सत्ता के खेल में उलझी मध्यप्रदेश की सियासत

Samachar Jagat | Monday, 16 Mar 2020 03:52:14 PM
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मध्यप्रदेश में सत्ता के खेल उलझ गया है. हालांकि जो तसवीर दिखाई दे रही है उसे देखते हुए कमलनाथ सरकार का बचना मुश्किल दिखाई देता है. सरकार गिराने और बचाने का खेल चल रहा है. विधायकों को साथ रखने और तोड़ने की कवायद भी चल रही है. यूं कमलनाथ को सोमवार को सदन में विश्वास मत हासिल करना है लेकिन अभी कई पेंच फंसा है. कोरोना वायरस का खेल भी कांग्रेस खेल कर भाजपा को मात दे सकती है. मध्यप्रदेश में पंद्रह साल बाद सत्ता में आई पंद्रह महीने पुरानी कमलनाथ की अगुआ वाली कांग्रेस सरकार का भविष्य सोमवार को तय हो सकता है. राज्यपाल के आदेश के मुताबिक सरकार को बहुमत साबित करना है. हालांकि कैबिनेट मंत्रियों के बयान और स्पीकर के इशारों से लग रहा है कि बहुमत परीक्षण टल भी सकता है. इस बीच जयपुर में रुके कांग्रेस के विधायक लौट चुके हैं. दूसरी तरफ गुरुग्राम गए भाजपा के विधायक भी देर रात भोपाल लौट आए.



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विधानसभा अध्यक्ष पर मध्यप्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था चलाने का दायित्व है. इस व्यवस्था में भार ज्यादा है, वक्त कम है, ऊपर से करोना का खतरा भी है. विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कहा कि मैं विधानसभा का संरक्षक हूं. मेरी विधानसभा के माननीय सदस्यों के साथ क्या हो रहा है, यह लोकतंत्र पर सवाल है. कल जब वे आएंगे, मास्क भी दिए जाएंगे, सैनिटाइजर भी. चिंता तो है, लेकिन प्राथमिकता किसी प्रदेश की स्वास्थ्य के प्रति होती है. वैसे विधानसभा के एजंडे में फ्लोर टेस्ट का जिक्र नहीं है.

इस बीच सरकार के भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ बेफिक्र हैं और भाजपा को सदन के अंदर वोटिंग मशीन की फिक्र है. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि आज ये जानकारी मिली है कि विधानसभा का इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा है. हमने राज्यपाल से मिलकर मांग की है कि हाथ उठाकर परीक्षण करवा लें. कांग्रेस के तेरह बागी विधायकों को लेकर सवाल है क्योंकि उनके इस्तीफे स्वीकारा नहीं किए गए हैं. सोमवार को अगर कोई पेंच फंसा तो कैसे सुलझेगा, इसके लिए भाजपा के नेताओं ने भी महाधिवक्ता के घर दौड़ लगा दी है.

कांग्रेस के विधायक जयपुर यात्रा से लौट आए हैं, कैबिनेट की बैठक भी हो गई है लेकिन सारे मंत्री कोरोना को लेकर परेशानी की बात कह रहे हैं. जयपुर से लौटे कांग्रेस विधायकों की मेडिकल जांच भी हो गई है. करोना की खबर यूं ही नहीं है. सरकार ने राज्य में मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ एक्ट- 1949 को लागू कर दिया है. इसके तहत स्वास्थ्य अधिकारियों को मजिस्ट्रेट जैसी शक्तियां मिल गई हैं. कोरोना को रोकने वे लोगों को अलग-थलग कर उन्हें रोक सकते हैं. इस बीच प्रदेश के मंत्री पीसी शर्मा ने नलखेड़ा में हवन करके लौटे हैं. वे कह रहे हैं कि उन्होंने अपने पुराने साथियों के वीडियो गौर से देखे हैं. उन्हें लगता है उनके साथ तंत्र-मंत्र हुआ है. पीसी शर्मा का कहना है कि उनके चेहरे परेशान, पीड़ित दिख रहे हैं. वे हिप्नोटाइज हैं, इस तरह का लग रहा है.

मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सदस्य हैं. दो विधायकों का निधन हो चुका है और छह विधायकों के इस्तीफे अध्यक्ष स्वीकार कर चुके हैं. इससे कुल सदस्य संख्या 222 हो गई है. ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 112 है. कांग्रेस के विधायकों की संख्या 108 है, लेकिन उसे सपा के एक, बसपा के दो और चार निर्दलीय विधायकों का समर्थन है. दूसरी तरफ भाजपा के 107 विधायक हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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