तो झोलाछाप डाक्टरों और ठप्पा लगा कर कोरोना से लड़ने में जुटी है बिहार सरकार !

Samachar Jagat | Thursday, 02 Apr 2020 01:12:28 PM
2631412583903442

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर सवाल उठ रहे हैं. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच और नालंदा मेडिकल कालेज अस्पताल के डाक्टरों ने भी सवाल उठाया था और कहा था कि उन्हें सुरक्षा उपकरण सरकार नहीं दे रही है. सरकार का तंत्र चौपट हो गया है और स्वास्थ्य विभाग को जिस तरह काम करना चाहिए वह कर नहीं रहा है. राजधानी पटना में डाक्टरों का रोना है. उन्हें सुरक्षा उपकरण की बजाय एचआईवी किट्स देकर कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज करने को कहा गया. बिहार की स्वास्थ्य विभाग की यह तसवीर डराने वाली है. जिलों से भी इसी तरह की खबरें आरही हैं. अस्पतालों में डाक्टर सिर्फ मोहर मार कर ही अपना काम कर देते हैं और कह रहे हैं गो कोरोना गो. जितनी गंभीरता होने चाहिए वह नहीं है. राष्ट्रीय लोक समता पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सरकार के इंतजाम पर फिर सवाल उठाया है.

सरकार कोरोना जैसे आपदा से निपटने में सक्षम दिखाई नहीं दे रही है. न तो राज्यों में फंसे कामगारों की वह कायदे से सुध ले रही है और न ही बिहार के लोगों को बेहतर चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध करवा रही है. इन सबके बीच ही बिहार में भी कोरोना का फैलाव बढ़ा है. बिहार में कोरोना से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या तक 24 पहुंच गई है. लेकिन बिहार में सरकारी लापरवाही की भी तस्वीरें सामने आ रही हैं. बिहार में एक वीडियो तेजी से वायरल है जिसमें बिना जांच किए लोगों को ठप्पा लगाया जा रहा है. जाहिर है कि यह बहुत ही खतरनाक बात भी है और डराने वाली भी. इससे महामारी के पांव पसारने का खतरा बढ़ जाता है. सरकार की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है सीवान के सिविल सर्जन ने झोला छाप डाक्टरों तक की मदद की बात कही थी.

बिहार में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी पहले भी सवाल उठाती रही है. चमकी बुखार के दौर में पिछले साल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बाकायदा मुजफ्फरपुर से पटना तक पदयात्रा कर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की आवाज उठाई धी. कोरोना के खतरों के बीच इस लापरवाही को लेकर भी उपेंद्र कुशवाहा ने आवाज उठाई है. उन्होंने ट्वीट के जरिये सरकार पर हमला बोला. उपेन्द्र कुशवाहा ने ट्वीट कर लिखा कि कोरोना लॉकडाउन और वैश्विक मानवीय संकट की स्थिति में भी बिहार के सरकारी अस्पतालों में कोरोना वायरस जांच के नाम पर सिर्फ ठप्पा क्यों लगाया जा रहा है. ऐसी स्थिति न केवल बेगूसराय में है बल्कि दूसरे सभी जिलों में भी होगी. लोगों की जिंदगी से क्यों खेल रही सरकार. उन्होंने ट्वीट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संबोधित किया है और सवाल उठाए हैं.

दूसरे राज्यों से आ रहे बिहारियों के कोरोना जांच में लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. जाहिर है कि सवाल तो उठेंगे ही. गया के बाराचट्टी में सिर्फ जांच के नाम पर हाथ पर ठप्पा लगाया जा रहा है. उसके बाद रजिस्टर पर नाम पता लिखा जा रहा है. लेकिन कोई जांच नहीं की जा रही है. जब एक युवक ने इसका विरोध किया और पूछा कि बिना जांच किए आप नाम पता क्यों लिख रहे हैं. तब स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने कहा कि हमलोग जांच करते-करते पागल हो गए हैं. हमारे यहां यही व्यवस्था है. यहां पर किसी तरह की स्क्रीनिंग नहीं हो रही है. इसका वीडियो वायरल हो गया है. जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें दिख रहा है कि स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी को कोरोना को लेकर कोई तनाव नहीं है. वह आराम से बैठ कर मोबाइल चला रहे हैं. जब एक युवक ने पूछा कि क्या इसी तरह से जांच होगा तो कहा कि घर जाओ तुम्हारी जांच हो गई है. 

हालांकि कोरोना को लेकर बिहार सरकार अलर्ट पर है. लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच करने में लापरवाही बरत रहे हैं. ऐसे में इसका खामियाजा पूरे बिहार को भुगतना पड़ सकता है. मुजफ्फरपुर में भी सूचना देने के बाद भी मरीज के पास स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं गई. दूसरे राज्यों से आने वाले बिहार के लोगों की सीमा पर ही स्क्रीनिंग करने का आदेश दिया गया है. इसके साथ ही उनको क्वॉरेंटाइन करने का आदेश है. लेकिन कई जगहों पर लापरवाही सामने आई है. 

सरकारी अमला किस तरह से काम कर रहा है उसका एक नमूना तो सीवान से भी सामने आया. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के गैर जिम्मेदाराना पत्र ने विभाग को बैकफुट पर ला दिया है. मामला सामने आने के बाद सरकार ने आरोपी सिविल सर्जन को निलंबित कर दिया. लेकिन सरकार के तंत्र पर सवाल तो खड़ा कर ही दिया है. सीवान के सिविल सर्जन ने एक ऐसा आदेश निकाला जिससे कोरोना वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग की पूरी तैयारी की हकीकत सामने आ गई. सीवान के सिविल सर्जन ने 25 मार्च को सदर अस्पताल के उपाधीक्षक व अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी के नाम पत्र लिखा था. सिविल सर्जन ने अपने पत्र में लिखा था कि अपने-अपने क्षेत्र में निजी अस्पतालों व झोलाछाप चिकित्सक को चिन्हित कर उनसे सेवा लेने के लिए पत्र प्रेषित करने और उन्हें प्रशिक्षित करने के संबंध में सहमति पत्र प्राप्त करने के लिए कहा था. सिविल सर्जन ने पत्र में लिखा था कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए सभी प्रखंडों में झोलाछाप चिकित्सकों को चिन्हित करते हुए उनसे इलाज के लिए सहमति पत्र लेते हुए प्रशिक्षण देना है. इसलिए तत्काल सभी लोग सूचना दें ताकि 26 मार्च को प्रशिक्षण देना सुनिश्चित हो सके. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विशलेषण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2020 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.