संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटरेस ने सीएए के बहाने भारत के मुसलमानों के हालात पर जताई चिंता

Samachar Jagat | Saturday, 22 Feb 2020 02:56:47 PM
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भारत में सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दे देश की सीमा से निकल कर दुनिया भर का ध्यान खींच रहे हैं. करीब दो महीने से शाहीन बाग में प्रदर्शन चल रहा है. शाहीन बाग प्रतिरोध की आवाज बन गया है और देश भर में कई शाहीन बाग बन गए हैं. नगर-नगर और डगर-डगर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं. सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत के मूड में नहीं है लेकिन प्रदर्शन करने वालों के हौसले बुलंद हैं. सीएए के मुद्दे पर अब संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भी चिंता जताई है. जाहिर है कि उनकी चिंता पर भारत को चिंतित होना चाहिए. सीएए को लेकर विदेशों में धीरे-धीरे भारत की छवि पर असर पड़ रहा है.

पाकिस्तान के दौरे पर आए थे संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटरेस. एंटोनियो गुटरेस पहले जम्मू कश्मीर के हालात पर बयान दे चुके हैं. इस बार उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए पर बयान दिया. बयान उन्होंने पाकिस्तान में दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय संसद में पास किए गए नागरिकता संशोधन कानून की वजह से बीस लाख लोगों के देश विहीन होने का खतरा है, इनमें से ज्यादातर मुसलिम हैं. उन्होंने कहा कि मुझे इसे लेकर चिंता है. पाकिस्तानी अखबार को दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ रहे भेदभाव को लेकर वे चिंतिंत हैं, इसके जवाब में एंटोनियो गुटरेस ने कहा कि जब भी नागरिकता संबंधी कानूनों में बदलाव किया जाता है, इस तरह के प्रयास किए जाते हैं कि देशविहीनता की स्थिति पैदा न हो, और यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुनिया का हर नागरिक किसी न किसी देश का नागरिक भी हो.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटरेस की जम्मू कश्मीर पर की गई टिप्पणी के बाद भारत ने कहा था कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है व रहेगा और जिस मुद्दे पर ध्यान देने की सबसे अधिक जरूरत है, वह है पाकिस्तान के अवैध रूप से और जबरन कब्जा किए गए क्षेत्र का समाधान करना. पाकिस्तान की चार दिनों की यात्रा पर पहुंचे गुटरेस ने जम्मू-कश्मीर को लेकर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई भूमिका नहीं है. 

रवीश की यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटरेस की टिप्पणी के बाद आई थी. उन्होंने जम्मू कश्मीर की स्थिति पर चिंता जताई थी. पाकिस्तान के दौरे पर गए गुटरेस ने कहा था कि अगर दोनों देश सहमत हों तो वे मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि भारत की स्थिति बदली नहीं है. जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा. जिस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है, वह है पाकिस्तान के जबरन कब्जा किए गए क्षेत्र का समधान करना. रवीश कुमार ने कहा कि इसके आगे अगर कोई मसला है तो उस पर द्विपक्षीय चर्चा होगी. तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के लिए कोई भूमिका या गुंजाइश नहीं है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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