महाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम से सोनिया गांधी की बांछें खिलीं

Samachar Jagat | Saturday, 16 Nov 2019 08:35:31 PM
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महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर छिड़े घमासान के बाद अब नया गठबंधन आकार लेता दिखाई दे रहा है. भाजपा और शिवसेना ने चुनाव तो साथ मिल कर लड़ा लेकिन चुनाव के बाद ढाई-ढाई साल सरकार में साझीदारी को लेकर दोनों का गठबंधन टूटा. अब शिवसेना कांग्रेस और राकांपा के साथ मिल कर सरकार गठन को लेकर आगे बढ़ रही है. कहा जा रहा है कि तीनों दलों के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय हो गया है और एक-दो दिन में सरकार गठन की तसवीर साफ हो जाएगी. शिवसेना लगातार भाजपा पर हमलावर है. शिवसेना ने सामना में भाजपा पर हमला करते हुए लिखा कि नए गठबंधन को लेकर कुछ लोगों के पेट में दर्द हो रहा है. शिवसेना ने भाजपा पर खरीद-फरोख्त का आरोप भी लगाया.

महाराष्ट्र में हालिया घटनाक्रम को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी काफी खुश हैं. पार्टी सूत्रों ने कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना के अलग होने के कारण कांग्रेस और उसकी सहयोगी शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) एक बार फिर एकजुट हो गई हैं. उनके लिए यह घटनाक्रम किसी वरदान से कम नहीं है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बहुमत मिलने के बाद भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूट चुका है. राज्य में कांग्रेस बीस सालों से कांग्रेस और राकांपा के रूप में विभाजित रही है और साथ ही भारी मतभेदों को झेलने के बाद भी एक-दूसरे का समय-समय पर सहयोग करती आई है.

दोनों दल और उसके कार्यकर्ता 1999 से 2014 तक अंदरूनी खींचतान और एक-दूसरे के साथ लड़ाई लड़ने में व्यस्त रहे और अनजाने में अपने प्रतिद्वंद्वियों को राजनीतिक लाभ दिया. यहां तक कि अक्टूबर के अंत तक, दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता आपस में राजनीतिक बयानबाजी में लगे हुए थे. पार्टियों ने एक-दूसरे की छवि को धूमिल किया. इसमें शक्तिशाली मुंबई कांग्रेस भी शामिल थी, इसका परिणाम यह हुआ कि लोकसभा और विधानसभा, दोनों ही चुनावों में खराब नतीजे सामने आए.

इस बार हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 44 और राकांपा को 54 सीटों पर जीत मिली, तो 2014 में यह आंकड़ा क्रमश: 42 और 41 था. दोनों दल का मनोबल तो जरूर बढ़ा, लेकिन दोनों अभी सरकार बनाने से बहुत दूर थीं. दोनों सहयोगी पार्टियां अपने बूते सरकार बना पाने में सक्षम नहीं थीं, लेकिन भाजपा-शिवसेना का गठबंध टूटने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से शिवसेना के अलग होने से इनकी स्थिति राज्य में और मजबूत दिखाई दे रही है. अब जबकि तीनों दल राज्य में सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो माना जा रहा है कि कांग्रेस को इससे बड़ा फायदा होगा. भाजपा के लिए तो यह बड़ा झटका है ही. इससे भाजपा को उबरने में समय लगेगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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