रास्ता खुलवाने के लिए मध्यस्थों ने शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से की बातचीत

Samachar Jagat | Thursday, 20 Feb 2020 06:58:24 AM
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शाहीन बाग का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सड़क पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं. दो महीने हो गए लेकिन शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों के हौसले जस के तस हैं. औरतों ने अपने आंचल को परचम बना कर देश में प्रतिरोध की नई इबारत लिखी है. इस इबारत ने देश में सैंकड़ों शाही बाग बना डाला जहां देशभक्ति के तराने भी गूंज रहे हैं और देश व संविधान बचाने के नारे भी. लेकिन शाहीन बाग जटिल समस्या बन गया है सरकार के लिए. महीनों से सड़क जाम है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा. अदालत ने प्रदर्शन को संवैधानिक हक तो बताया लेकिन सड़क को घेरे रखने पर एतराज भी जताया. इस मामले के सम्मानजनक हल के लिए अदालत ने वार्ताकारों को नियुक्त किया ताकि इस मामले का कोई बेहतर हल निकल सके.

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थ ने बुधवार को प्रदर्शनकारियों से बातचीत की. सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को वार्ताकार बनाया है. हालांकि बुधवार को बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची और गुरुवार को वे फिर बातचीत करेंगे. प्रदर्शनकारियों से बातचीत करके मध्यस्थ शाहीन बागे में रास्ता खुलवाने की कोशिश करेंगे. संजय हेगड़े ने शाहीन बाग में कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक यहां आए हैं. हम सभी से बातचीत करने की उम्मीद करते हैं. हम सभी के सहयोग से इस मामले के समाधान की उम्मीद करते हैं.

प्रदर्शनकारियों से बात करते हुए संजय हेगड़े ने कहा कि हम आपकी बात सुनने आए हैं, आपके लिए बहुत जरूरी है यह सुनना कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले पर क्या कहा है. जिसके बाद संजय हेगड़े ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पढ़कर प्रदर्शनकारियों को सुनाया. उनकी साथी वार्ताकार साधना रामचंद्रन ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आपके आंदोलन करने के हक़ का समर्थन किया है,लेकिन हम सबकी तरह और भी नागरिक है उनका हक छीना नहीं छीना जा सकता है.

साधना रामचंद्रन ने कहा कि हमें इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने भेजा है कि हम मिलकर हल निकालें. हम मिलकर आप सबकी बात सुनना चाहते है. हम ऐसा हल निकालेंगे कि वह दुनिया के लिए मिसाल बनेगा हम बगैर मीडिया के आपसे बात करना चाहते है. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जो भी बात करनी है वह मीडिया के सामने होनी चाहिए. प्रदर्शनकारियों के मीडिया के सामने ही वार्ता करने की बात पर साधना रामचंद्रन ने कहा कि अगर आप मीडिया के सामने बात करना चाहते हैं तो हम कुछ कहेंगे ही नहीं. हम सिर्फ़ आपको सुनेंगे हमारे पास रविवार तक का वक़्त है. साधना रामचंद्रन ने कहा कि हमें इस तरह से हल निकालना है कि रास्ता खुल जाए. उनकी बात पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने एतराज जताया और दादी ने कहा कि सड़क तब तक नहीं खोलेंगे जब तक सीएए वापस नहीं लिया जाएगा.

शाहीन बाग़ में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में जारी आंदोलन के ख़िलाफ़ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम धरने पर कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि यह धरना कहां हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमारी चिंता इस बात पर है कि यह प्रदर्शन सड़क पर किया जा रहा है, इस केस या फिर किसी भी केस में सड़क को रोका नहीं जा सकता है. इसके जवाब में शाहीन बाग पक्ष के वकील ने कहा था कि हमें इसके लिए थोड़ा समय चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा था कि अगर दूसरे मामले में भी सड़क बंद करके इस तरह का प्रदर्शन करते हैं तो अफरातफरी मच जाएगी. याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने धरना प्रदर्शन को लेकर गाइडलाइन बनाई थी, लेकिन यहां सड़क को बंद कर रखा गया है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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