कोरोना महामारी के बीच टूटी नहीं है उम्मीदों की डोर

Samachar Jagat | Tuesday, 24 Mar 2020 07:29:25 PM
3232016746519769

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के थाली और ताली बजाने को लेकर सोशल मीडिया पर अब भी मजाक बनाया जा रहा है. इसे लेकर अपने-अपने तर्क दिए जा रहे हैं. हर तरफ माहौल गमजदा है. कोरोना से देश में संक्रमित लोगों की तादाद में इजाफा हो रहा है. मरने वालों की तादाद भी दस तक पहुंच गई है. लेकिन अंधेरे और मायूसी के बीच ही उम्मीद की कई छोटी-छोटी किरणें भी फूट रहीं हैं. पाकिस्तान से दिल के इलाज के लिए भारत आए और वाघा-अटारी बॉर्डर पर फंसे नन्हें शीराज़ को अमृतसर के रविंदर सिंह रॉबिन ने अपने घर पर पनाह दी और भारत और पाकिस्तान की हुक़ूमत ने एकजुट होकर उन सबके देश लौटने का इंतज़ाम किया.



loading...

ऐसा तब हुआ जब भारत के कुछ टीवी चैनल 'अब कोरोना की मौत मरेगा पाकिस्तान' जैसा कार्यक्रम चला रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे शिराज़ के परिवार के एक वीडियो में पाकिस्तान में 35 कश्मीरी लड़कियों के फंसे होने की बात भी कही जा रही है. दुबई में रहने वाली कनिका सोशल मीडिया पर लिख रहीं हैं कि कोरोना की वजह से किसी की नौकरी छूट गई है तो उनके छोटे से घर में एक बिस्तर और खाने के लिए पर्याप्त सामान हैं, वे उनके घर आ सकते हैं. इसी तरह का एलान कई जगहों पर दिखाई दिया. लोग मजहब की दीवार तोड़ कर लोगों की मदद कर रहे हैं.

यह अलग बात है कि विश्व पर आए इस बड़े संकट के बीच कुछ लोग गौ-मूत्र पार्टी का निमंत्रण भेजकर और उसे पीकर कोरोना वायरस को दूर करने की बात कह रहे थे, तो यह बहस भी छिड़ी है कि शायद ऐसे वक़्त में लोग रूढ़िवादी नज़रिये से परे हटकर वैज्ञानिक सोच-समझ विकसित करेंगे, जिसका उल्लेख भारतीय संविधान में भी किया गया है. चौदहवीं सदी के प्लेग में एक अनुमान के मुताबिक़ लाखों लोगों की मौत हुई थी. इस घटना ने यूरोप की हुक़ूमतों पर से चर्च के प्रभाव को कम किया था और वहां नए युग की शुरुआत हुई थी. किसी भी जगह अधिक लोगों के जमा न होने की अपील की जा रही है. मंदिरों और मस्जिदों में भी लोग जमा नहीं हो रहे हैं और पूजा व नमाज पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

जबकि कोरोना वायरस फैलने की वजह से सऊदी अरब ने साल भर चलने वाली मक्का-मदीने की धार्मिक यात्रा को जिसे उमरा भी कहा जाता है, रद्द कर दिया है. धार्मिक-स्थलों की जगह अस्पतालों को चंदे देने की अपील भी लोगों के बीच से उठ रही है. बड़े पैमाने पर लोग सरकारों और संस्थाओं से अपील कर रहे हैं कि दिहाड़ी मज़दूरों और घर पर रोज़मर्रा के काम के लिए रखे जाने वाले कामगारों के बारे में भी सोचें और उनके पैसे ना काटें. सरकार से इस बाबत किसी तरह के दिशा-निर्देश की बात पर भी लोगों के बीच चर्चा है. इन मज़दूरों के पास वर्क फ़्रॉम होम की सुविधा नहीं है इसलिए इस पर जल्द से जल्द फ़ैसला होना चाहिए.

चीन में गुरुवार के बाद से कोरोना वायरस के किसी नए मामले की ख़बर नहीं है, यह एक उम्मीद की किरण है. लेकिन कहा ये भी जा रहा है कि 39 ऐसे मामले वहां सामने आए हैं जो लोग विदेश से चीन वापस आए हैं. इस बीच भारत में कोरोना वायरस की वजह से मरने वालों की संख्या दस हो गई है, जबकि देश में कुल संभावित केसों की संख्या पांच सौ के पार हो गई है. इन सबके बीच ही कई बातें ऐसी हैं जो उम्मीद जगाती हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


loading...


 
loading...

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!




Copyright @ 2020 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.