दिल्ली के दंगों पर अमित शाह के बयानों में विरोधाभास

Samachar Jagat | Sunday, 15 Mar 2020 08:44:22 PM
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में हुए दंगों को लेकर जवाब तो दिया लेकिन उन्होंने जवाब के दौरान एनपीआर पर जो भी कहा, उससे सवाल और पनपे. माना जा रहा है कि उन्होंने सदन और देश को गुमारह तो किया ही, कुछ ऐसी बातें भी कहीं जिसे लेकर सवाल उठने लाजमी हैं. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में पचास से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गवाई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में चर्चा के दौरान दिल्ली दंगों पर बयान दिया. लेकिन गृह मंत्री के इस बयान में विरोधाभास देखने को मिला. सदन में अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे एक पूर्वनियोजित साजिश थी. लेकिन कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि यह हिंसा अचानक फैली थी.

प्रेस सूचना ब्यूरो ने 25 फरवरी को बयान जारी किया था. बयान में अमित शाह ने कहा था कि पेशेवर आकलन है कि राजधानी में हिंसा अचानक फैली थी. बयान में कहा गया है कि उन्हें दिल्ली पुलिस पर पूरा भरोसा था और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने अधिकतम संयम दिखाया. यह बयान 25 फरवरी को दिल्ली के हालात पर एक बैठक के बाद दिया गया था. इस बैठक में दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद थे. बुधवार को लोकसभा में अपने भाषण में, शाह ने कहा कि इस हिंसा के लिए हवाले के माध्यम से पैसा लगाया गया था. उत्तर प्रदेश के तीन सौ से अधिक दंगाइयों की पहचान की गई थी, जिससे पता लगता है कि दंगे की योजना पहले से बनाई गई थी.

शाह ने कहा कि दिल्ली दंगा के गुनहगारों को बख्शा नहीं जाएगा. दिल्ली दंगे को लेकर 27 फरवरी से अब तक सात सौ से ज्यादा एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. अपने इस भाषण में शाह ने बताया कि वो खुद दिल्ली हिंसा प्रभावित इलाकों में क्यों नहीं गए और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को क्यों भेजा. केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मैं इसलिए दंगा प्रभावित इलाकों में नहीं गया, क्योंकि अगर मैं जाता, तो मेरे जाने से पुलिस मेरे पीछे लगती और पुलिस दंगे रोकने में अपने बल को नहीं लगा पाती. इसलिए मैंने अजीत डोभाल को भेजा था. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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