब चीख-चीख कर कह रहे हैं कि वे बिहार में एनआरसी लागू नहीं होने देंगे. लेकिन सच यह भी है कि अगर राज्यसभा में नीतीश कुमार और उनकी पार्टी ने संशोधित नागरिकता विधेयक के पक्ष में वोट नहीं दिया होता तो सीएए कानून वहीं दफ्न हो जाता क्योंकि राज्यसभा में भाजपा को बहुमत नहीं है. लेकिन नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने संसद में विधेयक के पक्ष में वोट डाल कर भाजपा को इस कानून को बनाने में मदद की है. बिहार के अवाम नीतीश कुमार से इसे लेकर सवाल भी कर रहे हैं. लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि बिहार में इसे लेकर गुपचुप तैयारी भी की जा रही है क्या. दरअसल मोकामा के बीडीओ सतीश कुमार के एक पत्र के बाद प्रदेश में हड़कंप है. सियासी दलों ने इस पर नीतीश कुमार को घेरा भी है. पत्र की भाषा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.



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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बिहार की जनता स झूठ बोलने और लोगों को भ्रमाने का आरोप लगाया. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर सीएए, एनआरपी और एनआऱसी पर बिहार की जनता से झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि नीतीश कुमार तो भाजपा से भी दो हाथ आगे निकल गए हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार की नीयत पर सवाल तो उठाया ही है, बीडीओ की स्कूल के प्राचार्य को लिखी चिट्ठी की भाषा पर भी सवाल खड़ा किया है. कुशवाहा ने कहा कि चिट्ठी की भाषा किसी कर्मचारी की कम, राजनीतिक दल के कार्यकर्ता की ज्यादा लगती है. कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ नीतीश कुमार बिहार में एनआरसी लागू नहीं करने की बात कह रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार इसकी तैयारी भी कर रही है, सरकारी अधिकारी की स्कूलों के प्राचार्य के नाम लिखा पत्र इसका सबूत है.

कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि उनकी सरकार ने अभी तक देश में एनआरसी लाने पर कोई फैसला ही नहीं लिया है लेकिन बिहार में इस पर काम शुरू कर दिया गया है. कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह रहे हैं कि बिहार में एनआरसी लागू ही नहीं होने दिया जायेगा. लेकिन इन घोषणाओं के बीच बिहार में एऩआरसी का काम शुरू हो गया है. पटना के मोकामा प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी के सरकारी पत्र से यह साफ होता है कि बिहार में इस पर काम शुरू हो गया है. कुशवाहा ने कहा कि सरकारी चिट्ठी में एनआरसी का काम नहीं करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

कुशवाहा ने एनआरसी पर नीतीश नीतीश कुमार के रुख और नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ नीतीश कुमार कहते हैं कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा दूसरी तरफ वे भाजपा से भी एक कदम आगे निकलकर एनआरसी को लेकर आदेश जारी करवा देते हैं. कुशवाहा ने कहा कि मोकामा बीडीओ ने तीन स्कूलों के प्राचार्य को जो पत्र लिखा है उससे यह साफ होता है कि नीतीश कुमार बिहार में एनआरसी पर काम कर रही है. पत्र में कहा गया है कि बीडीओ ने एनआरसी के काम के लिए हर स्कूल से दो दो शिक्षकों के नाम मांगे थे. लेकिन मोकामा प्रखंड के रामपुरडुमरा, मराची और मोर हाई स्कूल के प्रिंसिपल ने शिक्षकों के नाम नहीं भेजे. बीडीओ ने 18 जनवरी को ही पत्र लिखकर नाम मांगा था जो दस दिन बाद भी नहीं मिला.

कुशवाहा ने बीडीओ की भाषा पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने पत्र में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, उससे वे किसी खास राजनीतिक दल से प्रेरित लगते हैं. यह भाषा किसी सरकारी अधिकारी का नहीं हो सकता, सरकार को इनके खिलाफ अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए. मोकामा के बीडीओ ने अपने पत्र में कहा है कि एनआरसी के लिए शिक्षकों का नाम नहीं भेजने वाले स्कूलों के प्राचार्य किसी खास राजनीतिक दल से प्रेरित होकर उसका विरोध करते दिख रहे हैं. पत्र में उन्हें ये चेतावनी दी गयी है कि वे 24 घटे के भीतर शिक्षकों के नाम उपलब्ध कराये वरना उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. बीडीओ ने 28 जनवरी को पत्र लिखा है. पत्र में दो बार एनआरसी का जिक्र किया गया है. कुशवाहा ने कहा कि पत्र से साफ है कि नीतीश कुमार बाहर लोगों से कह रहे हैं कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा, लेकिन अंदर-अंदर सरकार इसकी तैयारी कर रही है, यह शर्मनाक है. राजद, हम और जन अधिकार पार्टी ने भी इस पर सरकार की नीयत पर तंज कसा है. सरकार ने इस पर सफाई भी दी है और इसे टाइप की गलती कहा गया है. सरकार ने आनन-फानन में बीडीओ का तबादला भी कर डाला है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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