मध्यप्रदेश में फिर खिला कमल, शिवराज बने मुख्यमंत्री

Samachar Jagat | Tuesday, 24 Mar 2020 06:17:31 AM
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कांग्रेस के कमलनाथ के जाने के बाद मध्यप्रदेश में कमल फिर खिला. शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बने. भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान को राजभवन में राज्यपाल लालजी टंडन ने सोमवार की रात आयोजित समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. चौहान ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. राजभवन में सीमित संख्या में मौजूद लोगों की मौजूदगी में आयोजित समारोह में राज्यपाल लालजी टंडन ने चौहान को शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण करने के बाद चौहान ने जनता कर्फ्यू की सफलता का जिक्र करते हुए लोगों से आह्वान किया है कि वे कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए आगे आएं. शपथ ग्रहण समारोह में निवर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ भी मौजूद थे. भाजपा विधायक चौहान को अपना नेता चुने जाने के बाद बस में सवार होकर राजभवन पहुंचे थे. भाजपा ने कोरोना वायरस के खतरे को ध्यान में रखते हुए भाजपा की बैठक में विधायकों को एक दूसरे से एक मीटर से ज्यादा की दूरी पर बैठाया था. 

चौहान इससे पहले तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वे पहली बार वह 29 नवंबर 2005 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे. भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पार्टी विधायकों की बैठक में प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने दल के नेता के चयन के लिए विधायकों को आमंत्रित किया. गोपाल भार्गव ने विधायक दल के नेता के रूप में चौहान के नाम का प्रस्ताव किया, जिसका सभी विधायकों ने समर्थन किया. वीडियो कफ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय पर्यवेक्षक अरुण सिंह ने भार्गव के प्रस्ताव का विधायकों के समर्थन पर चौहान को विधायक दल का नेता चुनने का एलान किया. कमलनाथ ने 20 मार्च को इस्तीफा दिया था. इसके बाद से ही भाजपा में सरकार गठन की कवायद चल रही थी. पार्टी के निर्देश पर शाम छह बजे विधायक दल की बैठक हुई. इस बैठक में विधायकों से केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर विनय सहस्त्रबुद्धे व अरुण सिंह ने वीडियो कफ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की. उसके बाद सर्वसम्मति से चौहान को नेता चुना गया.

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि रीवा, सीधी, सिंगरौली के विधायक बैठक में नहीं आ पाए, लेकिन उनकी सहमति ली गई. कुल विधायकों में 80-85 फीसद विधायक बैठक में पहुंचे. भाजपा ने कोरोना वायरस को लेकर बैठक में हिस्सा लेने आने वाले विधायकों को अन्य किसी को साथ न लाने के निर्देश दिए थे, जिसका सभी ने पालन किया. इसके अलावा विधायक मास्क लगाए हुए थे और उन्होंने सेनेटाइजर का उपयोग कर ही बैठक में हिस्सा लिया. कांग्रेस के 22 विधायकों के बगावत करने और सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने के बाद कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 20 मार्च को पद से इस्तीफा दे दिया था, उसके बाद से कमलनाथ सरकार को राज्यपाल ने कार्यवाहक के तौर पर काम करने के निर्देश दिए थे. भाजपा सूत्रों का कहना है कि कोरोनावायरस के संक्रमण के चलते राज्य के लिए स्थायी सरकार की जरूरत है. इसलिए भाजपा ने विधायक दल की बैठक बुलाई और नेता का चुनाव किया. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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