राज्यपाल ने कमलनाथ से सोमवार को बहुमक साबित करने को कहा

Samachar Jagat | Sunday, 15 Mar 2020 09:14:17 PM
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देश में कोरोना वायरस के शोर ने मध्यप्रदेश में चल रहे सियासी घमासान की खबरों को तो पीछे छोड़ दिया लेकिन लगता है कि आरपार की लड़ाई का समय आ गया है. इसे यूं भी कहा जा सकता है कि कमलनाथ सरकार के भाग्य का फैसला सोमवार को तय होगा. राज्यपाल लालजी टंडन ने कमलनाथ से सोमवार को फ्लोर टेस्ट के लिए कहा है. इस बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी कर दिया. इससे पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि कथित तौर पर बंगलुरु और दूसरी जगहों में बंधक बनाए गए कांग्रेस के 22 विधायकों की रिहाई वे सुनिश्चित करें ताकि ये विधायक विधानसभा के सत्र में शामिल हो सकें.

कमलनाथ ने मीडिया को जारी शाह को लिखे अपने चार पृष्ठ के पत्र में कहा कि आप कृपया केंद्रीय गृह मंत्री होने के नाते अपनी शक्तियों का प्रयोग करें जिससे कांग्रेस के 22 विधायक जो बंदी बनाए गए हैं वे वापस मध्यप्रदेश सुरक्षित पहुंच सकें और 16 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में विधायक के रुप में अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को बिना भय या लालच के निर्वाह कर सकें. कोरोना वायरस की शोर के बावजूद फिलहाल मध्यप्रदेश की राजनीति पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं. हाल ही में वहां सत्ताधारी कांग्रेस के कुछ विधायक जब अचानक गुरुग्राम पहुंचा दिए गए तो एकाएक सियासी भूचाल आ गया.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायकों की खरीद-फरोख्त कर कमलनाथ सरकार गिराना चाहती है. उस समय तो कुछ विधायक लौट आए लेकिन जब कांग्रेस के पुराने साथी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अचानक भाजपा का दामन थामा तो कमलनाथ सरकार पर असल में संकट के बादल मंडराने लगे. भाजपा की राज्य इकाई के नेता दावा करने लगे कि मौजूदा राज्य सरकार अल्पमत में है, लिहाजा बहुमत परीक्षण कराया जाए. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की थी. मुख्यमंत्री फ्लोर टेस्ट कराए जाने को लेकर राज्यपाल से मिले थे. अब राज्यपाल ने स्पीकर से कहा है कि सदन में सोमवार को बहुमत परीक्षण कराया जाए.

राज्यपाल लालजी टंडन ने बहुमत परीक्षण के निर्देश जारी किए हैं. इसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र 16 मार्च को सुबह ग्यारह बजे शुरू होगा और मेरे अभिभाषण के तत्काल बाद एकमात्र कार्य विश्वास प्रस्ताव पर मतदान होगा. विश्वासमत मत विभाजन के आधार पर बटन दबाकर ही होगा और दूसरे किसी तरीके से नहीं किया जाएगा. कहा जा रहा है कि मध्यप्रदेश के 22 विधायकों ने अपनी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, इनमें से 19 विधायक बंगलुरु में हैं. दूसरी तरफ कमलनाथ ने राज्यपाल को एक पत्र देकर भाजपा पर आरोप लगाया है कि भाजपा उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है. साथ ही मांग की थी कि इसी बजट सत्र में उनकी सरकार का शक्ति परीक्षण किया जाए. वहीं राज्य सरकार ने बंगलुरु गए छह मंत्रियों को बर्खास्त करने की राज्यपाल से सिफारिश भी की थी. मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने शनिवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया का समर्थन करने वाले छह पूर्व मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं. इन मंत्रियों ने दस मार्च को इस्तीफे दिए थे.

अध्यक्ष ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रभुराम चौधरी, प्रद्युम्न तोमर, तुलसीराम सिलावट और इमरती देवी के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया का दावा है कि 22 विधायक उनके साथ हैं. फिलहाल सत्तासीन कांग्रेस के कांग्रेस के 114 में से 22 विधायकों ने इस्तीफे दे दिए हैं और अगर इन्हें स्वीकार कर लिया गया, तो कमलनाथ सरकार का गिर जाना तय है, क्योंकि उस स्थिति में 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 206 रह जाएगी (दो सदस्यों के देहावसान के चलते इस वक्त यह संख्या 228 है) और बहुमत के लिए आवश्यक संख्या 104 रह जाएगी. इस्तीफों के मंजूर हो जाने पर कांग्रेस की सदस्य संख्या 92 रह जाएगी, और भाजपा के पास 107 सदस्य हैं.

दूसरी तरफ पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट करते हुए कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने ट्वीट में लिखा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपनाए गए चरित्र को लेकर मुझे ज़रा भी अफसोस नहीं है. सिंधिया खानदान ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी जिस अंग्रेज हुकूमत और उनका साथ देने वाली विचारधारा की पंक्ति में खड़े होकर उनकी मदद की थी, आज ज्योतिरादित्य ने उसी घिनौनी विचारधारा के साथ एक बार पुनः खड़े होकर अपने पूर्वजों को सलामी दी है. अरुण यादव ने लिखा कि आने वाला वक़्त अपने स्वार्थों के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पंद्रह साल तक किए गए ईमानदारी पूर्ण जमीनी संघर्ष के बाद पाई सत्ता को अपने निजी स्वार्थों के लिए झोंक देने वाले जयचंदों-मीर जाफरों को कड़ा सबक सिखाएगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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