कोरोना के खतरों के बीच बरेली प्रशासन का अमानवीय चेहरा आया सामने

Samachar Jagat | Tuesday, 31 Mar 2020 08:29:19 PM
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कोरोना वायरस के खतरों और लॉकडाउन के बावजूद कामगारों का घरों को पैदल लौटना जारी है. हालांकि सोमवार को सरकार ने इस तरह घरों को लौटने पर पाबंदी लगाने का एलान तो किया, लेकिन लोग घरों को लौट रहे हैं. रोजी और रोटी के बिना बड़ें शहरों में रहने की बजाय लोग घरों को लौटना बेहतर समझ रहे हैं. घर लौटने वालों के साथ प्रशासन का अमानवीय चेहरा बरेली में नजर आया. कोरोना वायरस के खतरों के बीच प्रशासन के अमानवीय चेहरे का ताजा मामला उत्तर प्रदेश के बरेली से सामने आया है. यहां नगर निगम कर्मचारियों ने दूसरी जगहों से आए बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को सैनिटाइज करने का अनोखा तरीका निकाला. प्रशासन ने सबको जमीन पर बैठा कर उन्हें डिसइंफेक्ट किया. इसका एक वीडियो वायरल हुआ. वीडियो वायरल होते ही जिलाधिकारी ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. डीएम ने बाकायादा ट्वीट कर इसके लिए माफी मांगी और कार्रवाई का भरोसा दिलाया.

बरेली जिले में दिल्ली, हरियाणा, नोएडा से आए सैकड़ों मजदूरों, महिलाओं और छोटे बच्चों को जमीन पर बैठाकर उनके ऊपर डिसइंफेक्ट दवाई का छिड़काव किया गया. जिसके बाद बहुत सारे बच्चों ने अपनी आंखों में जलन की शिकायत की. उन पर डिसइंफेक्ट का छिड़काव कर इन्हें अपने घर भेज दिया गया. आंखों में जलन की शिकायत के बावजूद किसी को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के बरेली में मजदूरों को कथित तौर पर सैनेटाइजर से नहलाने की घटना को अमानवीय करार देते हुए कहा कि राज्य की भाजपा सरकार को पहले से ही दुख-तकलीफों का सामना कर रहे कामगारों को रसायन से नहीं नहलाना चाहिए. उन्होंने इससे जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया कि उप्र सरकार से गुजारिश है कि हम सब मिलकर इस आपदा के खिलाफ लड़ रहे हैं लेकिन कृपा करके ऐसे अमानवीय काम मत करिए.

इस घटना की बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने निंदा की है. उन्होंने ट्वीट किया कि देश में जारी जबर्दस्त लॉकडाउन के दौरान जनउपेक्षा व जुल्म की कई तस्वीरें मीडिया में आम हैं लेकिन प्रवासी मजदूरों पर यूपी के बरेली में कीटनाशक दवा का छिड़काव करके उन्हें दंडित करना क्रूरता व अमानीवयता है जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है. सरकार फौरन ध्यान दे. बेहतर होता कि केंद्र सरकार राज्यों का सीमा सील करके हजारों प्रवासी मजदूरों के परिवारों को बेआसरा व बेसहारा भूखा-प्यासा छोड़ देने के बजाए दो-चार विशेष ट्रेनें चलाकर इन्हें इनके घर तक जाने की मजबूरी को थोड़ा आसान कर देती. गरीब मजदूर, महिलाएं और बच्चों पर एंटी लार्वा केमिकल का छिड़काव किया गया जिसमें केमिकल डेंगू के मच्छर के लार्वा को मारने के काम आता है. केमिकल के छिड़काव की वजह से बच्चों सहित अन्य मजदूरों की आंखों में जलन की शिकायत हुई.

जाहिर है कि प्रशासन का यह रैवया सवालों में है. रिपोर्ट के मुताबिक इसमें वे मजदूर भी शामिल थे जो नोएडा से परिवार सहित पैदल बरेली पहुंचे थे. गरीबों पर किए गए इस अमानवीय घटना के बाद योगी सरकार दावे की हकीकत भी सामने आ गई. सरकार के करोना वायरस से लड़ने की हकीकत भी सामने आई है. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और दबाव बढ़ने के बाद बरेली के डीएम ने ट्वीट कर गलती स्वीकार की. डीएम ने लिखा कि इस वीडियो की पड़ताल की गई, प्रभावित लोगों का सीएमओ के निर्देशन में उपचार किया जा रहा है. बरेली नगर निगम व फायर ब्रिगेड की टीम को बसों को सैनेटाइज करने के निर्देश थे, लेतिन अतिसक्रियता की वजह से उन्होंने ऐसा कर दिया. संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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